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पेट कोक पर पाबंदी से गैस कंपनियों की होगी चांदी

उज्ज्वल जौहरी |  Dec 03, 2017 09:57 PM IST

पेट कोक पर गिरती गाज के बीच औद्योगिक उपभोक्ता गैस कंपनियां की ओर रुख कर सकते हैं। ऐसा होने पर गैस कंपनियों को फायदा पहुंच सकता है। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर), राजस्थान, उत्तर प्रदेश और हरियाणा में फर्नेस ऑयल और पेट कोक के इस्तेमाल पर प्रतिबंध के बाद उद्योग प्राकृतिक गैस सहित दूसरे वैकल्पिक ईंधन के इस्तेमाल पर विचार कर रहे हैं। 

 
केयर रेटिंग्स की हाल में आई एक रिपोर्ट में कहा गया है कि पेट्रोलियम मंत्रालय ने सरकारी तेल एवं गैस कंपनियों को देश के प्रभावित हिस्सों में गैस और वैकल्पिक ईंधन की आपूर्ति बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। कम कीमतों पर ऊंची मांग के साथ गैस आपूर्ति करना इंद्रप्रस्थ गैस, गुजरात गैस एवं महानगर गैस जैसी कंपनियों के लिए लाभदायक हो सकता है।  यह भी सच है कि सीमेंट कंपनियों जैसे बड़े उद्योग कोयले का इस्तेमाल बढ़ा सकते हैं और कुछ दूसरी इकाइयां कोल गैसफायर्स का इस्तेमाल कर सकती हैं, लेकिन दूसरे कई उद्योग ऐसे हैं, जिन्हें गैस का ही इस्तेमाल करना होगा। ऐंबिट कैपिटल का कहना है कि जितनी मात्रा में पेट कोक का इस्तेमाल होता है, उसमें से अगर 10 प्रतिशत मात्रा की जगह प्राकृतिक गैस का इस्तेमाल होने लगा तो इससे प्रतिदिन 5 एमएमएससीएमडी (मिलियन मीट्रिक स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर पर डे) गैस की मांग सृजित हो सकती है। 
 
गैस वितरण कंपनियों में इंद्रप्रस्थ गैस (आईजीएल) की एनसीआर में अच्छी खासी उपस्थिति है, इसलिए इसे अधिक लाभ हो सकता है। कंपनी पाइप के जरिये गैस वितरण के कारोबार में पहले ही अच्छा प्रदर्शन कर रही है। ऐसे में औद्योगिक मांग बढऩे से वितरण कारोबार में और इजाफा हो सकता है। ऐंबिट का कहना है कि एनसीआर में डीजल जेनसेट पर पाबंदी से आईजीएल की गैस की मांग 0.8-1.0 एमएमएससीएमडी बढ़ सकती है। 
 
विश्लेषकों का कहना है कि एनसीआर में कई बिजली संयंत्र पेट कोक का इस्तेमाल करते रहे हैं। अब पेट कोक पर पाबंदी से कंपनी यहां भी अपना कारोबार जमा सकती है। ऐंटीक स्टॉक ब्रोकिंग आईजीएल की कारोबारी संभावनाओं को लेकर उत्साहित है। उसका कहना है कि एनसीआर में प्रदूषण कम करने के उपाय निरंतर बढ़ रहे हैं। हाल में रेवाड़ी और गुरुग्राम क्षेत्र भी अब आईजीएल के नेटवर्क से जुड़ गए हैं और आगे चलकर करनाल और फरीदाबाद भी इसके पास आ सकते हैं। 
 
पेटकोक पर प्रतिबंध से गुजरात गैस और महानगर गैस को भी फायदा हो सकता है। गुजरात गैस की गुजरात जबकि महानगर गैस की मुंबई और महाराष्ट्र के अन्य हिस्सों में उपस्थिति है। अब पेटकोक का आयात पूरी तरह बंद किए जाने की भी संभावना बढ़ गई है और इसके इस्तेमाल पर दूसरे राज्यों में भी प्रतिबंध लगाया जा सकता है। विश्लेषकों का कहना है कि सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (सीजीडी) कंपनियों को कच्चे तेल की बढ़ी कीमतों से भी फायदा हो सकता है। इंडिया रेटिंग्स का मानना है कि गैस वितरण कंपनियों को अनुकूल औद्योगिक संरचना से लाभ मिलता रहेगा। इस तरह की संरचना से इन इकाइयों का  कारोबार और वित्तीय स्थिति दोनों मजबूत हुई हैं। तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) से मिलने वाली प्रतिस्पद्र्धा को इंडिया रेटिंग्स गैस वितरण कंपनियों के लिए कारोबारी खतरे के रूप में नहीं देखती है, क्योंकि ज्यादातर तेल विपणन कंपनियां संयुक्त उद्यम के रूप में गैस वितरण कारोबार में पहले से मौजूद हैं और इनका रवैया अब तक सहयोग वाला ही रहा है। दूसरी अहम बात यह है कि ओएमसी के राजस्व में गैस वितरण कारोबार का हिस्सा कम होता है और सीएनजी कारोबार से ओएमसी के मुनाफे पर कोई फर्क नहीं पड़ा है। इंडिया रेटिंग्स का मानना है कि इन कारणों से इन क्षेत्रों में कारोबार करने के लिए ओएमसी के पास पर्याप्त कारण नहीं हैं। 
 
इस बीच, गैस की मांग बढऩे से गेल की संभावनाओं में इजाफा होगा क्योंकि इससे इसकी पाइपलाइन की उपयोगिता और विपणन मार्जिन दोनों में इजाफा होगा। गैस आयात करने वाली पेट्रोनेट एलएनजी को भी फायदा मिलना चाहिए। गेल के परिचालन मुनाफे में प्राकृतिक गैस पाइपलाइन एवं विपणन मार्जिन का करीब 60 प्रतिशत योगदान होता है। कंपनी को पेट्रोरसायन कारोबार में पहले ही फायदा हो रहा है और एलपीजी खंड में भी संभावनाएं बढ़ी हैं। 
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