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अधिग्रहण-विस्तार से बढ़ता अल्ट्राटेक का कारोबार

उज्ज्वल जौहरी |  Dec 17, 2017 09:55 PM IST

अल्ट्राटेक ने हाल में ही क्षमता विस्तार की घोषणा की है। कमजोर मांग के बीच कंपनी की इस पहल ने बाजार में कई लोगों को आश्चर्यचकित कर दिया है। हालांकि कंपनी इससे पहले भी प्रतिकूल परिस्थितियों में क्षमता विस्तार करती रही है, इसलिए यह बहुत अनूठी बात नहीं है। इस कदम से यह जरूर साबित होता है कि कंपनी आने वाले समय में अपने कारोबार को लेकर काफी विश्वस्त है। हालांकि बाजार की नजर मोटे तौर पर सीमेंट की मांग में सुधार, मार्जिन के रुझान और अन्य प्रमुख बिंदुओं पर होगी। 

 
विकास और विस्तार पर नजर
 
अल्ट्राटेक ने राजस्थान के पाली में 35 लाख टन क्षमता वाला सीमेंट संयंत्र स्थापित करने की घोषणा की है। इसके जून 2020 तक शुरू होने की संभावना है। इससे पहले सितंबर तिमाही में कंपनी ने मध्य प्रदेश के धार में 35 लाख टन क्षमता वाला एकीकृत संयंत्र लगाने की घोषणा की थी, जिससे 2019 की मार्च तिमाही में उत्पादन शुरू हो जाएगा। देश की इस सबसे बड़ी सीमेंट निर्माता कंपनी ने यह घोषणा सितंबर तिमाही में जेपी ग्रुप की 2.12 करोड़ टन क्षमता वाली सीमेंट परिसंपत्तियों का अधिग्रहण पूरा करने के तुरंत बाद की। इस सबसे जाहिर है कि कंपनी क्षमता विस्तार और विलय एवं अधिग्रहण दोनों माध्यमों से अपनी बढ़ोतरी पर जोर दे रही है। विश्लेषकों का कहना है कि कारोबार बढ़ाने, भौगोलिक विस्तार करने और बाजार हिस्सेदारी में इजाफे के लिए क्षमता विस्तार आवश्यक है। उदाहरण के लिए पाली संयंत्र से कंपनी पश्चिमी राजस्थान के बाजारों की जरूरत पूरी करेगी जहां अल्ट्राटेक की मजबूत उपस्थिति नहीं है। इसी तरह, धार परियोजना का मकसद मध्य भारत में, खासतौर पर दक्षिण-पश्चिम मध्य प्रदेश में पैठ मजबूत करना है। जेपी ग्रुप की सीमेंट परिसंपत्तियों के अधिग्रहण से भी कंपनी की मध्य एव उत्तर भारत (मध्य प्रदेश और हिमाचल प्रदेश क्षेत्रों) के साथ ही आंध्र प्रदेश एवं तेलंगाना में भी उपस्थिति मजबूत होगी। मांग कमजोर होने के बावजूद पिछले कुछ वर्षों से बिक्री बढ़ाने के लिए क्षमता विस्तार के उपाय महत्त्वपूर्ण रहे हैं। प्रतिस्पर्धी सीमेंट कपनियों एसीसी और अंबुजा सीमेंट्स की बिक्री में क्रमश: 2.7 प्रतिशत और 1.2 प्रतिशत की कमी आई है। इनके मुकाबले वित्त वर्ष 2017 में घरेलू कारोबार में 1.6 प्रतिशत की तेजी आई है। एक अन्य प्रतिस्पद्र्धी कंपनी श्री सीमेंट भी समय-समय पर क्षमता विस्तार से अपना कारोबार बढ़ा रही है। जेपी की सीमेंट परिसंपत्तियों के अधिग्रहण और महाराष्टï्र एवं बिहार में ग्राइंडिंग यूनिट शुरू करने के बाद सितंबर तिमाही तक अल्ट्राटेक सीमेंट की क्षमता बढ़कर सालाना 9.65 करोड़ टन हो गई थी और अब हाल की विस्तार योजनाओं से यह 10 करोड़ टन सालाना क्षमता पार कर लेगी।
 
