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बुनियाद के दर्जे से लॉजिस्टिक क्षेत्र होगा मजबूत

राम प्रसाद साहू |  Nov 26, 2017 09:57 PM IST

सरकार द्वारा लॉजिस्टिक को इन्फ्रास्ट्रक्चर का दर्जा दिए जाने के बाद शेयर बाजार में इस क्षेत्र की कंपनियों के शेयरों में मजबूती आई है। इस कदम से मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक क्षेत्र (जिसमें गोदाम और अंतर्देशीय कंटेनर डिपो शामिल) की कंपनियों को मदद मिलने की संभावना है। विश्लेषकों का मानना है कि कंपनियां अपनी फंडिंग की लागत घटाने, आसान शर्तों के साथ इन्फ्रास्ट्रक्चर उधारी तक पहुंच बनाने, लंबी अवधि के कोष तक पहुंच बनाने, बाह्ïय वाणिज्यिक उधारी विकल्प का लाभ उठाने और प्रतिस्पर्धी दरों पपर अपने मौजूदा ऋणों के पुनर्वित्त में सक्षम रहेंगी। कोटक सिक्योरिटीज के उपाध्यक्ष अमित अग्रवाल का कहना है, 'इस क्षेत्र को इन्फ्रास्ट्रक्चर का दर्जा संस्थागत उधारी तक आसान पहुंच सुनिश्चित करेगा और साथ ही लॅॉजिस्टिक कंपनियों उधारी की लागत घटाने (अनुमानित रूप से 1 प्रतिशत तक) में भी मदद मिलेगी। लॉजिस्टिक कंपनियों में अलकारगो, कॉनकोर (कंटेनर कॉरपोरेशन), गेटवे, वीआरएल, एजिस लॉजिस्टिक्स, गति, स्नोमैन और टीसीआई मुख्य रूप से शामिल हैं।' यह दर्जा एक ऐसे क्षेत्र के लिए सकारात्मक है जिसे धीमी आर्थिक वृद्घि और सुस्त कारोबार की वजह से आगे बढऩे के लिए संघर्ष का सामना करना पड़ा है। कंटेनर फ्रेट स्टेशन ऑपरेटरों और कॉनकोर, गेटवे डिस्ट्रिपाक्र्स तथा नवकर कॉरपोरेशन जैसी बहुराष्टï्रीय कंपनियों को कड़ी प्रतिस्पर्धा और कमजोर बिक्री की वजह से अधिक डिस्काउंट देने को बाध्य होना पड़ा था। 

 
इस क्षेत्र की कंपनियों के शेयर इस उम्मीद से बढ़े हैं कि वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) एक महत्त्वपूर्ण कारक होगा, इससे उनकी वृद्घि और मुनाफे को मदद मिलेगी। फिर भी मुनाफे की उम्मीद बरकरार है, लेकिन इसके जल्द हासिल होने की संभावना नहीं है। डॉयचे बैंक के विश्लेषकों का कहना है कि उदाहरण के लिए, एफएमसीजी क्षेत्र में व्यापार पर दबाव (वितरक और होलसेल चैनल, दोनों के संदर्भ में) को देखते हुए ज्यादातर कंपनियों द्वारा अपनी आपूर्ति श्रृंखला को दुरुस्त बनाने के लिए अभी तक कोई बड़ा बदलाव नहीं किया गया है। 
 
इसके अलावा, ई-वे बिल के क्रियान्वयन में विलंब (अगले साल 1 अप्रैल तक टाला जाना) अन्य कारण है जिसकी वजह से बाजार की उम्मीदें लॉजिस्टिक क्षेत्र के संदर्भ में नरम पड़ी हैं। एचएसबीसी के विश्लेषकों का कहना है कि गोदामों के समेकन के अलावा, सभी राज्यों में एक समान और स्वत: दस्तावेजी प्रक्रिया की वजह से परिवहन दक्षता से जीएसटी के साथ साथ ई-वे बिल प्रणाली से लॉजिस्टिक क्षेत्र में असंगठित क्षेत्र की कंपनियों के संगठित क्षेत्र में तब्दील होने की उम्मीद बढ़ गई थी। 
 
आईसीआरए में कॉरपोरेट रेटिंग के क्षेत्रीय प्रमुख और उपाध्यक्ष शमशेर दीवान का मानना है कि कंपनियों ने अपने लॉजिस्टिक नेटवर्क को तर्कसंगत बनाना शुरू कर दिया है और संगठित क्षेत्र में तब्दील होने पर जोर दे रही हैं, हालांकि इसकी गति धीमी रहेगी और इसमें दो-तीन साल लग सकते हैं। कंपनियों के संदर्भ में एचएसबीसी जीएसटी के प्रावधान को देखते हुए वीआरएल लॉजिस्टिक्स के परिदृश्य को लेकर सकारात्मक है। आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज के विश्लेषकों ने पिछले सप्ताह एक रिपोर्ट में कहा था कि बड़ी समेकित लॉजिस्टिक सॉल्युशन प्रदाता कंपनियां (जैसे गति) लाभान्वित होंगी, क्योंकि कंपनियों ने अपना भंडारण और परिवहन निर्णय कर कुशलता के बजाय अपनी लॉजिस्टिक क्षमताओं के आधार पर लिया है। जहां कॉनकोर के लिए बिक्री में सितंबर तिमाही में दो अंक की वृद्घि दर्ज की गई, वहीं इस शेयर के लिए सबसे बड़ा कारक एक प्रमुख फ्रेट कॉरिडोर की पेशकश को लेकर है जिससे इस कंपनी को अपनी बिक्री बढ़ाने में मदद मिलेगी। 
 
कोटक सिक्योरिटीज के अग्रवाल का मानना है कि भविष्य में इस सेक्टर के लिए बदलाव के मुख्य कारकों में जीएसटी ऐक्ट का पूरी तरह से क्रियान्वयन, ई-कॉमर्स सेगमेंट की मजबूत वृद्घि और व्यापार में सुधार के साथ देश के अंदर हालात शामिल होंगे। 
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