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साठ साल पार के लिए एनपीएस के द्वार

संजय कुमार सिंह |  Dec 03, 2017 10:00 PM IST

पेंशन फंड नियामक एवं विकास प्राधिकरण (पीएफआरडीए) ने राष्टï्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस) में निजी क्षेत्र के लोगों के शामिल होने की उम्र सीमा 60 से बढ़ाकर 65 वर्ष कर दी है। जो लोग पहले एनपीएस योजना में शामिल नहीं हुए, लेकिन जो 60 साल की आयु के बाद इसमें शामिल होना चाहते हैं, उनके लिए यह अच्छी खबर है। वे 65 वर्ष की आयु तक यह योजना अपना सकते हैं और 70 साल का होने तक इसमें निवेश जारी रख सकते हैं। 

 
पीएफआरडीए ने एक परिपत्र में कहा है कि आम जनता, कंपनियों और मध्यस्थों के आग्रह के बाद एनपीएस में शामिल होने की सीमा बढ़ाई गई है। स्वास्थ सेवाएं पहले से बेहतर होने, लोगों में तदुरुस्ती का स्तर बढऩे और जीवन प्रत्याशा में वृद्धि के कारण लोग अब 60 साल के बाद भी काम करते हैं। लिहाजा, एनपीएस जैसी सेवानिवृत्ति-बचत योजना में शामिल होने में वे सक्षम हैं।
 
वित्तीय योजनाकार अर्णव पंड्या कहते हैं, 'जिन लोगों ने सेवानिवृत्ति के बाद के लिए पर्याप्त बचत नहीं की है, उनके लिए यह एक और विकल्प है। जो लोग 60 की उम्र के बाद एनीपीएस योजना में शामिल होते हैं, वे 70 साल की उम्र तक निवेश कर सकते हैं।' अरविंद राव ऐंड एसोसिएट्स के वित्तीय योजनाकार और संस्थापक अरविंद ए राव कहते हैं, 'एनपीएस से आपको 50,000 रुपये की अतिरिक्त कर बचत का लाभ मिलता है। शामिल होने की उम्र बढ़ाकर पीएफआरडीए ने वरिष्ठï नागरिकों को 60 वर्ष के बाद भी योजना से जुडऩे और अगले 10 साल तक लाभ लेने का मौका मुहैया कराया है।'
 
सेवानिवृत्ति के बाद भी एनपीएस में निवेश करने का एक फायदा यह है कि अधिक उम्र में खरीदी गई एन्युइटी पर ज्यादा रिटर्न मिलता है। ऐसे लोगों को उसी तरह का निवेश विकल्प मिलेगा जैसा शुरू में निवेश करने वाले लोगों को मिलता है। लाइफ-साइकिल फंड में परिसंपत्ति आवंटन उसी तरह होगा जैसे 55 साल की उम्र पार करने वाले लोगों को मिलता है। जिन लोगों ने सेवानिवृत्ति के लिए पर्याप्त रकम जमा कर ली है, उन्हें एनपीएस में शामिल होने की जरूरत नहीं है। पंड््या कहते हैं, 'एनपीएस की एक खामी यह है कि कोई व्यक्ति पूरी रकम एकमुश्त नहीं निकाल सकता है। 40 प्रतिशत रकम एन्युइटी के रूप में रखना अनिवार्य है और इस पर रिटर्न भी बहुत अधिक नहीं मिलता है। इतना ही नहीं, जमा रकम पर कर का झंझट भी है क्योंकि केवल 40 प्रतिशत जमा रकम ही कर मुक्त होती है।' राव के अनुसार एन्युइटी की बाध्यता के कारण ज्यादातर लोग 50,000 रुपये तक ही एनपीएस में निवेश करना पंसद करते हैं। उन्होंने कहा कि लोग सेवानिवृत्ति के लिए उन योजनाओं के जरिये निवेश को प्राथमिकता देते हैं, जहां उनको एन्युइटी नहीं खरीदनी पड़ती है।
 
पीएफआरडीए ने 60 साल की उम्र के बाद एनपीएस में शामिल होने वाले लोगों को निकासी के विकल्प भी दिए हैं। पहली बात यह कि वे 3 साल बाद योजना से निकल सकते हैं। यह सामान्य प्रक्रिया मानी जाएगी। इसके तहत 40 प्रतिशत रकम एन्युइटी के रूप में रखनी होगी और 60 फीसदी रकम आपको एकमुश्त मिल जाएगी। राव कहते हैं, 'तीन साल की लॉक-इन अवधि सकारात्मक पहलू है क्योंकि वरिष्ठï नागरिकों के लिए कई दूसरी योजनाओं में 5 साल की लॉक-इन अवधि होती है।' राव कहते हैं कि ज्यादातर वरिष्ठï नागरिक, जो 60 साल की उम्र के बाद काम करते हैं, उन्हें दीर्घ अवधि का कार्य अनुबंध नहीं मिलता है। आमतौर पर उनका अनुबंध एक साल का होता है। उन्होंने कहा, 'अगर उनका अनुबंध नहीं बढ़ता है तो लंबी लॉक इन अवधि उनके लिए दिक्कतें बढ़ा सकती हैं।' अगर निकासी के समय कोष 2 लाख रुपये से कम या इसके बराबर है तो अंशदाता के पास पूरी रकम की निकासी का अधिकार होगा। उसे एन्यइटी बिलकुल नहीं खरीदनी होगी।
 
दूसरी बात यह कि अगर कोई व्यक्ति तीन साल पूरे होने से पहले ही एनपीएस योजना से निकल जाता है तो यह समय से पहले निकलना माना जाएगा। इस स्थिति में ग्राहक को अपने कोष की कम से कम 80 प्रतिशत राशि से एन्युइटी खरीदनी होगी। अगर जमा कोष 1 लाख रुपये से कम या इसके बराबर है तो उसके पास पूरी रकम एक मुश्त पाने का विकल्प होगा। तीसरी बात, अगर ग्राहक की बीच में ही मृत्यु हो जाती है तो पूरी रकम नामित व्यक्ति को दे दी जाएगी। 
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