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रिटायरमेंट होम: रहने के लिए बेहतर, निवेश के लिए कमतर

संजय कुमार सिंह |  Dec 17, 2017 09:58 PM IST

भारतीय समाज में बुजुर्गों का अनुपात बढ़ रहा है और इसी के साथ वरिष्ठ नागरिकों के लिए विशेष रूप से विकसित  ऐसे आवासीय परिसरों की मांग बढ़ी है जो उनकी जरूरतें पूरी करते हों। कुछ दिन पहले पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स ऐंड इंडस्ट्री ने वरिष्ठï नागरिक आवास पर एक सर्वे कराया था। इसके अनुसार भारत में वरिष्ठ नागरिकों की आबादी 1961 में 5.6 फीसदी थी जो 2011 में बढ़कर 8.6 फीसदी पर पहुंच गई। 

 
वर्ष 2021 तक इसके बढ़कर 10.7 फीसदी और 2050 तक 23.6 फीसदी पर पहुुंच जाने का अनुमान है। सर्वे के अनुसार डेवलपरों का मानना है कि इस सेक्टर का आकार 2016 के 1.26 अरब डॉलर से बढ़कर वर्ष 2030 तक 7.7 अरब डॉलर पहुंच जाने का अनुमान है। माता-पिता को इन परिसरों में भेजने से जुड़े पुराने मिथक दूर होने से अब कई वरिष्ठï नागरिक स्वयं ही इनमें रहने का विकल्प चुन रहे हैं। हालांकि यह निर्णय परिपक्व उम्र में लिया जाता है। यह अहम फैसला होता है। लिहाजा, इसके अच्छे और बुरे दोनों पहलुओं पर सोच-समझकर फैसला करने की जरूरत होती है।
 
आखिर वरिष्ठï नागरिक ऐसे मकानों की ओर रुख क्यों कर रहे र्हैं? सेवानिवृत्तों के लिए घरों (रिटायरमेंट होम्स) की मांग बढऩे का एक प्रमुख कारण सामाजिक बदलाव है। यह बदलाव संयुक्त परिवारों की व्यवस्था टूटने और एकल परिवारों का चलन बढऩे के रुप में आया है। बच्चे अक्सर रोजगार के सिलसिले में दूसरे शहर और विदेश चले जाते हैं। परांजपे स्कीम्स कंस्ट्रक्शन लिमिटेड के प्रबंध निदेशक शशांक परांजपे कहते हैं, 'पहले अगर किसी के बच्चे नहीं थे या वे उससे दूर रहते थे तो उनका कोई नजदीकी रिश्तेदार ऐसे बुजुर्ग दंपती की देखभाल करता था। लेकिन जिंदगी में भाग-दौड़ बढऩे से अब रिश्तेदार भी इस तरह का अतिरिक्त बोझ उठाना नहीं चाहते। इतना ही नहीं, अब बुजुर्ग भी युवाओं की तरह अपने लिए निजता चाहते हैं। इन्हीं सब कारणों से उन्हें रिटायरमेंट होम्स का विकल्प ज्यादा बेहतर लग रहा है।'
 
साथ ही वरिष्ठï नागरिक अपनी ही उम्र के लोगों के बीच रहना ज्यादा पसंद करते हैं। इससे उन्हें एकाकीपन दूर करने में मदद मिलती है, जिसका सामना उन्हें बुढ़ापे में अक्सर करना पड़ता है। इसके अलावा उन्हें अपने जैसे मानसिक स्तर वाले लोगों के बीच समय बिताने का भी मौका मिलता है। आशियाना हाउसिंग के संयुक्त प्रबंध निदेशक अंकुर गुप्ता कहते हैं, 'हम रहवासियों के लिए अपने परिसर में कई गतिविधियां आयोजित करते हैं जिनमें वे लोग मिलजुलकर हिस्सा लेते हैं। इससे उन्हें एक-दूसरे के साथ लगाव बढ़ाने और नए संबंध विकसित करने में मदद मिलती है।' कोलियर्स इंटरनैशनल इंडिया में नॉलेज सिस्टम्स के राष्टï्रीय निदेशक अमित ओबरॉय कहते हैं, 'बढ़ती संपन्नता भी एक कारण है जो इन वरिष्ठ नागरिकों को इन विकल्पों की ओर ले जा रही है।' रिटायरमेंट होम्स में वरिष्ठ नागरिकों को खाना पकाने, रखरखाव और मरम्मत जैसी रोजमर्रा की चिंताओं से मुक्ति मिल जाती है। ज्यादातर रिटायरमेंट होम्स में इस तरह की सभी सुविधाएँ होती हैं। कोवाई प्रॉपर्टी सेंटर के प्रबंध निदेशक ए श्रीधरन कहते हैं, 'आपको यहां सुंदर दृश्यों, फूलों, पेड़-पौधों और झरनों के बीच स्वच्छ और हरा-भरा परिवेश मिलता है जिससे आपको स्वस्थ और दीर्घायु जीवन जीने का मौका मिलता है।'
 
