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2018 में इक्विटी देगा 20 फीसदी प्रतिफल!

पुनीत वाधवा |  Nov 26, 2017 09:57 PM IST

मोतीलाल ओसवाल फाइनैंशियल सर्विसेज के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक मोतीलाल ओसवाल का मानना है कि मूडीज के भारत की सॉवरिन रेटिंग बढ़ाने और आय वृद्घि की रफ्तार मजबूत होने से भारत विदेशी निवेशकों के लिए आकर्षक निवेश स्थान बना रहेगा। पेश है उनसे पुनीत वाधवा की बातचीत के मुख्य अंश :

 
मूडीज ने भारत की रेटिंग बढ़ा दी है, जबकि एसऐंडपी ने बदलाव नहीं किया है। उनके कदम को आप कैसे देखते हैं?
 
मूडीज की रेटिंग में वृद्घि दो पहलुओं से सकारात्मक कदम है। पहला, भारत दीर्घावधि के नजरिये से बेहतर निवेश स्थान बन गया है। इसे देखते हुए न सिर्फ पोर्टफोलियो रकम बल्कि ढेर सार सॉवरिन और विदेशी प्रत्यक्ष निवेश भारत आएगा। दूसरा, रेटिंग सुधरने से मुद्रा जोखिम की सोच घटेगी और भारतीय कंपनियों को वैश्विक बाजारों से सस्ती दर पर कर्ज की उपलब्धता बढ़ेगी। जहां तक एसऐंडपी का सवाल है, तो वह भी देर-सबेर रेटिंग बढ़ाएगी।
 
अगले साल बाजार कैसा रहेगा?
 
कई ऐसी घरेलू और बाहरी घटनाएं और कदम होंगे जो भारत को अगले कुछ वर्षों के दौरान आकर्षक निवेश स्थान बनाए रखने में मदद मिलेगी। भारतीय शेयर बाजार अगले वर्ष 20 फीसदी से अधिक का प्रतिफल दे सकता है।  निकट भविष्य में जिन चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है, वे आय वृद्घि से जुड़ी हैं। इसके अलावा अगर बुनियादी ढांचा खर्च में देरी होती है तो इसका असर निवेश चक्र पर पड़ेगा। साथ ही, अगर फंसे कर्जों के मामलों  के समाधान में विलंब हुआ तो बैंक ब्याज दर कटौती का लाभ उपभोक्ताओं को दे पाने में समर्थ नहीं होंगे।
 
बाजार किस हद तक गुजरात में भाजपा की जीत मान रहा है?
 
बाजार निश्चित तौर पर गुजरात में भाजपा की जीत की उम्मीद कर रहा है, लेकिन जीत के अंतर को लेकर बहस जारी है। 
 
केंद्रीय बजट से आपकी उम्मीदें? क्या सरकार वृद्घि के लिए राजकोषीय घाटे का लक्ष्य बदल सकती है?
 
ज्यादातर सभी बड़े मुद्दों/नीतिगत उपायों पर पूरे वर्ष जोर दिया गया है। जैसे जीएसटी कानून, प्रत्यक्ष कर को लेकर समिति, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के पुनर्पूंजीकरण उपाय, दिवालिया कानून आदि। इसलिए केंद्रीय बजट में करने को ज्यादा नहीं दिखता है। अलबत्ता, बुनियादी ढांचा क्षेत्र पर जोर देने के लिए राजकोषीय घाटे का लक्ष्य थोड़ा बढ़ाया जा सकता है, क्योंकि सरकार के लिए यही सबसे अच्छा तरीका है जिसके जरिए वह अधिक रोजगार सृजित कर अर्थव्यवस्था को फिर से गति दे सकती है। दरअसल, इस बजट में राजकोषीय घाटा अगर थोड़ा बढ़ा भी तो उसे सकारात्मक माना जाएगा, क्योंकि इससे सरकार के खर्च और योजनाओं की दिशा का अंदाजा लगेगा।
 
अगले साल विदेशी संस्थागत निवेश कैसा रहेगा? क्या म्युचुअल फंडों का धन लगातार मददगार बना रहेगा?
 
एफआईआई के लिए भारत सकारात्मक स्थान बना रहेगा। जब भी विदेशी निवेशकों ने सेकंडरी बाजार में शुद्घ बिकवाली की, वह रकम प्राथमिक बाजार यानी आईपीओ के जरिये वापस आई है। इसलिए तकनीकी तौर पर इस साल बहुत ज्यादा रकम भारतीय इक्विटी बाजारों से बाहर नहीं गई है। हालांकि, रेटिंग में बदलाव और आय वृद्घि की रफ्तार फिर से मजबूत होने से भारत वर्ष 2018 में भी एफआईआई के लिए पसंदीदा स्थान बना रहेगा।
 
बाजार की तेजी के अगले दौर में कौन से शेयर बढ़ेंगे? वित्त वर्ष 2018 और 2019 में आय वृद्घि के लिए आपका क्या अनुमान है?
 
भारत कम विकसित वित्तीय बाजार है। हमने इक्विटी बाजारों में अच्छा प्रवाह देखा है। वित्तीय बाजार अधिक बड़े और मजबूत होंगे। हमारे पास गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों, नए निजी बैंकों, पेमेंट गेटवे व्यवसाय की कंपनियों, बीमा कंपनियों आदि जैसे विभिन्न अवसर रहेंगे। इनमें काफी हलचल रहेगी। जहां वित्त वर्ष 2018 में 14 फीसदी की आय वृद्घि दर्ज की जाएगी वहीं वित्त वर्ष 2019 में 19 फीसदी से अधिक की आय वृद्घि की उम्मीद है।
 
बैंकिंग क्षेत्र में कई पहल हुई हैं। आप क्या कहते हैं? क्या बैंकिंग शेयरों में तेजी उच्च स्तर पर पहुंच चुकी है?
 
इन पहल से बैंकिंग क्षेत्र और अर्थव्यवस्था को दो तरह से मदद मिलगी। पहला, इससे व्यावसायिक परिदृश्य बेहतर बनाने में मदद मिलेगी। दूसरा, भविष्य के लिए शानदार ढांचा तैयार होगा जिससे जायज उधारी में मदद मिलेगी। बैंक कम ब्याज दर का लाभ ग्राहकों को मुहैया करा सकेंगे। पुनर्पूंजीकरण और दिवालिया कानून ऐसी शानदार पहल हैं जिनसे आने वाले कई वर्षों तक लाभ मिलता रहेगा। बैंकिंग शेयरों में तेजी वास्तविक है और अभी इन शेयरों में काफी दमखम है। 
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