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बिना ब्याज के मेडिकल लोन में सावधान

तिनेश भसीन |  Dec 03, 2017 10:01 PM IST

स्वास्थ्य सेवा पर जिस तरह लगातार खर्च बढ़ रहा है, उससे लोगों की नींद उड़ गई है। अगर आपके पास ठीकठाक बीमा नहीं है तो आपात स्थिति आने पर इलाज के चक्कर में आपकी माली हालत एकदम चरमरा सकती है। आम तौर पर तुरंत रकम हासिल करने के लिए लोग पर्सनल लोन लेने पहुंच जाते हैं। लेकिन इस बाजार को लपकने के लिए कुछ गैर वित्तीय बैंकिंग कंपनियां (एनबीएफसी) और फाइनैंशियल टेक्नोलॉजी (फिनटेक) स्टार्टअप भी मैदान में उतर आए हैं। ये कंपनियां पर्सनल लोन के मुकाबले कम ब्याज दर पर चिकित्सा ऋण (मेडिकल लोन) दे रही हैं। इनमें से कुछ तो शून्य ब्याज दर पर भी मेडिकल लोन दे रही हैं।

 
इनक्रेड में प्रमुख (रिस्क ऐंड एनालिटिक्स) पृथ्वी चंद्रशेखर कहते हैं, 'हम जितने भी पर्सनल लोन देते हैं, उसमें से करीब 25 फीसदी बीमारियों के इलाज के लिए ही लिए जाते हैं। इसीलिए हमने कुछ अरसा पहले मेडिकल लोन की अलग श्रेणी ही शुरू कर दी है। हम इस पर दूसरे कर्ज के मुकाबले कम ब्याज लेते हैं।' वह बताते हैं कि अक्सर लोग जरूरत से कम बीमा लेते हैं और कुछ लोग कंपनी के स्वास्थ्य बीमा पर ही निर्भर रहते हैं। कॉर्पोरेट प्लान यानी कंपनियों के बीमा में बीमित राशि पद के मुताबिक अलग-अलग होती है। कुछ में तो को-पे का विकल्प भी होता है यानी कुछ रकम कंपनियों को देनी होती है और कुछ कर्मचारी को। मिसाल के तौर पर यदि इलाज में 5 लाख रुपये का खर्च आया है तो उसमें से 1 लाख रुपये कर्मचारी को अपनी जेब से देने पड़ सकते हैं। इनमें से कई कंपनियां ब्याज की दर इसलिए कम रख पाती हैं क्योंकि कर्ज की रकम सीधे अस्पताल के पास पहुंचती है। चूंकि कर्ज देने वाले को पता होता है कि कर्ज की रकम का इस्तेमाल आखिरकार किस मकसद के लिए हो रहा है, इसलिए वे मानते हैं कि पर्सनल लोन के मुकाबले इस कर्ज में जोखिम कुछ कम है। लेकिन कर्ज लेने वाले को यह पता होना चाहिए कि शून्य ब्याज दर पर मिलने वाले कर्ज का ढांचा और शर्तें क्या हैं क्योंकि कर्ज देने वाली कंपनी इसमें से कुछ मासिक किस्त (ईएमआई) पहले ही काट सकती हैं।
 
तो क्या आपको छूट नहीं मिल पाएगी? जी, बिल्कुल नहीं मिलेगी। विशेषज्ञ बताते हैं कि जब कोई ग्राहक इलाज का खर्च अपनी जेब से दे रहा होता है तो अस्पताल उसे 5 से 30 फीसदी तक छूट देने के लिए तैयार हो जाते हैं। लेकिन जब आप खर्च के लिए किसी से कर्ज लेते हैं तो हो सकता है कि अस्पताल आपको छूट नहीं दे या कम छूट दे। कई ऐसे अस्पताल भी हैं, जो बीमा के जरिये नकदरहित (कैशलेस) इलाज की सूरत में ग्राहकों से अधिक कीमत वसूलते हैं। बीमा के अलावा वित्तीय कंपनियों से कर्ज की सूरत में भी ऐसा किया जाता है। मेडिकल लोन देने वाली ज्यादातर कंपनियों का कहना है कि इस मामले में अस्पताल पर उनका जोर नहीं चलता, लेकिन जो अस्पताल बढ़ा-चढ़ाकर बिल देने के लिए कुख्यात हैं, उनके साथ काम करने से वे परहेज करती हैं।
 
अलग-अलग ढांचे
 
अगर कोई कंपनी बिना कोई ब्याज वसूले मेडिकल लोन दे रही है तो इसका मतलब है कि एनबीएफसी अस्पताल को मंजूर हुए कर्ज के मुकाबले कुछ कम रकम देगी। अस्पताल या क्लिनिक आपको छूट नहीं देते हैं बल्कि सीधे ऋणदाता को ही छूट दे देते हैं। 15 फीसदी ब्याज दर पर अगर एक साल के लिए 1 लाख रुपये का कर्ज दिया जाता है तो कुल ब्याज लगभग 8,310 रुपये पड़ेगा। एक और मॉडल यह भी है कि कर्ज देने वाला एक या दो ईएमआई शुरू में ही ले लेता है। इसमें अगर ग्राहक एक ईएमआई का अग्रिम भुगतान कर देता है तो उसे 1 लाख रुपये के बजाय 90,974 रुपये ही मिलेंगे। आरोग्य फाइनैंस के सह-संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी जोस पीटर कहते हैं, 'कर्ज लेने वाले के प्रोफाइल और अस्पताल के मुताबिक ढांचा और शर्तें अलग-अलग होते हैं।' इतने सबके बाद 1 से 3 फीसदी प्रोसेसिंग शुल्क भी वसूला जाता है।
 
