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यह शेयर 10 साल में चढ़ा 43,000 फीसदी

पुनीत वाधवा |  Nov 26, 2017 09:58 PM IST

इस कंपनी के लिए कूलिंग एक हॉट व्यवसाय है। व्यवसाय की अवधारणा में बदलाव के साथ साथ अपने उत्पादों के लिए तेजी से बढ़ रही मांग ने पिछले 10 वर्षों में इस कंपनी के शेयरधारकों की किस्मत बदलने में अहम योगदान दिया है। एसीई इक्विटी के आंकड़े के अनुसार बीएसई 500 समूह की कंपनियों के विश्लेषण से पता चलता है कि पिछले 10 वर्षों में सिंफनी का शेयर 43,000 फीसदी चढ़ा और यह 20 नवंबर, 2007 के 3.64 रुपये के स्तर से बढ़कर मौजूदा समय में 1,567 रुपये के आसपास है। 

 
एसीई इक्विटी के आंकड़ों के अनुसार अवंति फीड्ïस, कैपलिन प्वाइंट लैबोरेटरीज, अजंता फार्मा, विक्रांगी, रिलैक्सो फुटवियर्स, आयशर मोटर्स और सोमानी सिरेमिक्स बीएसई-500 के उन अन्य शेयरों में शामिल हैं जिनमें 5,000-30,000 फीसदी के बीच तेजी दर्ज की गई। तुलनात्मक रूप से बीएसई का सेंसेक्स इस अवधि के दौरान 73 प्रतिशत चढ़कर 33,359 के स्तर पर पहुंचा है।
 
एक एयर कूलर वाले पोर्टफोलियो के साथ स्थापित सिंफनी 90 के दशक तक एयर-कूलर श्रेणी में क्रॉम्पटन ग्रीव्स, उषा और पोलर जैसी बड़ी प्रतिस्पर्धी कंपनियों के साथ मुकाबला करने में सक्षम थी। इसने तब एयर कंडीशनर (एसी), वाशिंग मशीन और अन्य ड्ïयूरेबल्स में हाथ आजमाने का निर्णय लिया, लेकिन वह उपभोक्ताओं को आकर्षित करने में विफल रही।  वर्ष 2001 में कंपनी में निवेशकों का भरोसा खोने लगा, इसकी निवेश पूंजी घट गई और आखिरकार शेयर बाजार में सिंफनी का चवन्नी शेयर का दर्जा समाप्त हो गया। तब इसे 50 करोड़ रुपये से अधिक के कर्ज के साथ औद्योगिक एवं वित्तीय पुनर्गठन बोर्ड (बीआईएफआर) के पास आना पड़ा। 
 
वर्ष 2005 के बाद सिंफनी ने अपनी अवधारणा को 'वन प्रोडक्ट-मैनी मार्केट्ïस' में समेकित किया और अपनी अंतरराष्टï्रीय उपस्थिति बढ़ाई। वर्ष 2009 में इसने इम्पको (उत्तर अमेरिका) का अधिग्रहण किया और 2011 तक भारत में सेंट्रल एयर कूलिंग सॉल्युशन मुहैया कराने शुरू किए। सिंफनी निश सेगमेंट (श्रेष्ठï उत्पादों के खंड) में परिचालन करती है। आईडीबीआई कैपिटल में शोध प्रमुख ए के प्रभाकर का कहना है कि पिछले 10 वर्षों के दौरान उत्पाद नवीनता, व्यावसायिक अवधारणा में बदलाव लाने की क्षमता कंपनी के लिए सफल साबित हुई है। इसके परिणामस्वरूप, कंपनी न सिर्फ अपने प्रवर्तकों के लिए मुनाफा पैदा करने में कामयाब रही है बल्कि शेयरधारकों को भी लाभान्वित किया है।
 
विश्लेषकों का कहना है कि घरेलू एयर कूलर बाजार काफी हद तक असंगठित कंपनियों से भरा हुआ है और इसमें कुल बिक्री और वैल्यू भागीदारी में असंगठित क्षेत्र का 70 फीसदी और 63 फीसदी का योगदान है। ब्रांडेड एयर कूलर उद्योग में मुख्य रूप से 5 कंपनियों की 90 प्रतिशत से अधिक बाजार भागीदारी है और वैल्यू के लिहाज से 50 फीसदी की भागीदारी के साथ सिंफनी प्रख्यात कंपनियों में शामिल है।
 
एडलवाइस रिसर्च के अमित महावार ने दर्शिका खेमका और आशुतोष मेहता के साथ इस कंपनी के बारे में मिलकर तैयार की गई रिपोर्ट में कहा है, 'भारत में 24.6 करोड़ परिवारों में से महज 2.8 करोड़ के पास अपने स्वयं के एयर कूलर हैं। इससे महज 11 फीसदी पैठ का संकेत मिलता है। हमें गर्म तापमान, मध्य वर्ग में वृद्घि और अर्थव्यवस्था के मजबूत होने की वजह से वर्ष 2026 तक यह पहुंच बढ़कर 25 फीसदी तक हो जाने का अनुमान है। इसके अलावा, सभी कंज्यूमर ड्ïयूरेबल क्षेत्रों में एयर कूलर असंगठित सेगमेंट की बढ़ती भागीदारी की वजह से वृद्घि की अधिक संभावना वाला क्षेत्र है।'
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