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दलाल पथ पर शेयरों के बढ़ते कीमत लक्ष्य

पवन बुरुगुला |  Dec 24, 2017 10:01 PM IST

इस साल शेयर बाजारों में तेजी उनकी रेटिंग में सुधार के बल पर आई है। तेजी के इस दौर के बीच ब्रोकरेज कंपनियां भारतीय शेयरों के लिए अपने एक वर्षीय कीमत लक्ष्य में लगातार संशोधन कर इसमें इजाफा कर रही हैं। पिछले तीन महीने में सेंसेक्स की सभी कंपनियों (आईटीसी और यस बैंक को छोड़कर) के शेयरों की कीमत के लक्ष्य में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। व्यापक बाजार की बात करें तो इसके सूचकांक की कंपनियों में भी इसी तरह का रुझान देखा गया है। जैसे बीएसई 500 कंपनियों में से 333 के शेयरों के अगले 12 महीने के कीमत लक्ष्य में बढऩे वाला संशोधन किया गया है। कीमत लक्ष्य इस उम्मीद में बढ़ाया गया है कि देश में अब आर्थिक वृद्घि में सुधार होगा और नए आय चक्र की शुरुआत होगी।

 
प्रमुख सूचकांक ने इस साल करीब 28 फीसदी की तेजी दर्ज की है जबकि व्यापक बाजार सूचकांक ने भी शानदार प्रदर्शन दिखाया है। इस साल आय वृद्घि थी नहीं। इसलिए शेयरों में तेजी मूल्यांकन विस्तार पर केंद्रित रही है। हालांकि ताजा कीमत संशोधन कंपनियों की आय में तेजी की संभावना से जुड़े हुए हैं। बाजार अगले दो वित्त वर्षों के लिए 20 फीसदी की आय वृद्घि का अनुमान लगा रहा है। कई मामलों में तो कीमत लक्ष्य 30 फीसदी तक बढ़ाए गए हैं।
 
कई ब्रोकरों का मानना है कि प्रमुख सूचकांक अगले साल दो अंक में प्रतिफल दे सकता है। एसबीआई कैप सिक्योरिटीज में रिटेल रिसर्च के प्रमुख महंतेश सबराद कहते हैं, 'हमारा मानना है कि बाजार आय सुधार में अपनी संभावित तेजी के साथ आश्चर्यचकित कर सकता है। अगले दो वर्षों के अनुमान कई सकारात्मक कारकों पर निर्भर करते हैं। जीएसटी जैसे सुधारों के कारण भारत के मजबूत वृद्घि की राह में बढऩे की पूरी उम्मीद है।'
 
सबराद के अनुसार सकारात्मक बदलावों में शामिल हैं, जीएसटी के कारण खपत में वृद्घि, चक्रीय आय सुधार, जिंसों की कीमतों का अनुकूल होना और कर्ज की कम लागत। उनकी ब्रोकरेज फर्म ने निफ्टी का अगले साल का लक्ष्य 12,000 रखा है जो मौजूदा स्तर से 15 फीसदी अधिक है।  भारतीय उद्योग जगत का मुनाफा पिछले तीन वर्षों से लगभग ठहरा हुआ है। पिछली चार तिमाहियों में ज्यादा दबाव देखा गया क्योंकि जीएसटी जैसे कुछ आमूल सुधारों से आय चक्र पर खासा असर पड़ा। हालांकि इन सुधारों का एकबारगी प्रभाव अब कम होता जा रहा है। विश्लेषक दिसंबर तिमाही के बाद से कंपनियों के मुनाफे में मजबूत तेजी की उम्मीद जता रहे हैं। 
 
कोटक इंस्टीट्ïयूशनल इक्विटीज में शोध प्रमुख संजीव प्रसाद कहते हैं, 'भारतीय बाजार का प्रदर्शन कई क्षेत्रों पर निर्भर करेगा। इनमें परिचालन हालात सामान्य होने की वजह से आय में संभावित मजबूत वृद्घि, अनुकूल वैश्विक जिंस चक्र और घरेलू अर्थव्यवस्था में थोड़ी बेहतरी जैसी बातें शामिल हैं। व्यापक बाजार के लिए मजबूत आय वृद्घि (न्यूनतम 15 फीसदी) जरूरी होगी। तभी बाजार वर्ष 2018 में सकारात्मक प्रतिफल दे पाएगा। हालांकि ऊंची मुद्रास्फीति, कच्चे तेल की कीमतें और (चीन में संभावित मंदी समेत) दुनिया के आर्थिक हालात आय में इस सुधार की राह में प्रमुख बाधा हो सकते हैं।' 
 
जहां बुनियादी आधार वृहद स्तर पर सुधार दिख रहा है, वहीं म्युचुअल फंडों में रकम की बढ़ती आवक से से भी बाजारों को मदद मिल रही है। म्युचुअल फंड इस साल बाजार में दांव लगाने में आगे रहे हैं। उन्होंने 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक की इक्विटी खरीदारी की है। व्यवस्थित निवेश फंडों यानी सिप ने छोटे निवेशकों से लगातार अच्छा पूंजी प्रवाह आकर्षित किया है। सबराद कहते हैं, 'नोटबंदी के बाद बचत का वित्तीय रास्तों के जरिए बाजारों में निवेश बढ़ा है। यह निवेश एफआईआई प्रवाह से भी ज्यादा है। '
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