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सेवानिवृत्त जिंदगी के लिए निवेश की बनाइए रणनीति

संजय कुमार सिंह |  Dec 17, 2017 09:57 PM IST

भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) ने अपनी लोकप्रिय तत्काल एन्युइटी योजना जीवन अक्षय 6 की एक दिसंबर से बिक्री बंद कर दी है। इसमें निवेश करने के लिए अंतिम मौके पर बड़ी तादाद में निवेशक उमड़े क्योंकि इसका प्रतिफल उपलब्ध सभी तात्कालिक एन्युइटी में सबसे ज्यादा आकर्षक था। तात्कालिक भुगतान एन्युइटी ऐसा एन्युइटी अनुबंध है, जिसमें ग्राहक एकमुश्त रकम का भुगतान करता है। इसके बदले उसे नियमित रूप से गारंटीशुदा आय मिलती है, जो तुरंत ही मिलना शुरू हो जाती है। संभावना है कि एलआईसी जल्द ही इस योजना को फिर से शुरू करेगी। लेकिन अब कंपनी इसमें प्रतिफल की दर कम रख सकती है। अगर आप सेवानिवृत्ति के बाद आमदनी के स्रोत तैयार करने के विकल्प तलाश कर रहे हैं तो आपको इन पर भी विचार करना चाहिए। 

 
वरिष्ठ नागरिक बचत 
 
ज्यादातर वित्तीय सलाहकार सेवानिवृत्त लोगों को यह योजना लेने की सलाह देते हैं। कारण कि इसमें 8.4 फीसदी की आकर्षक ब्याज दर है। साथ ही आप निवेश के समय कर कटौती का लाभ भी हासिल करने के हकदार हैं। इसकी ब्याज दर में पांच साल तक कोई बदलाव नहीं होता है। लेकिन व्यक्ति इसमें 15 लाख रुपये तक का ही निवेश कर सकता है। अगर आपका जीवन साथी भी इसमें निवेश करता है (अगर वह वरिष्ठ नागरिक है) तो योजना में कुल निवेश 30 लाख रुपये तक किया जा सकता है। इतना निवेश करने पर हर साल 2.52 लाख रुपये या करीब 21,000 रुपये महीने का प्रतिफल मिल सकता है। 
 
योजना से मिलने वाला ब्याज आपकी आय में जुड़ता है और इस पर आपकी सीमांत कर दर के हिसाब से कर लगता है। अगर ब्याज की राशि सालाना 10,000 रुपये से अधिक है तो टीडीएस (स्रोत पर कटौती) काटा जाता है।  इस योजना में 60 वर्ष या उससे अधिक उम्र के व्यक्ति निवेश कर सकते हैं। 55 साल या उससे अधिक उम्र वाले व्यक्ति भी इसमें निवेश कर सकते हैं, बशर्ते कि वे सेवानिवृत्त हो चुके हैं और अपने सेवानिवृत्त लाभ एक महीने के भीतर ही इसमें निवेश कर दें।  योजना में आपको समय से पहले निकासी की भी इजाजत होती है, लेकिन इसके लिए शुल्क देना होगा। यह शुल्क निवेश के एक साल बाद निकासी पर जमा राशि का 1.5 फीसदी और दो साल बाद 1 फीसदी है। योजना 3 साल तक बढ़ सकती है। 
 
सरकार के बचत बॉन्ड 
 
इनमें 8 फीसदी सालाना ब्याज मिलता है। इसमें निवेश की कोई अधिकतम सीमा नहीं है। आप ये बॉन्ड सरकारी बैंकों, एचडीएफसी बैंक और आईसीआईसीआई बैंक जैसे कुछ निजी बैंकों और स्टॉक होल्डिंग कॉरपोरेशन के कार्यालयों से खरीद सकते हैं। इन्हें कभी भी खरीद सकते हैं।  हालांकि ये बॉन्ड सूचीबद्ध नहीं हैं, इसलिए आप इन्हें द्वितीयक बाजार में बेचकर अपनी रकम वापस हासिल नहीं कर सकते।
 
डाकघर आय योजना
 
इसमें हर साल 7.5 फीसदी की दर से ब्याज मिलता है। वरिष्ठ नागरिक बचत योजना से इतर इसमें कर कटौती का कोई लाभ नहीं मिलता है।  आप व्यक्तिगत रूप से 4.5 लाख रुपये और संयुक्त खाते में 9 लाख रुपये तक निवेश कर सकते हैं। आप समय से पहले भी धनराशि निकाल सकते हैं, लेकिन इसके लिए शुल्क चुकाना होगा। अगर एक साल के बाद लेकिन तीन साल से पहले निकासी करते हैं तो शुल्क 2 फीसदी लगेगा और तीन साल बाद निकासी की तो 1 फीसदी शुल्क देना होगा।
 
