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सरकारी तेल विपणन कंपनियों की धीमी पडऩे लगी धार

उज्ज्वल जौहरी |  Dec 10, 2017 10:09 PM IST

सितंबर तिमाही में तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) को ग्रॉस रिफाइनिंग मार्जिन (जीआरएम), मार्केटिंग मार्जिन और उत्पादन भंडार में उछाल से लाभ पहुंचा है। हालांकि चालू तिमाही में उनके सामने चुनौतियां अधिक हैं।
 
सितंबर तिमाही में बेंचमार्क सिंगापुर जीआरएम पिछली 10 तिमाहियों के ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है। अमेरिका में चक्रवाती तूफान हार्वे के कारण आपूर्ति में आई बाधा से जीआरएम उछला था। जीआरएम क्रमागत आधार पर 29 प्रतिशत और सालाना आधार पर 61 प्रतिशत उछलकर 8.3 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया था। हालांकि मध्य नवंबर तक (ताजा उपलब्ध आंकड़े) अमेरिकी आपूर्ति बढऩे से जीआरएम क्रमागत आधार पर 12 प्रतिशत फिसलकर 7.3 डॉलर प्रति बैरल रह गया है। इस तरह, दिसंबर तिमाही की तस्वीर कुछ अलग हो सकती है।
 
इससे भी बड़ी चिंता मार्केटिंग मार्जिन को लेकर है। मार्के टिंग मार्जिन वह मुनाफा है, जो तीनों सरकारी ओएमसी वाहन ईंधन की खुदरा बिक्री पर कमाती हैं। दूसरी तिमाही में ओएमसी के इस लाभ में सुधार हुआ था, जिसे विश्लेषकों ने सकारात्मक करार दिया था। नवंबर मध्य तक मार्केटिंग मार्जिन में बड़ी गिरावट आने की खबर है। आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज के विश्लेषकों का कहना है कि 16 नवंबर से शुद्ध मार्केटिंग मार्जिन नकारात्मक हो गया है। तीसरी तिमाही में अब तक मार्जिन क्रमागत आधार पर 55 और सालाना आधार पर 23 प्रतिशत कम होकर 76 पैसे प्रति लीटर रह गया है। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के बाद भी खुदरा कीमतें पर्याप्त नहीं बढऩे से यह नौबत आई है।
 
तीसरी तिमाही में बाकी अवधि के लिए कच्चा तेल 61.85 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर और डीजल मार्जिन भी बरकरार रहा तो आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज के अनुमानों के अनुसार डीजल पर शुद्ध मार्जिन क्रमागत आधार पर 68 से 77 प्रतिशत और सालाना आधार पर 44 से 60 प्रतिशत कम हो सकता है। इसी तरह, पेट्रोल पर शुद्ध मार्जिन क्रमागत आधार पर 57 से 65 प्रतिशत और सालाना आधार पर 28 से 42 प्रतिशत कम हो सकता है।
 
इसका नतीजा यह है कि दूसरी तिमाही के ऊंचे स्तर के मुकाबले इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (आईओसी) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (एचपीसी) की शेयर की कीमतों में 16 से 17 प्रतिशत की कमी आई है। भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (बीपीसी) अक्टूबर के अपने ऊंचे स्तर से 10 प्रतिशत कम है। अन्वेषण और हाइड्रोकार्बन परिसंपत्तियों के कारण इसके शेयरों में अपेक्षाकृत कम गिरावट आई है। बीपीसी को भी इसकी कोच्चि रिफाइनरी के विस्तार से लाभ होगा।
 
आईओसी को भी उसकी नई पारादीप रिफइनरी से लाभ मिलना जारी रहेगा। हालांकि ओएनजीसी एचपीसी के अधिग्रहण हेतु रकम के लिए आईओसी में अपनी हिस्सेदारी बेच रही है, जिससे कंपनी के लिए चिंताएं बनी हुई हैं। एमके ग्लोबल के विश्लेषकों ने मध्य नवंबर टिप्पणी में कहा कि पहले वे आईओसी को तवज्जो दे रहे थे, लेकिन ऑफर-फॉर-सेल की घोषणा और ओएनजीसी के आईओसी में हिस्सेदारी बेचने से जुड़ी चिंताओं के कारण शेयर की आगे तस्वीर साफ होने तक इसकी कीमतें 370 से 420 रुपये के दायरे में रह सकती है। तीनों ओएमसी में उनकी पंसदीदा कंपनी बीपीसी है। इसकी वजह यह है कि कोच्चि संयंत्र के विस्तार से बीपीसी अधिक उत्पादन कर पाएगी और इससे इस वित्त वर्ष की दूसरी छमाही से इसका जीआरएम भी बढ़ेगा।
 
कम रिफाइनिंग एवं मार्केटिंग मार्जिन से बने हालात के मद्देनजर ज्यादातर विश्लेषक ओएमसी के शेयरों को लेकर सतर्क हैं। कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज के विश्लेषक कहते हैं, 'कच्चा तेल 55 से 65 डॉलर के बीच रहने पर पैदा हुए हालात के बीच अगले 12 से 18 महीनों में चुनावी मौसम और निजी कंपनियों से मिल रही लगातार प्रतिस्पर्धा के कारण ओएमसी के लिए पहले की तरह स्थिर मार्जिन बरकरार रख पाना मुश्किल होगा, इनमें बढ़ोतरी तो बहुत दूर की बात है।'
 
वित्त वर्ष 2018 की पहली छमाही में निजी कंपनियों ने डीजल और पेट्रोलियम के बाजार में क्रमश: 7.9 और 5.5 प्रतिशत हिस्सेदारी पर कब्जा जमाया है। वित्त वर्ष 2017 में ये आंकड़े क्रमश: 5.9 और 4.9 प्रतिशत थे। आगे चुनावों के लंबे दौर के कारण इन तीन सरकारी तेल विपण कंपनियों के लिए कीमतें बढ़ाना आसान नहीं होगा, जिससे इनके मार्केटिंग मार्जिन पर असर पड़ेगा। विश्लेषकों के अनुसार वाहन ईंधन मार्जिन में प्रति लीटर 25 पैसे की कमी आने से वित्त वर्ष 2019 के लिए एचपीसी, बीपीसी और आईओसी की आय के अनुमानों में क्रमश: 10 प्रतिशत, 7.5 प्रतिशत और 5.6 प्रतिशत की कमी आएगी। 
 
कोटक इंस्टीट्यूशन इक्विटीज के विश्लेषकों का कहना है कि कच्चे तेल में तेजी के बावजूद नवंबर के पहले सप्ताह से घरेलू स्तर पर खुदरा कीमतें नहीं बढऩे से डीजल और पेट्रोल पर मार्केटिंग मार्जिन दूसरी तिमाही के 3.1 रुपये प्रति लीटर से कम होकर करीब 1 रुपये प्रति लीटर रह गया है।
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