सही चयन पर दें जोर
 
जब आप किसी सीनियर सिटीजंस कॉम्पलेक्स में मकान खरीद रहे हों तो सबसे अहम बात उस डेवलपर का पुराना रिकॉर्ड चेक करना है। परांजपे कहते हैं, 'उन्हीं डेवलपरों के परिसरों में  निवेश करें जिनका न सिर्फ परियोजना तैयार कर सौंपने का अच्छा रिकॉर्ड रहा हो बल्कि उनने इस तरह के सामुदायिक परिसर का प्रबंधन और रखरखाव भी बेहतर ढंग से किया हो। किसी आम आवासीय परिसर के विपरीत इस तरह के परिसर में सेवा की गुणवत्ता बेहद महत्त्वपूर्ण होती है।' ओबरॉय की राय में, 'इस तरह के परिसरों के निवासियों के लिए एक व्यापक सहायता प्रणाली स्थापित किए जाने की जरूरत होती है। ऐसे डेवलपर का चयन करें जिसे इस पहलू की समझ हो और जिसके पास इस तरह का अनुभव हो।' 
 
परिसर में मौजूद सहायता की गुणवत्ता को सबसे अधिक महत्व दिया जाना चाहिए। समय के साथ संभव है कि कोई जीवनसाथी साथ छोड़ जाए और आपका स्वास्थ्य ज्यादा खराब रहने लगे। श्रीधरन कहते हैं, 'उम्र बढऩे के साथ लोगों को सहायता और देखभाल की जरूरत पड़ सकती है।' यह सुनिश्चित करें कि इस तरह की देखभाल उपलब्ध हो। यह भी देखिए कि आवासीय परिसर का नजदीक के अस्पतालों के साथ समझौता है या नहीं और परिसर के अंदर उपलब्ध चिकित्सा सहायता का स्तर किस तरह का है।
 
वित्तीय स्थिति पर विचार 
 
रिटायरमेंट होम में जाने से पहले यह भी तय कर लें कि आपको अपना मूल घर बनाए रखना है या बेचना है। उम्र बढऩे के साथ ही रियल एस्टेट का प्रबंधन कठिन होता जाता है। इसलिए इसे बेचना आकर्षक हो सकता है। लेकिन इसे बनाए रखने से आपके पास यह विकल्प हमेशा रहेगा कि अगर आपको रिटायरमेंट कम्युनिटी में रहना पसंद नहीं आए तो आप वापस पुरानी जगह आ सकते हैं। आपको यह भी देखने की जरूरत होगी कि आप अपने मूल घर को बेचे बिना रिटायरमेंट होम में रहने का बोझ उठा सकते हैं या नहीं। इसे जांचने का एक तरीका यह है कि आप रिटायरमेंट होम खरीदने के लिए अपने पास से कितना पैसा इस पर खर्च करेंगे। उसके बाद देखिए कि आपके पास अपने बुढ़ापे के खर्च के लिए पर्याप्त पैसा बचा है या नहीं।
 
वित्तीय योजनाकारों का का कहना है कि आपको रिटायरमेंट होम के विकल्प को सिर्फ निवेश के बजाय इस्तेमाल योग्य मकान के तौर पर देखना चाहिए। प्लान अहेड वेल्थ एडवाइजर्स के मुख्य वित्तीय योजनाकार विशाल धवन कहते हैं, 'आम तौर पर आप ये मकान सिर्फ अन्य वरिष्ठï नागरिकों को ही बेच सकते हैं, जिससे पूंजी वृद्घि प्रभावित होती है।' दूसरा एक और अहम फैसला यह करना होगा कि इसे खरीदा जाए या पट्टे या किराए पर लिया जाए। परांजपे कहते हैं, 'हमारे शोध से पता चलता है कि भारत में बड़ी तादाद में वरिष्ठï नागरिक ऐसी सपंत्तियों को किराये पर लेने के बजाय खरीदना ही पसंद करते हैं क्योंकि उन्हें मालिक द्वारा बीच में ही निकाले जाने का भय बना रहता है।' 
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