मूल्य वद्र्धन, मुनाफे  से नहीं बहुत दूर
 
अल्ट्राटेक ऐसे समय में क्षमता विस्तार कर रही है जब बाजार सीमेंट क्षेत्र में समेकन (विलय एवं अधिग्रहण) की उम्मीद कर रहा है। विश्लेषकों को लग रहा था कि कंपनी अपनी आय बढ़ाने के लिए जेपी ग्रुप से खरीदी सीमेंट परिसंपत्तियों पर ही ध्यान केंद्रित करेगी। क्षमता बढ़ाने के पीछे एक वजह यह हो सकती है कि बाजार में परिसंपत्तियों का मूल्यांकन इससे बढ़ जाएगा। उदाहरण के लिए बिनानी समूह की राजस्थान में सीमेंट परिसंपत्तियों का अनुमानित मूल्यांकन अधिक है। हाल में आई खबरों के अनुसार डालमिया भारत बिनानी के 62.5 लाख टन क्षमता वाले सीमेंट संयंत्र के लिए बोली लगाने के बारे में सोच रही है। यह संयंत्र फिलहाल नैशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल के पास विचाराधीन है। 
 
चंूकि, कर्जदाता इन परिसंपत्तियों के लिए 600 करोड़ रुपये के उद्यम मूल्य (यानी इक्विटी और ऋण) की मांग कर रहे हैं।  रिलायंस सिक्योरिटीज के विनोद मोदी का कहना है कि यह आंकड़ा उद्यम मूल्य का प्रति टन 148 डॉलर है, जो इसकी प्रतिस्थापन लागत से 10-15 प्रतिशत अधिक है और जेपी की सीमेंट परिसंपत्तियों के लिए भुगतान किए गए 121 डॉलर प्रति टन के मुकाबले भी अधिक है। मोदी कहते हैं कि विस्तार से घरेलू मांग (खासकर उत्तर भारत में) को लेकर कंपनी के आक्रामक नजरिये का पता चलता है।
 
वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) संबंधी समायोजन, रेत खनन से जुड़े मुद्दों, कुछ राज्यों में श्रम संबंधी दिक्कतों और रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण (रेरा) के अमल में आने से मौजूदा साल में ज्यादातर समय सीमेंट की मांग नरम रही है। हालांकि आवास एवं बुनियादी ढांचा क्षेत्र की मांग से सीमेंट क्षेत्र में सुधार आ सकता है। इसके अलावा मार्च और जून की आगामी तिमाहियां सीमेंट की मांग के लिहाज से मजबूत होती है, इसलिए हालात सुधरने के पूरे आसार हैं। एसबीआई रिसर्च की हाल की एक टिप्पणी में कहा गया है कि आर्थिक वृद्धि दर बढ़ाने के लिए बुनियादी ढांचे के विकास पर सरकार के जोर से अर्थव्यवस्था में तेजी आएगी। टिप्पणी में कहा गया है कि इससे सीमेंट क्षेत्र को खासा लाभ होगा।  फिलहाल लागत का दबाव बना हुआ है और सीमेंट कंपनियां सतर्कता के साथ कीमतें बढ़ा रही हैं, जिससे मार्जिन पर कुछ असर पड़ सकता है। 
 
मुनाफा कमाने के मामले में सीमेंट उद्योग की सबसे बेहतर कंपनी रही अल्ट्राटेक को जेपी की सीमेंट परिसंपत्तियों के अधिग्रहण के बाद इससे फायदा उठाने की दिशा में तेजी से आगे बढऩे की जरूरत है।  अधिग्रहण की गई परिसंपत्तियों से सितंबर तिमाही में क्षमता के इस्तेमाल में 35-40 प्रतिशत बढ़ोतरी की उम्मीद है, वहीं विश्लेषकों का मानना है कि अल्ट्राटेक वित्त वर्ष वित्त वर्ष 2019 तक इसे बढ़ाकर 60 प्रतिशत करना चाहती है। जितनी जल्दी कंपनी यह आंकड़ा हासिल करेगी, उसका मार्जिन उतना ही बढ़ जाएगा। 
कीवर्ड ultratec, cement,

  
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