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किंगफिशर के लौट रहे अच्छे दिन!

विशाल छाबडिय़ा |  Dec 17, 2017 09:55 PM IST

यूनाइटेड ब्रुअरीज (यूबीएल) और इसके शेयरधारकों के अच्छे दिन आखिरकार फिर लौट आए हैं। शेयरधारकों के नजरिये से देखें तो इसके शेयरों में हाल में आई तेजी ने पिछले दो साल से जारी गिरावट का रुझान पलट दिया है। मध्य अक्टूबर तक 12 महीने की अवधि के दौरान एसऐंडपी बीएसई सेंसेक्स 20 प्रतिशत बढ़ा जबकि यूबीएल के शेयर में करीब 3 प्रतिशत गिरावट आई थी। शेयर के कमजोर प्रदर्शन का कारण हाल के वर्षों में सपाट बिक्री और घटता मुनाफा रहा। यूबीएल किंगफिशर और बियर के अन्य लोकप्रिय बीयर ब्रांडों का उत्पादन करती है।

 
हाालंकि तब से यूबीएल के सुधरते प्रदर्शन के कारण शेयर में करीब 26 प्रतिशत की तेजी आई है। इस तरह ये शेयर अगस्त 2015 के स्तर पर फिर पहुंच गया है। विश्लेषकों की मानें तो आने वाले समय में भी यूबीएल की संभावनाएं अच्छी ही रहने के आसार हैं। आखिर ऐसे क्या बदलाव आए हैं, जिनसे इसका शेयर उछला है? पहली बात तो यह कि जून तिमाही में बिक्री में बढिय़ा तेजी आई और परिचालन तथा शुद्ध मुनाफे में 7 से 10 प्रतिशत तक की तेजी दर्ज हुई। सितंबर तिमाही में कंपनी के चौंकाने वाले प्रदर्शन ने इसमें भरोसा और बढ़ा दिया है। जहां बिक्री में 23 प्रतिशत तेजी आई वहीं कर एवं ब्याज एवं अन्य कटौती पूर्व (ईबीआईटीडीए) लाभ 83 प्रतिशत बढ़ा। शुद्ध मुनाफे में एक साल पहले की तिमाही के मुकाबले 247 प्रतिशत की उछाल आई।
 
राजमार्गों के किनारे शराब पर प्रतिबंध के बावजूद बिक्री में सालाना आधार पर 11 प्रतिशत की तेजी आई, जबकि इसके मुकाबले बीयर/शराब उद्योग की वृद्धि दर 5 प्रतिशत रही। मोतीलाल ओसवाल सिक्योरिटीज (एमओएसएल) के कृष्णन संबमूर्ति और विशाल पुनमिया ने नतीजे आने के बाद अपनी टिप्पणी में कहा, 'एक और तिमाही में कंपनी की बाजार हिस्सेदारी बढ़ी है। वित्त वर्ष 2017 और वित्त वर्ष 2018 की पहली छमाही दोनों में यूबीएल की बाजार हिस्सेदारी में इजाफा हुआ है।'
 
कंपनी ने मई 2017 में किंगफिशर स्टॉर्म नाम से नई महंगी बीयर बाजार में उतारी थी, जिससे कंपनी को बिक्री बढ़ाने में मदद मिली। कंपनी ने देश के बड़े शहरों में हाइनकेन के पांच विश्व स्तरीय महंगे ब्रांड डेसपरेडोज, एडलवीस, एफ्लीजेम, सॉल, डॉस इक्विस उतारे हैं। यूबीएल ने भारत में हीनकेन ब्रांड उतारने के सालों बाद ये पांच ब्रांड उतारे हैं। विश्लेषकों का कहना है कि कंपनी ने यह पहल ऐसे समय की है, जब  प्रतिस्पद्र्धी कंपनियां उतनी आक्रामकता नहीं दिखा रही हैं।
 
