होम » Investments
«वापस

ऋण की अदायगी में दिक्कत तो दूसरी संपत्तियों पर डालिए नजर

संजय कुमार सिंह |  Nov 26, 2017 10:00 PM IST

नोटबंदी और वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के भारी झटकों के साथ-साथ आर्थिक सुस्ती की आशंका ने छोटे कारोबारियों को मुश्किल में डाल दिया है। वाणिज्यिक वाहनों के ऋण और संपत्ति के बदले लिए गए ऋणों में तेजी से बढ़ रही गैर-निष्पादित आस्तियों (एनपीए) के स्तर से यह बात जाहिर होती है। आमतौर पर कारोबारी इन दो ऋणों का इस्तेमाल व्यापक रूप से करते हैं। 

 
वाणिज्यिक वाहन ऋणों में एनपीए बढऩे का संबंध कहीं न कहीं आर्थिक सुस्ती से है। क्रेडिट सूचना ब्यूरो सीआरआईएफ हाई मार्क के उपाध्यक्ष पारिजात गर्ग कहते हैं, 'नोटबंदी के बाद आई मंदी का वाणिज्यिक वाहनों के व्यवसाय पर असर पड़ा, क्योंकि यह व्यवसाय काफी हद तक नकदी पर चलता है। इसके बाद जीएसटी लागू किए जाने से भी दबाव पड़ा। इससे वाहन मालिकों को अपने ऋण चुकाने में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है।'
 
संपत्ति के बदले ऋण (एलएपी) सेगमेंट में एनपीए में तेजी का संबंध रियल एस्टेट बाजार की मंदी से है। लोगों का क्रेडिट स्कोर सुधारने में मदद करने वाली कंपनी क्रेडिट सुधार के सह-संस्थापक अरुण राममूर्ति कहते हैं, 'संपत्ति की कीमतें नहीं बढ़ रही हैं और कुछ मामलों में इनमें गिरावट आई है। गिरवी या जमानत पर रखी गई संपत्ति की कीमतें घटने से बैंक भी पुराने ढर्रे पर लौट आए हैं और उन्होंने ऋण राशि की मात्रा घटा दी है। इससे पहले वे 1 करोड़ रुपये मूल्य की किसी संपत्ति की कीमत (एलटीवी) का 70 प्रतिशत ऋण देते थे। अब भी वे ऋण तो 70 प्रतिशत दे रहे हैं, लेकिन उसी संपत्ति की कीमत घटाकर 80 लाख रुपये कर दे रहे हैं। इसलिए पहले जहां अगर किसी व्यक्ति को 70 लाख रुपये का ऋण मिल जाता था, वहीं अब उसे संपत्ति की कीमत घटने से सिर्फ 56 लाख रुपये का ही ऋण मिल पाएगा जो 14 लाख रुपये कम है। यह संभव है कि उसने 14 लाख रुपये का अपनी कार्यशील पूंजी के लिए पहले ही इस्तेमाल कर लिया हो। पुनर्वित्त के दूसरे विकल्पों के अभाव में उसको परेशानी हो रही है।'
 
संपत्ति के बदले ऋण के क्षेत्र में कीमत के हिसाब से कर्ज के अनुपात में वृद्घि अन्य मसला है। क्रेडिट विद्या के सह-संस्थापक एवं निदेशक राजीव राज कहते हैं, 'पांच साल पहले बैंक संपत्ति की कीमत की 40-50 प्रतिशत राशि ही ऋण के तौर पर देते थे, लेकिन अब वे 70-75 फीसदी तक ऋण दे देते हैं। परिसंपत्ति पर दिया जाने वाला ऋण बढ़ा है, लेकिन उधार ली गई पूंजी पर इतना रिटर्न नहीं मिल रहा कि उससे ऋण का ब्याज चुकाया जा सके।'
 
जो व्यवसायी अपना ऋण चुकाने में स्वयं को सक्षम महसूस नहीं कर रहें, उन्हें हालात को नहींं टालना चाहिए। गर्ग कहते हैं, 'समस्या को टालने के बजाय इसके बारे में अपने बैंक से बात करिए। अगर आप कुछ महीने अपनी किस्त नहीं चुकाते हैं और बैंक के संपर्क में भी नहीं रहते हैं तो वे आपके वाहन को जब्त कर सकते हैं, जिससे आपकी आय का स्रोत समाप्त हो जाएगा।'
 
मौजूदा हालात में बैंकों को आपके जैसे कई दूसरे परेशानी वाले मामलों से सामना हुआ होगा। राज कहते हैं, 'अगर वे यह मान लेते हैं कि आपकी समस्या अर्थव्यवस्था के हालात की वजह से है और इसमें सुधार के साथ ही आपका व्यवसाय फिर पटरी पर आ जाएगा तो वे आपके ऋण के पुनर्गठन पर विचार भी कर सकते हैं। बैंक आपकी किस्त घटा सकता है और ऋण चुकाने की अवधि बढ़ा सकता है।'
 
अन्य विकल्प हैं, दूसरी संपत्तियों की कीमत का इस्तेमाल करना। राममूर्ति कहते हैं, 'अगर आपका व्यवसाय मजबूत स्थिति में है और समस्या अस्थायी है तो एक विकल्प सोने, इक्विटी, पैतृक संपत्ति आदि की बिक्री से पैसा जुटाना भी हो सकता है।'  तीसरा विकल्प है ऋण को समेटना और ब्याज दरों में मौजूद अंतर का फायदा उठाना। राज कहते हैं, 'किसी व्यवसायी के कई ऋण हो सकते हैं। हो सकता है उसने 18 फीसदी पर ओवरड्राफ्ट सुविधा और 16 फीसदी पर कार्यशील पूंजी जैसे ऋण ले रखें हों।  ये सभी ऋण एक किस्त के साथ किसी एक ऋण में समेटे जा सकते हैं। आसार यही हैं कि ऐसा करके वह वह अपना ब्याज बोझ 1 से 2 फीसदी तक घटा सकता है।'
 
जिस महत्त्वपूर्ण बात पर गौर किए जाने की जरूरत है, वह यह है कि हाल में इनसॉल्वेंसी एंड बैंगक्रप्टसी बोर्ड ऑफ इंडिया (आईबीबीआई) ने लोगों और छोटी कंपनियों के लिए दिवालिया समाधान प्रक्रिया के प्रबंधन के लिए मसौदा नियम प्रकाशित किए हैं। अधिसूचित हो जाने के बाद ये नियम छोटे व्यवसायियों के लिए पारदर्शी और नियमबद्घ ढंग से दिवालिया प्रक्रिया के समाधान में मददगार साबित होंगे।
कीवर्ड demonetization, note, rupee,

  
X

शेयर बॉक्स

पर्मलिंक