पर्सनल लोन से सस्ता
 
मेडिकल लोन आम तौर पर तीन मामलों में पर्सनल लोन से अलग होता है। पर्सनल लोन के मुकाबले इन पर ब्याज की दर कुछ कम होती है। ज्यादातर मेडिकल लोन 12 महीने के लिए ही दिए जाते हैं, जबकि पर्सनल लोन की अवधि ज्यादातर बैंकों और एनबीएफसी में 36 महीने होती है। पर्सनल लोन के मुकाबले मेडिकल लोन में औसतन कम रकम उधार ली जाती है।
 
मेडिकल लोन देने वाली ज्यादातर वित्तीय कंपनियां कर्ज देने के लिए अस्पतालों से ही गठजोड़ कर लेती हैं यानी अस्पताल से ही आपको मेडिकल लोन के बारे में पता चल जाता है। हरेक कंपनी के मेडिकल लोन पर ब्याज की दर इस बात पर निर्भर करती है कि उसने अस्पताल के साथ किस तरह का गठजोड़ किया है। पीटर कहते हैं, 'अस्पताल कौन सा है, यह देखकर हम मेडिकल लोन पर शून्य से 15 फीसदी तक ब्याज दर वसूलते हैं।' कंपनी एक कार्ड भी दे रही है, जिस पर लोन पहले से ही मंजूर होता है और कार्ड रखने वाले के परिवार के अधिक से अधिक पांच सदस्य अस्पताल में भुगतान के लिए उस कार्ड का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसमें ब्याज की दर कार्ड स्वाइप किए जाने के बाद तय की जाती हैं। इनक्रेड में मेडिकल लोन पर ब्याज की दर पर्सनल लोन की ही तरह 11.5 फीसदी से 24 फीसदी तक होती हैं। लेकिन अगर पर्सनल लोन लेने वाला कोई व्यक्ति बाद में मेडिकल लोन लेता है तो उसके लिए ब्याज दर में दो-तीन फीसदी कटौती की जा सकती है।
 
मेडिकल लोन में कर्ज देने वाले को भी रकम आवंटित करने की जल्दी होती है। कुछ मामलों में महज तीन घंटे के भीतर रकम कर्ज लेने वाले के हाथ में आ सकती है और कहीं-कहीं तीन दिन भी लग जाते हैं। यह मियाद आवेदक के दस्तावेजों पर निर्भर करती है। दस्तावेज दुरुस्त हुए तो लोन फटाफट मिल जाता है। उदाहरण के लिए अगर आवेदक के घर का पता वही है, जो आधार कार्ड, पासपोर्ट और क्रेडिट इन्फॉर्मेशन ब्यूरो के पास है तो कर्ज जल्द दिया जा सकता है।
 
बीमा मना, मेडिकल लोन हां
 
आप उन बीमारियों के लिए भी मेडिकल लोन ले सकते हैं, जिनके लिए बीमा कंपनियां कवर देने से इनकार कर देती हैं। कुछ कंपनियों ने ऐसी बीमारियों के लिए बिना ब्याज की ईएमआई के साथ लोन देने लगी हैं। उदाहरण के लिए बजाज फाइनैंस कुछ खास क्लिनिकों में इलाज कराने पर 'नो कॉस्ट ईएमआई' वाला मेडिकल लोन देती है। कोई भी व्यक्ति साझेदार क्लिनिक में दांतों का इलाज कराने के लिए, कृत्रिम गर्भाधान के लिए, आंखों के इलाज के लिए, स्टेम सेल ट्रीटमेंट या बाल उगवाने अथवा पतले होने के लिए इस लोन का इस्तेमाल कर सकता है। बजाज के लाइफ केयर फाइनैंस में भी ग्राहक को पहले से ही मंजूर लोन का कार्ड मिल जाता है, जिसे वह इलाज का खर्च चुकाने के लिए स्वाइप करा सकता है।
 
पर्सनल लोन देने वाला ऑनलाइन प्लेटफॉर्म कुबेरा डॉट कॉम भी जल्द ही इसी तरह के कर्ज मुहैया कराने के बारे में सोच रहा है। कुबेरा डॉट कॉम के संस्थापक और मुख्य कार्य अधिकारी आदित्य कुमार कहते हैं, 'कुछ संस्थाएं ऐसा मानती हैं कि आपात स्थिति में लिए गए मेडिकल लोन में जोखिम ज्यादा होता है और हो सकता है कि कर्जदार इलाज के बाद कुछ समय तक वापस काम शुरू कर ही नहीं पाए। यही वजह है कि कुछ कंपनियां चुनिंदा ऑपरेशनों और कुछ खास तरह के इलाज के लिए ही कर्ज देना पसंद करती हैं। ऐसे मामलों में क्लिनिक भी कर्ज पर वसूले जा रहे ब्याज का खर्च उठाने को तैयार हो जाते हैं और ग्राहक को बिना किसी अतिरिक्त खर्च के कर्ज मिल जाता है।' बजाज फाइनैंस ग्राहकों के प्रोफाइल को देखकर पर्सनल लोन पर 14 से 18 फीसदी तक ब्याज वसूलती है। कुबेरा की ब्याज दरें 13.99 फीसदी से 24 फीसदी तक होती हैं।
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