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निजी क्षेत्र के कर्मचारी को ज्यादा पेंशन

तिनेश भसीन |  Nov 26, 2017 10:00 PM IST

यदि आप वर्ष 2014 से पहले भविष्य निधि कोष (ईपीएफ) के सदस्य बन गए हैं तो अब आप एकमुश्त रकम निकालने के बजाय मासिक पेंशन प्राप्त करने का विकल्प चुन सकते हैं। सर्वोच्च न्यायालय ने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) को निर्देश दिया है कि वह अपने सदस्यों को सरकारी कर्मचारियों की तरह पेंशन पाने की अनुमति दे। कई कर्मचारियों को इसका पता नहीं था कि ईपीएफओ ने 1995 में पेंशन योजना शुरू की थी। इस योजना में ईपीएफओ ने तब कहा था कि नियोक्ता को अपने कर्मचारियों को उनके मूल वेतन के 8.33 फीसदी या 541 रुपये मासिक तौर पर (जो भी कम हो) कर्मचारी पेंशन योजना (ईपीएस) में देने होंगे। इससे कर्मचारी को इस योजना में शामिल होने के वर्षों के आधार पर सीमित मात्रा में पेंशन पाने का अधिकार मिला था।

 
उस समय ईपीएफओ ने यह भी कहा था कि अगर कोई कर्मचारी अधिक पेंशन चाहता है तो वह अपने मूल बेसिक वेतन के 8.33 फीसदी योगदान को बढ़ा सकता है। लेकिन ईपीएफओ को यह सूचित करना जरूरी था कि कोई कर्मचारी ईपीएस में 541 रुपये प्रति महीने से ज्यादा योगदान देना चाहता है। ज्यादातर कर्मचारी इन प्रावधानों से वाकिफ नहीं थे। सेवानिवृत्ति के समय कुछ कर्मचारियों ने ईपीएफओ से अपना ईपीएफ योगदान कर्मचारी पेंशन योजना में डालने को कहा। लेकिन ईपीएफओ ने इनकार कर दिया और कहा कि ऐसा योजना में शामिल होने के 6 महीने के अंदर ही किया जा सकता है। पेंशनधारकों ने राहत पाने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया, क्योंकि अधिसूचना में 6 महीने की समय-सीमा का जिक्र नहीं किया गया था। पीडब्ल्यूसी इंडिया में पार्टनर एवं लीडर (पर्सनल टैक्स) कुलदीप कुमार कहते हैं, 'सर्वोच्च न्यायालय ने सदस्यों के पक्ष में निर्णय दिया है। 
 
न्यायालय का कहना है कि यह एक लाभकारी प्रावधान है और ईपीएफओ को अपने सदस्यों को इसका लाभ उठाने की अनुमति देनी चाहिए।' न्यायालय ने सेवानिवृत्त सदस्यों को भी ईपीएफओ के लिए जरूरी रकम चुका कर पेंशन पाने की अनुमति दी है। कर विशेषज्ञों का कहना है कि सर्वोच्च न्यायालय का निर्देश ईपीएफओ के लिए बाध्यकारी है और 1 सितंबर, 2014 से पहले जो भी ईपीएफओ से जुड़ा है, वह इसका फायदा उठा सकता है। जो लोग 1 सितंबर, 2014 के बाद ईपीएफओ के सदस्य बने हैं और उनका वेतन 15,000 से अधिक है तो वे पेंशन के हकदार नहीं हैं। हालांकि 15,000 से कम के वेतन पर नौकरी शुरू करने वाले लोग ईपीएस में योगदान कर सकते हैं। लेकिन उन पर 15,000 रुपये की सीमा तब लग जाएगी जब उनका वेतन बढ़ेगा। कर विश्लेषकों का कहना है कि पेंशन के लिए पात्र कर्मचारी पेंशन बढ़ाने के  लिए अपनी कंपनी के जरिये ईपीएफओ के पास आवेदन भिजवा सकते हैं। 
 
लेकिन सभी कर्मचारी ईपीएफओ में अपना योगदान नहीं देते हैं। कुछ कंपनियों का अपना स्वयं का ईपीएफ ट्रस्ट होता है। कुलदीप कुमार कहते हैं, 'इसे लेकर अब भी स्थिति स्पष्टï नहीं है कि निजी ट्रस्टों के कर्मचारी भी पेंशन के लिए अपना योगदान बढ़ाने में सक्षम होंगे या नहीं।' कर जानकारों का मानना है कि ईपीएफओ जल्द ही इस मुद्दे पर स्थिति स्पष्टï करेगा।
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