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होम लोन संग बीमा पॉलिसी नहीं अच्छी

चिराग मडिया |  Dec 10, 2017 10:02 PM IST

आम तौर पर जब किसी व्यक्ति का होम लोन मंजूर हो जाता है तो बैंक या हाउसिंग फाइनैंस कंपनियां उसे होम लोन बीमा या होम लोन प्रोटेक्शन प्लान (एचएलपीपी) भी बेचने की कोशिश करती हैं। ये प्लान किसी व्यक्ति के लिए 3 से 5 साल और समूह के लिए 5 साल तक की अवधि के होते हैं। इनका प्रीमियम आम तौर पर बीमित राशि का 0.8 से 1 फीसदी तक होता है। एसबीआई जनरल इंश्योरेंस में सहायक उपाध्यक्ष (उत्पाद विकास) पुनीत साहनी कहते हैं, 'इस बीमा पॉलिसी के तहत बीमित राशि उसी स्थिति में मिलती है, जब या तो पॉलिसीधारक की स्वास्थ्य जांच में पता चला हो कि उसे पॉलिसी में कवर 13 गंभीर बीमारियों में से कोई बीमारी है या उसकी दुर्घटना में मृत्यु हो गई हो या फिर वह स्थायी रूप से विकलांग हो गया हो।' हालांकि वित्तीय योजनकार ऐसे प्लान लेने के पक्ष में नहीं होते हैं। उनका मानना है कि आपको होम लोन के साथ दिए जाने वाले ऐसे प्लान से बचना चाहिए। 
 
होम लोन बीमा से बचें
 
होम लोन जैसा लंबी अवधि का कर्ज देते समय होम लोन बीमा देना बैंकों की बिक्री रणनीति का हिस्सा है। हकीकत तो यह है कि कभी-कभी बैंक यह शर्त रख देते हैं कि लोन तभी मंजूर होगा, जब ग्राहक उनके द्वारा बेचे जाने वाला बीमा प्लान खरीदेगा। इसमें एक तरह की यह छिपी हुई धमकी होती है कि अगर आप ये प्लान नहीं खरीदेंगे तो वे आपको गृह ऋण नहीं देंगे। सेबी में पंजीकृत निवेश सलाहकार पर्सनल फाइनैंस प्लान डॉट इन के संस्थापक दीपेश राघव कहते हैं, 'इन प्लान को खरीदने के लिए खुद को मजबूर महसूस न करें। इस बारे में भारतीय रिजïर्व बैंक  के बहुत साफ निर्देश हैं, जो कहते हैं कि बैंक होम लोन के साथ बीमा योजना खरीदने को बाध्य नहीं कर सकते।'
 
आम तौर पर होम लोन प्रोटेक्शन प्लान (एचएलपीपी) तीन तरह के होते हैं। पहला, घटता कवर प्लान। जैसा कि इसके नाम से ही जाहिर है, बकाया ऋण में कमी के साथ कवर भी कम होता जाता है। हालांकि इससे कई मुसीबतें भी आ सकती हैं। माना कि कर्ज लेते समय ब्याज की दर 8.3 फीसदी थी, लेकिन उसके बाद बढ़ जाती है। ऐसी स्थिति में कर्जदार व्यक्ति की कर्ज चुकने की क्षमता घट जाएगी और उसका बकाया मूलधन पहले की योजना से कहीं अधिक होगा। लेकिन जैसा कि पहले बताया गया है, बीमा कवर मूल समयबद्ध योजना के मुताबिक घटता रहेगा। ऋणी की असामयिक मृत्यु जैसी स्थिति में लोन कवर बकाया मूलधन राशि से कम हो सकता है। ऐसे में परिवार को अपनी जेब से बकाया कर्ज का भुगतान करना पड़ सकता है। 
 
दूसरे फिक्स्ड कवर प्लान हैं। अगर आप ऐसा कोई प्लान खरीद रहे हैं तो ये बेहतर विकल्प हैं क्योंकि इसमें बीमित राशि में बदलाव की कोई चिंता नहीं होती है। तीसरा विकल्प हाइब्रिड है। इसमें बीमित राशि कुछ वर्षों तक फिक्स होती है और उसके बाद घटने लगती है। ये प्लान उन टर्म प्लान से भी महंगे हैं, जो आप सीधे बीमा कंपनी से खरीद सकते हैं। राघव कहते हैं, 'ये प्लान बैंक बेचता है,जिसमें उसका कमीशन भी शामिल होता है। इसलिए ये प्लान महंगे हो जाते हैं।' 
 
