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आईटी की मझोली कंपनियां भरेंगी डिजिटल से अपनी झोली

आयान प्रामाणिक |  Dec 10, 2017 10:11 PM IST

पिछले करीब एक साल से पस्त सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) सेवा क्षेत्र को नए रहनुमा की तलाश है। इसके लिए वह एलऐंडटी इन्फोटेक, हेक्सावेयर टेक्नोलॉजी और माइंडट्री जैसी मझोली कंपनियों में संभावना टटोल रहा है। ये कंपनियां डिजिटल में धीरे-धीरे पैर फैला रही हैं। कुछ विदेशी निवेशकों ने भी इस क्षेत्र में दांव बढ़ाया है।
 
विश्लेषकों का कहना है कि ये कंपनियां अपने बड़े प्रतिस्पर्धियों की तुलना में अधिक वृद्घि दर्ज करने वाली कंपनियों में शामिल हैं। जहां टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस), विप्रो और एचसीएल जैसी बड़ी कंपनियों ने पिछली कुछ तिमाहियों में एक अंक में सामान्य से मजबूत वृद्घि दर्ज की है, वहीं मझोले आकार की आईटी सेवा प्रदाता कंपनियों ने दो अंक की वृद्घि दर्ज की।
 
चालू वित्त वर्ष की पहली दो तिमाहियों में इस मजबूत वृद्घि से उत्साहित हेक्सावेयर ने 2017 के लिए अपने डॉलर राजस्व की वृद्घि का अनुमान 10-12 फीसदी से बढ़ाकर 14-15 प्रतिशत कर दिया है। वहीं 1.1 अरब डॉलर के राजस्व के साथ मझोली कंपनियों के आकार में सबसे बड़ी एलऐंडटी इन्फोटेक का राजस्व सितंबर तिमाही में बढ़कर 27.06 करोड़ डॉलर रहा। कंपनी को घरेलू और विदेशी बाजार में मजबूत बिक्री मिली।
 
जहां इन्फोसिस ने 2017-18 के लिए अपनी वृद्घि के अनुमान को 200 आधार अंक तक घटा दिया है, वहीं विप्रो ने तिमाही का सतर्क अनुमान बरकरार रखा है। उद्योग लॉबी समूह नैस्कॉम का अनुमान है कि सॉफ्टवेयर निर्यात क्षेत्र इस साल 7 से 8 फीसदी तक बढ़ेगा। यह एक और ऐसा वर्ष होगा जिसमें सिर्फ एक अंक की वृद्घि दर्ज होगी। 
 
ब्रोकरेज प्रभुदास लीलाधर के विश्लेषकों का कहना है कि मझोली आईटी कपंनियों में हेक्सावेयर, एलऐंडटी इन्फोटेक, सायंट और कुछ अन्य कंपनियां अपने बड़े प्रतिस्पर्धियों की तुलना में बेहतर वृद्घि की संभावनाएं देख रही हैं। ये कंपनियां केंद्रित डिजिटल रणनीतियों और डिजिटल प्रौद्योगिकी क्षेत्र में हासिल सौदों के जरिये मजबूत वृद्घि पर नजर गड़ाए हुए हैं। इस वृद्घि का असर इनके शेयर की बढ़ती कीमत में साफ दिखता है।' विश्लेषकों का मानना है कि हेक्सावेयर का राजस्व बड़ी प्रतिस्पर्धी कंपनियों (इन्फोसिस और टीसीएस जिन्होंने वित्त वर्ष 2018 के लिए 7-8 फीसदी की डॉलर राजस्व वृद्घि की संभावना जताई है) की तुलना में 2017 में काफी तेज गति से बढऩे की स्थिति में हैं।'
 
दूसरी तरफ, पारंपरिक सॉफ्टवेयर सेवाओं में गिरावट का बड़ी और मझोली कंपनियों पर मिलाजुला असर दिख रहा है। जहां सॉफ्टवेयर मैंटेनेंस जैसे पारंपरिक कार्यों में भारी कमी आई है, वहीं डिजिटल टेक्नोलॉजी सेवाओं में वृद्घि इतनी नहीं है कि इसकी भरपाई हो सके। ऐसा लगता है कि मझोली कंपनियां अधिक डिजिटल सौदे हासिल करने के लिए केंद्रित रणनीति अपना रही हैं।
 
पेशेवर सेवाएं मुहैया कराने वाली कंपनी अल्वारेज ऐंड मारसल इंडिया में वरिष्ठï निदेशक मलय शाह का कहना है, 'इन मझोली कंपनियों ने रोबोटिक प्रोसेस ऑटोमेशन और इंटरनेट ऑफ थिंग्स जैसे डिजिटल क्षेत्रों में दक्षता हासिल कर ली है। शुरू में वे छोटी परियोजनाएं लेने के लिए तैयार रहती थीं। इनमें से ज्यादातर ने 200,000 डॉलर की परियोजनाओं का प्रबंधन किया और डिजिटल टेक्नोलॉजी के क्षेत्रों में क्षमताओं का निर्माण किया। परिणामस्वरूप, उन्हें अब उनकी दक्षता के आधार पर सौदे मिल रहे हैं। बड़ी कंपनियां मुख्यत: बड़े सौदों पर केंद्रित रही हैं। इससे वृद्घि और राजस्व के मिश्रण में विविधता का स्पष्टï पता चलता है।'
 
विश्लेषकों का कहना है कि हेक्सावेयर की रणनीति मसलन नए सौदे हासिल करने और पारंपरिक विक्रेताओं से हिस्सा पाने के लिए स्वचालन का इस्तेमाल करने की है। प्रभुदास लीलाधर के विशलेषकों की राय में हेक्सावेयर की यह रणनीति जोर पकड़ रही है। इसका असर आईएमएस (सूचना प्रबंधन प्रणालियों) और बीपीओ (बिजनेस प्रोसेस आउटसोर्सिंग) सेवा क्षेत्रों में मजबूत वृद्घि के तौर पर दिखा है। आईएमएस और बीपीओ सेवाएं पिछली सात तिमाहियों के दौरान क्रम से 10 फीसदी और 6.4 फीसदी की त्रैमासिक वृद्घि दर से बढ़ी हैं। इसका 'श्रिंक आईटी' नतीजे दिखा रहा लगता है क्योंकि कंपनी ने आईएमएस और बीपीओ में कई नए सौदे हासिल किए हैं।'
 
इसके साथ ही साथ माइंडट्री और केपीआईटी टेक्नोलॉजीज जैसी अन्य मझोली कंपनियों ने अपने मार्जिन पर उद्योग की धीमी वृद्घि का प्रभाव दर्ज किया है। शाह का कहना है कि दूसरी तरफ केपीआईटी अपनी पारंपरिक रणनीति पर ही ज्यादा ध्यान दे रही है जिससे उसकी वृद्घि दर प्रभावित हुई है। 
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