डेट फंड से आय
 
आप डेट फंड में नियमित निकासी योजना के जरिये भी नियमित आय का स्रोत बना सकते हैं। सेबी में पंजीकृत निवेश सलाहकार पर्सनल फाइनैंस प्लान डॉट इन के संस्थापक दीपेश राघव कहते हैं, 'नियमित निकासी योजना के लिए चुने जाने वाले डेट फंड में मामूली उतार-चढ़ाव होना चाहिए। इसके लिए अल्ट्रा शॉर्ट टर्म डेट फंड चुन सकते हैं जिनमें अवधि कम होती है और निवेश गुणवत्ता अच्छी होती है।'  लंबी अवधि या ज्यादा जोखिम वाले फंडों में नियमित निकासी योजना से बचा जाना चाहिए। अल्ट्रा शॉर्ट टर्म डेट फंडों का औसत प्रतिफल पिछले 10 वर्षों के दौरान 8.01 फीसदी रहा है, लेकिन पिछले साल यह गिरकर 5.76 फीसदी पर आ गया। सेवाानिवृत्ति से 3 साल पहले निवेश करने के बाद आपके निकासी शुरू करने पर आपको सूचकांक लाभ मिलेगा।
 
एन्युइटी  
 
एन्युइटी प्लान आपको जीवन के बचे हुए सालों मे एक निर्धारित राशि मुहैया कराते हैं। कुछ योजनाएं ऐसी हैं जो आपके निधन के बाद आपके जीवन साथी को भी उम्र भर पेंशन देती हैं। वे आपको फिर से निवेश के जोखिम से बचाते हैं और ब्याज दरें घटने पर भी उनकी प्रतिफल दर में कोई बदलाव नहीं होता है।  हालांकि इनमें महंगाई का जोखिम होता है। ज्यों-ज्यों समय बीतता जाता है, त्यों त्यों आपको दी जाने वाली निर्धारित राशि की क्रय क्षमता कम होती जाती है। इस समय उपलब्ध योजनाओं के प्रतिफल की दर भी भी उन योजनाओं से कम है, जिनका ऊपर जिक्र किया गया है। एन्युइटी आपके पैसे को आपके शेष जीवन के दौरान लॉक कर देती है। पॉलिसी बाजार डॉट कॉम के प्रमुख (जीवन बीमा) संतोष अग्रवाल कहते हैं, 'जो लोग अपने धन का प्रबंधन नहीं कर सकते यानी ज्यादा प्रतिफल अर्जित करने के लिए अन्य दूसरी योजनाओं में निवेश नहीं कर सकते, उन्हें एन्युइटी में निवेश करना चाहिए।'
 
सेवानिवृत्ति के बाद 
 
सेवानिवृत्त व्यक्ति को सेवानिवृत्ति के बाद के पोर्टफोलियो की योजना बनाते समय कुछ जोखिमों का ध्यान रखना चाहिए। पहला लंबी अवधि का जोखिम है। एन्यूइटी इस जोखिम से निपटने में आपकी मदद करती है। दूसरा महंगाई का जोखिम है। इससे निपटने के लिए अपनी कुल धनराशि का एक छोटा हिस्सा यानी करीब 20 से 30 फीसदी हिस्सा इक्विटी फंडों जैसी तेजी से वृद्धि करती संपत्तियों में निवेश किया जाना चाहिए। तीसरा जोखिम उतार-चढ़ाव से पैदा होता है। 
 
एक उदाहरण से इसे समझना आसान होगा। माना कि आपके पास 2 करोड़ रुपये हैं और सालाना खर्च 10 लाख रुपये है। माना कि इस धनराशि पर हर साल प्रतिफल 7 फीसदी यानी 14 लाख रुपये मिलता है। आप 10 लाख रुपये निकालते हैं और वर्ष के अंत में आपके पास 2.04 करोड़ रुपये बच जाते हैं। लेकिन अगर यह धनराशि लगातार दो वर्षों तक ऋणात्मक प्रतिफल दे और आप हर साल 10 लाख रुपये निकालते रहते हैं तो क्या होगा? साल के अंत में आपके पास 1.54 करोड़ रुपये रह जाएंगे, जो 23 फीसदी कम है। अब इसे फिर से 2 करोड़ रुपये के आंकड़े पर पहुंचने के लिए 30 फीसदी की वृद्धि हासिल करने की जरूरत होगी। ा
 
राघव कहते हैं, 'जब आप उस धनराशि से निकासी करते हैं, जिसमें गिरावट आई है तो आप नुकसान को स्थायी बनाते हैं। ज्यादातर सेवानिवृत्त व्यक्ति पूंजी में भारी गिरावट को नहीं झेल सकते। इसलिए वे जिस पोर्टफोलियो से निकासी कर रहे हैं, वह स्थायित्व वाली योजनाओं से बनाया जाए।' मुंबई के वित्तीय योजनाकार अर्णव पंड्या कहते हैं, 'जिस व्यक्ति को पेंशन मिलती है, वह छह महीने में भी भुगतान मिलने को लेकर सहज होगा। लेकिन जिस व्यक्ति को पेंशन नहीं मिलती है, उसे मासिक भुगतान की जरूरत होती है।'
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