इन प्लान का एक पहलू यह भी है कि बैंक होम लोन बीमा पॉलिसी का पूरा प्रीमियम पहले ही ले लेते हैं। इसमें आप पहले ही प्रीमियम चुका देते हैं। इसलिए आपके पास कुछ भी बदलने की गुंजाइश नहीं बचती है। अगर आप अपना ऋण दूसरे बैंक में स्थानांतरित कराते हैं या इसका समय से पहले भुगतान कर देते हैं तो आपको प्रीमियम के किसी भी हिस्से का पैसा वापस नहीं लौटाया जाएगा। ये पॉलिसी ग्राहक को बैंक से बांधती हैं। इसलिए बैंक आपको प्रीमियम चुकाने के लिए ऋण देने को तैयार हो जाता है। इसका मतलब है कि आप न केवल होम लोन पर ब्याज चुकाते हैं बल्कि मूल ऋण के कवर की खातिर लिए गए ऋण के प्रीमियम पर भी ब्याज भरते हैं।
 
टर्म प्लान है बेहतर   
 
होम लोन बीमा खरीदने के बजाय आपको अपना टर्म कवर बढ़ाना चाहिए ताकि यह उस अतिरिक्त देनदारी के लिए पर्याप्त हो, जो आपने होम लोन के रूप में ली है। टर्म प्लान लंबी अïवधि के लिए सुरक्षा मुहैया कराता है। लैडर7 फाइनैंशियल एडवाइजर्स के संस्थापक सुरेश सद्गोपन कहते हैं, 'टर्म प्लान पॉलिसीधारक को 20 से 30 साल के लिए कवर देता है, जबकि होम लोन बीमा कवर उसे केवल लोन चलने तक ही मिलता है। अगर कोई व्यक्ति समय से पहले ऋण का भुगतान कर देता है और इसे पहले ही बंद करा देता है तो होम लोन बीमा के जरिये लिया गया बीमा कवर भी खत्म हो जाता है।' टर्म कवर न केवल बकाया होम लोन को कवर करता है बल्कि यह पॉलिसीधारक की असामयिक मृत्यु होने की स्थिति में अन्य वित्तीय जरूरतें भी पूरी करता है।
 
दावा कब होता है रद्द  
 
कई बार बैंक अपने ग्राहक की पॉलिसी का प्रीमियम बीमा कंपनी को नहीं भेज पाते हैं। ऐसे मामले में दावा रद्द हो जाता है। अगर पॉलिसीधारक का परिवार पंचनामे की रिपोर्ट सौंपने में नाकाम रहता है तो दुर्घटना में मौत के लाभों का दावा भी रद्द हो सकता है। अगर आप बैंक से कवर खरीदते हैं तो अपना पॉलिसी दस्तावेज बैंक से लें और इसे अपने पास सुरक्षित रखें। अगर आप वास्तव में गंभीर बीमारी, दुर्घटना और विकलांगता कवर लेना चाहते हैं तो किसी सामान्य बीमा कंपनी से इसे अलग से खरीदें।
 
दावा रद्द होने से बचाएं  
 
कई बार पॉलिसीधारक वर्तमान बीमारियों का खुलासा न करने या प्रस्ताव फॉर्म में गलत जानकारी देने की गलती कर देते हैं। इससे एचएलपीपी के तहत दावा रद्द हो जाता है। साहनी कहते हैं, 'अगर आप पॉलिसी खरीदते समय पहले की बीमारियों का खुलासा नहीं करते हैं तो आपका दावा रद्द हो सकता है। अगर किसी पॉलिसीधारक को डायबिटीज है और उसने इसका खुलासा नहीं किया है और बाद में इस डायबिटीज की वजह से उसे गंभीर बीमारी हो जाती है तो दावा रद्द हो सकता है।' एचएलपीपी में स्वाभाविक मृत्यु या आत्महत्या को कवर नहीं किया जाता है। दावे रद्द होने से बचाने के लिए पॉलिसीधारक को कुछ बातों का ख्याल रखना चाहिए।
 
बजाज आलियांज जनरल इंश्योरेंस के मुख्य तकनीकी अधिकारी (गैर-वाहन) शशिकुमार अदिदामु कहते हैं, 'ग्राहक को प्रस्ताव फॉर्म खुद सावधानी से भरना चाहिए और इसमें अपने व्यक्तिगत और स्वास्थ्य के ब्योरे का उल्लेख करना चाहिए। उसे यह भी सुनिश्चित करना होगा कि प्रस्ताव फॉर्म में भरी गई जानकारियां पूर्ण और सही हैं। पॉलिसी दस्तावेज प्राप्त करने के बाद यह जांचें कि इसमें सभी ब्योरे सही हैं।'
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