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ईपीएफओ में अब दो खाते एक में यूनिट, दूसरे में रकम

चिराग मडिया |  Nov 26, 2017 10:01 PM IST

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) ने अपने इक्विटी आधारित निवेश के लिए नई लेखा नीति को मंजूरी दे दी है। नई नीति के तहत भविष्य निधि में योगदान देने वाले सभी सदस्यों को इक्विटी में निवेश की गई उनकी 15 प्रतिशत राशि का हिस्सा म्युचुअल फंडों की यूनिट के तौर पर आवंटित किया जाएगा। इन यूनिट को ग्राहक  उस वक्त भुना सकेंगे जब वे निवेश योजना से निकलना चाहेंगे या फिर पूरी रकम निकालेंगे। ईपीएफओ पिछले दो वर्षों से अधिक समय से इक्विटी में निवेश कर रहा है, लेकिन इसे लेकर कोई आम सहमति नहीं थी कि इससे प्राप्त लाभ निवेशकों को किस तरह से दिया जाए। अब निर्णय लिया गया है कि यह लाभ प्रत्येक ग्राहक को यूनिट आवंटित करके मुहैया कराया जाएगा। आउटलुक एशिया कैपिटल के मुख्य कार्याधिकारी मनोज नागपाल ने कहा, 'अब निवेशक यह जान सकेंगे कि उनकी कितनी रकम ऋण या डेट में है और कितनी इक्विटी में। उन्हें मार्च तक के अपने इक्विटी हिस्से के यूनिट मिलनी शुरू हो जाएंगी।'

 
इस उद्योग से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि ईपीएफ से राशि की निकासी के मानक पहले जैसे ही हैं और उनमें कोई बदलाव नहीं हुआ है। ईपीएफओ के सदस्य अपनी इच्छा के अनुसार जब चाहें अपनी रकम नहीं निकाल सकते। हालांकि वे उस स्थिति में इस रकम का कुछ हिस्सा निकाल सकते हैं जब उन्हें शादी, बच्चों या अपनी शिक्षा, मकान निर्माण और कुछ अन्य कारणों के लिए रकम की जरूरत हो। लेकिन इससे सदस्यों को जो बड़ी मदद मिलेगी वह यह कि वे उस हिस्से को अपनी मर्जी से चुन सकते हैं जिससे वे रकम निकालना चाहते हों। उदाहरण के लिए मान लीजिए कि यदि निकासी तेजी के समय में की जा रही हो तो 15 प्रतिशत हिस्सा डेट हिस्से की तुलना में काफी अच्छी रकम दिला सकता है और निवेशक इस मुनाफे का कुछ हिस्सा भुना सकते हैं। हालांकि अभी यह साफ नहीं है कि सेवानिवृति के बाद कोई सदस्य कितने समय तक ईटीएफ यूनिट बनाए रख सकता है। मुंबई के एक वित्तीय योजनाकार ने कहा, 'हमें इस मुद्दे पर स्थिति स्पष्टï होने तक इंतजार करना चाहिए। हालांकि ऐसी खबरें आई हैं कि ईपीएफओ सदस्य सेवानिवृति के बाद तीन साल तक अपने यूनिट बनाए रख सकते हैं, लेकिन ईपीएफओ से इस बारे में स्थिति स्पष्टï होने का इंतजार है।' 
 
अगले वित्त वर्ष से भविष्य निधि के सदस्यों के पास दो खाते होंगे। एक डेट के लिए जिसमें 85 प्रतिशत रकम निवेश की जाएगी और दूसरा खाता इक्विटी में निवेश किए गए धन का। इक्विटी वाले हिस्से में प्रतिफल इस पर निर्भर करेगा कि निवेश या यूनिट भुनाते समय एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड (ईटीएफ) की क्या कीमत है। इक्विटी के तहत भुगतान ईटीएफ की मौजूदा कीमत को कुल यूनिट की संख्या से गुणा करके निकाला जाएगा। 
 
ईपीएफओ को भविष्य निधि रकम का 15 प्रतिशत तक हिस्सा ईटीएफ के जरिये इक्विटी में निवेश करने की अनुमति हासिल है जबकि शेष 85 फीसदी निवेश डेट योजनाओं में किया जाता है। ईपीएफओ ने अगस्त 2015 से ईटीएफ में निवेश शुरू किया था। इस समय ईपीएफ पर 8.65 फीसदी ब्याज मिलता है। वर्ष 2015-16 से अब तक लगभग 32,500 करोड़ रुपये की रकम इक्विटी में निवेश की गई है। इस राशि पर सालाना 21.8 फीसदी की दर से बढिय़ा प्रतिफल मिला है। पेंशन नियामक के पास इस समय 1.2 लाख करोड़ रुपये से अधिक का सालाना वृद्धिपरक कोष है जिसका 15 प्रतिशत हिस्सा यानी कम से कम 18,000 करोड़ रुपये होगा जो इक्विटी में निवेश किया जाएगा।
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