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टाटा मोटर्स : कारोबार की तेज रफ्तार पर सवार

राम प्रसाद साहू |  Dec 24, 2017 10:02 PM IST

टाटा मोटर्स की संभावनाएं और बेहतर होने लगी  हैं। इससे उसके शेयर में आई कमजोरी को दूर करने में मदद मिल सकती है। कंपनी का शेयर न सिर्फ मारुति और महिंद्रा ऐंड महिंद्रा (एमऐंडएम) जैसी प्रतिस्पर्धी कंपनियों से पिछड़ गया है बल्कि उसने पिछले एक साल में बीएसई के सेंसेक्स की तुलना में भी खराब प्रदर्शन किया है। जगुआर लैंड रोवर (जेएलआर) की बिक्री में सुधार के साथ साथ भारी और मझोले वाणिज्यिक वाहनों (एमऐंडएचसीवी) और यात्री वाहन खंड के घरेलू  बाजार में वृद्घि के कारण कंपनी की संभावनाएं मजबूत हुई हैं। कंपनी की ब्रिटेन स्थित सहायक इकाई जेएलआर ने पांच महीने तक उम्मीद से कम बिक्री के बाद खुदरा बिक्री में 10 फीसदी की वृद्घि दर्ज की है। उसे नए डिस्कवरी और रेंज रोवर वेलार मॉडलों की बिक्री बढऩे से मदद मिली है। 

 
हालांकि इस वित्त वर्ष में जेएलआर की अभी तक की बिक्री 4.5 फीसदी रही है, लेकिन कई विश्लेषक वित्त वर्ष 2018 के दौरान बिक्री का आंकड़ा तीन नए स्पोट्ïर्स यूटिलिटी वाहन मॉडलों-वेलार, डिस्कवरी और ई-पेस की मदद से 10 फीसदी के करीब पहुंच जाने की उम्मीद कर रहे हैं। मैक्वायरी के विश्लेषकों को मॉडल मिश्रण, ऊंची बिक्री आदि से कंपनी का मार्जिन सुधरने का अनुमान है। टाटा मोटर्स के प्रबंधन ने जेएलआर के लिए ब्याज और कर पूर्व लाभ का मध्यावधि मार्जिन लक्ष्य 8 से 10 फीसदी रहने का अनुमान जताया है।
 
वाणिज्यिक वाहनों (सीवी) की बिक्री से घरेलू परिचालन में सुधार अन्य सकारात्मक कारक है। वित्त वर्ष 2018 में वाणिज्यिक वाहन क्षेत्र में 5 प्रतिशत बाजार भागीदारी बढ़ाने के अपने लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए टाटा मोटर्स आक्रामक तरीके से नए मॉडल उतार रही है और उसका भारी ट्रकों के खंड में आकर्षण भी बढ़ रहा है। इस खंड में मांग लगातार बढ़ रही है। कंपनी ने टाटा मोटर्स की विशेष कैटैलिटिक टेक्नोलॉजी की बढ़ती स्वीकार्यता, सरकारी खर्च से बुनियादी ढांचा विकास और ट्रक ऑपरेटरों द्वारा ओवरलोडिंग पर प्रतिबंध की वजह से वाणिज्यिक वाहन बिक्री में सालाना आधार पर 72 प्रतिशत की वृद्घि दर्ज की है। कंपनी ने संकेत दिया है कि बीएस 4 वाहनों की नई रेंज के उत्पादन में सुधार और जेनॉन योद्घा पिक-अप जैसी पेशकश से उसे बिक्री वृद्घि मजबूत बनाने और बाजार भागीदारी बढ़ाने में मदद मिली है।
 
सितंबर 2017 तक के पांच महीनों में मझोले और भारी वाहनों के बाजार में कंपनी की सबसे कमजोर भागीदारी रही है। सितंबर मेंं यह 49.7 फीसदी रही। पर उसेक बाद टाटा मोटर्स अक्टूबर और नवंबर में अपनी भागीदारी बढ़ाने में कामयाब रही है। कंपनी की भागीदारी इस समय 54.7 फीसदी है। इस साल अब तक इसकी बाजार भागीदारी 50 फीसदी के आंकड़े को पार कर चुकी है और अब यह 50.5 फीसदी पर है। वाणिज्यिक वाहनों के समूचे क्षेत्र को देखें तो टाटा मोटर्स ने सितंबर के स्तर से अपनी बाजार भागीदारी 4 फीसदी तक बढ़ाकर 48.9 फीसदी की है।
 
नोमुरा के विश्लेषकों का मानना है कि भारत सरकार वित्त वर्ष 2018-20 के दौरान सड़क निर्माण पर खर्च को वित्त वर्ष 2015-17 की तुलना में दोगुना करने पर ध्यान दे रही है जिससे अगले दो वित्त वर्षों के दौरान उद्योग की वृद्घि में 10 से 15 फीसदी का इजाफा हो सकता है। वाणिज्यिक वाहनों के क्षेत्र में दो अंक  की मजबूत वृद्घि से टाटा मोटर्स को  फायदा होगा। कंपनी के यात्री वाहन खंड ने भी बिक्री में सालाना आधार पर 35 फीसदी की वृद्घि दर्ज की है, क्योंकि नए मॉडल कॉम्पैक्ट क्रॉसओवर नेक्सोन की मांग मजबूत बनी हुई है। दरअसल, नए वाहन उतारने से कंपनी को एमऐंडएम की तुलना में बढ़त बनाने में मदद मिली है। उसने बड़े वाहन निर्माता एमऐंडएम को तीसेर स्थान पर धकेल दिया है। विश्लेषकों का मानना है कि वित्त वर्ष के शेष समय में भी टाटा मोटर्स के लिए वृद्घि का रुझान बना रहेगा। कंपनी ने वित्त वर्ष 2018 के पहले 8 महीनों में यात्री वाहनों में 15 फीसदी की वृद्घि दर्ज की है। 
 
जहां ब्रोकरों का मानना है कि अपनी खोई बाजार भागीदारी खासकर वाणिज्यिक वाहन क्षेत्र में पुन: हासिल करने की कंपनी की रणनीति सही दिशा में है, लेकिन उसे मुनाफे पर कुछ दबाव का सामना करना पड़ सकता है। मॉर्गन स्टैनली के विश्लेषकों का मानना है कि कंपनी के बाजार भागीदारी पर ध्यान केंद्रित करने से इसका मार्जिन नरम रह सकता है और परिचालन में उसका नुकसान बरकरार रह सकता है। हालांकि कंपनी का मानना है कि उसका भारतीय परिचालन वित्त वर्ष 2018 में कर पूर्व लाभ के स्तर पर भरपाई के स्तर पर आ सकता है। अगर ऐसा होता है तो इससे बाजार धारणा मजबूत होगी। वित्त वर्ष 2019 में भी भारतीय व्यवसाय और जेएलआर दोनों की बिक्री मजबूत बने रहने का अनुमान है।  मौजूदा भाव पर टाटा मोटर्स का शेयर अपने वित्त वर्ष 2019 के अनुमानों के करीब 8 गुना पर कारोबार कर रहा है और शेयर की वैल्यू में जेएलआर का 90 प्रतिशत योगदान है। 
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