आईसीआईसआई डायरेक्ट में विश्लेषक भरत छोडा और अंकित पंचमटिया ने पिछले महीने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि भारत के युवाओं में नए अनुभव लेने और विभिन्न तरह की चीजें आजमाने की प्रवृत्ति को देखते हुए भारत के बीयर बाजार में नए ब्रांडों के लिए अच्छी संभावनाएं हैं। रिपोर्ट के अनुसार यूबीएल इन संभावनाओं का फायदा उठाने की पूरी कोशिश में जुटी है। रिपोर्ट में कहा गया है, 'इसी दिशा में काम करते हुए यूबीएल ने हाइनकेन के बीयर ब्रांड भारत में उतारे थे और अब दूसरे प्रीमियम ब्रांड और खास उत्पाद भी उतारने के बारे में सोच रही है।'
 
इन नए ब्रांडों और उत्पादों को लोकप्रिय होने में समय लग सकता है, लेकिन यूबीएल के मौजूदा बीयर पोर्टफोलियो में महंगी बीयर की तादाद बढऩे में जरूर मदद मिलेगी। महंगे ब्रांड उतारने से कंपनी को धीरे-धीरे मार्जिन बढ़ाने में भी मदद मिलेगी। परिचालन कर्ज और लागत दोनों कंपनी के नियंत्रण में रहने से उसे और भी मार्जिन लाभ हो सकता है। इससे कारोबारी आय में इजाफा होगा। करीब एक दशक के बाद दूसरी तिमाही में यूबीएल का एबिटा मार्जिन अब तक का सबसे ज्यादा 17.4 फीसदी रहा है।
 
एमओएसएल के विश्लेषकों ने कहा, 'कारोबारी माहौल में उम्मीद से पहले ही सुधार होने से दूसरी तिमाही में कंपनी के आंकड़े शानदार रहे हैं। यूबीएल ने पूरे साल के लिए शुद्ध मुनाफे का हमारा पुराना अनुमान वित्त वर्ष 2018 की पहली छमाही में लगभग पूरा कर लिया।' इसे देखते हुए एमओएसएल ने यूबीएल के लिए प्रति शेयर आय का अनुमान वित्त वर्ष 2018 के लिए 48 प्रतिशत और वित्त वर्ष 20119 के लिए 28 प्रतिशत बढ़ा दिया है। दूसरी तिमाही के नतीजों के बाद एसबीआईकैप सिक्योरिटीज के विश्लेषकों ने भी वित्त वर्ष 2018 से 20 के लिए आय का अनुमान 10 से 20 प्रतिशत तक बढ़ा दिया है। 
 
आईसीआईसीआई डायरेक्ट के विश्लेषकों को भी आने वाले समय में यूबीएल की आय में इजाफे की उम्मीद है। ब्रोकरेज के अनुसार, 'बढ़ी बिक्री और कुछ राज्यों में कीमतें बढ़ाने और मार्जिन में सुधार से कंपनी के लिए अधिक मुनाफे की संभावना रहेगी।' हां, गिरावट की आंशका से भी इनकार नहीं किया जाता है। अगर राज्यों ने अल्कोहल पर प्रतिबंध लगाना या कर बढ़ाना शुरू कर दिया तो इससे अल्कोहल कारोबार की सभी कंपनियों पर असर पड़ेगा। हालांकि, बाजार में मजबूत पकड़ के कारण यूबीएल पर अपेक्षाकृत कम असर हो सकता है। दूसरी जोखिम जौ जैसे कच्चे माल की लागत बढऩे की है। इससे राजस्व प्रभावित हो सकता है और परिचालन के मोर्चे पर मिलने वाली बढ़त कम हो सकती है। अब तक विदेशी कंपनियां (काल्र्सबर्ग, सैब मिलर) आक्रामक नहीं रही हैं। विश्लेषकों का कहना है कि अगर उन्होंने हिस्सा बढ़ाने के लिए आक्रामक रणनीति अपनाई तो इससे यूबीएल के मुनाफे पर असर पड़ सकता है।
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