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स्मार्ट डिवाइस लगाइए, कार की हिफाजत के संग पैसे भी बचाइए

तिनेश भसीन |  Dec 24, 2017 10:05 PM IST

अच्छी ड्राइविंग से आपको अपनी कार की माइलेज बढ़ाने, टूट-फूट कम करने और ईंधन एवं मरम्मत की मद में पैसा बचाने में मदद मिल सकती है। लेकिन ड्राइवर को यह कैसे पता चलेगा कि वह सही ड्राइविंग कर रहा है? कार मालिकों को अपने या ड्राइवरों के ड्राइविंग कौशल का आकलन करने के लिए कुछ स्टार्टअप ने ऐसे स्मार्ट डिवाइस मुहैया कराना शुरू किया है, जिनमें एक मोबाइल सिम कार्ड लगा रहता है। यह डिवाइस को ऑन-बोर्ड डायग्नोस्टिक-2 (ओबीडी-2) पोर्ट से जोड़ देता है जिस तक पहुंच आसान है। यह ड्राइविंग का विश्लेषण, वाहन की लोकेशन और उसकी हालत का ब्योरा तत्काल मोबाइल ऐप पर भेजता है। 

 
वाहन का मालिक ड्राइविंग स्कोर देख सकता है और उन चीजों को समझ सकता है, जिनमें सुधार की दरकार है। वह वाहन की हालत पर भी नजर रख सकता है। वाहन में कोई दिक्कत होने पर उसकी समय पर मरम्मत कराई जा सकती है। वह नजर रख सकता है कि वाहन किस जगह पर है या कहां-कहां ले जाया गया है। जाइम टेक्नोलॉजिज के संस्थापक और सीईओ प्रशांत गुप्ता ने कहा, 'भारत में 2010 के बाद बनी हर कार में ओबीडी-2 पोर्ट है और यह डिवाइस किसी भी कंपनी के किसा भी मॉडल में काम करता है। इस पोर्ट का मुख्य काम यह जांचना है कि कार में कोई समस्या तो नहीं है। लेकिन हमने इसमें एक अतिरिक्त हार्डवेयर जोड़ा है, जिसके जरिए किसी चौपहिया वाहन को ज्यादा स्मार्ट और इंटरनेट से जुड़ा बनाया गया है।' 
 
लागत 
 
ग्राहक को इस डिवाइस की अग्रिम रकम देनी होती है, जो 7,000 रुपये तक हो सकती है। इसके अलावा डेटा के लिए सालाना शुल्क वसूला जाता है जो 900 से 2,000 रुपये के बीच है। यह डिवाइस के विनिर्माता पर निर्भर करता है। पहले साल डेटा का कोई शुल्क नहीं है। इस समय बाजार में पांच ब्रांड हैं, जिनमें कारआईक्यू, रोलर, कारनॉट, जाइम और ऑटोविज शामिल हैं।  उदाहरण के लिए ऑटोविज डिवाइस की कीमत 7,400 रुपये है और दूसरे साल से सबस्क्रिप्शन शुल्क 2,000 रुपये प्रतिवर्ष है। कारआईक्यू डिवाइस की कीमत 4,500 रुपये है और सालाना सबस्क्रिप्शन का खर्च 999 रुपये है। 
 
अलग डिवाइस 
 
बाजार में मिलने वाले ज्यादातर डिवाइस में एक जैसे ही फीचर हैं। जब कार स्टार्ट होती है और रुकती है, तब आपको अलर्ट मिलता है। एक यूजर वह इलाका तय कर सकता है जिसके भीतर कार रहनी चाहिए। अगर कार उस क्षेत्र की सीमा पार करती है तो मोबाइल पर अलर्ट भेजा जाता है। इसी तरह जब आप लंबे सफर पर हैं और कूलेंट का तापमान बहुत तेजी से बढ़ता है तो वाहन को रोकने के लिए अलर्ट मिलता है। कोई व्यक्ति इस डिवाइस के जरिये अपने वाहन की अधिकतम गति सीमा तय कर सकता है, इसलिए अगर वाहन उस अधिकतम गति सीमा को पार करता है तो आपको अलर्ट मिलता है। इंजन के बंद होने का भी ब्योरा रहता है। 
 
उदाहरण के लिए कार मालिक यह भी जान सकता है कि ड्राइवर वाहन को खड़ा करके बहुत देर से एयर कंडीशनर तो नहीं चला रहा। यह हार्डवेयर खास हो सकता है लेकिन इसे ग्राहकों के लिए आसान बनाने के लिए कोई भी उपलब्ध सेंसर का जिक्र नहीं करता है और न ही यह बताता है कि इसमें कितना शक्तिशाली प्रोसेसर है। इस क्षेत्र की ज्यादातर स्टार्टअप भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थाओं (आईआईटी) के युवा स्नातकों ने शुरू की हैं। ऑटोविज के नाम से यह डिवाइस बेचने वाली सेनसाइट टेक्नोलॉजिज के सीईओ कमल अग्र्रवाल कहते हैं, 'लागत एक मानक है, लेकिन कंपनी का मूल्यांकन करने का ग्राहक के पास एक अन्य तरीका यह है कि वह ऐप के इंटरफेस की जांच करे और एमेजॉन जैसे ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर लोगों की समीक्षा देखेे।  एमेजॉन पर ये डिवाइस बिकते हैं।' 
 
तत्काल समीक्षा के लिए आप गूगल प्ले स्टोर पर जा सकते हैं और इंटरफेस और फीचर देखने के लिए विनिर्माता के ऐप की जांच कर सकते हैं। विनिर्माता अपने डिवाइस को ज्यादा आकर्षक और सबसे जुदा बनाने के लिए इसमें और फीचर जोड़ रहे हैं। जाइम और ऑटोविज के डिवाइस में यह सुविधा है कि अगर कार को कोई उठाकर ले जाता है तो ग्राहक को उसी समय अलर्ट मिल जाता है। 
 
ऑटोविज के डिवाइस में एक ऐसा भी वैरिएंट है, जिससे डिवाइस हॉटस्पॉट बन जाता है और कार में बैठे लोग बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के वाई-फाई पर डेटा इस्तेमाल कर सकते हैं। इन कंपनियों में से ज्यादातर ने विभिन्न मोबाइल ऑपरेटरों के साथ करार कर रखे हैं। वे लोकेशन के आधार पर ऐसा ऑपरेटर चुनते हैं, जो ग्राहक के शहर में सबसे बेहतर सेवा देता है। रोलर के सह-संस्थापक और मुख्य तकनीकी अधिकारी अमित उपाध्याय ने कहा, 'इस डिवाइस में इन-बिल्ट मेमोरी भी है। जब नेटवर्क उपलब्ध नहीं होता है तो डेटा डिवाइस में जमा हो जाता है और बाद में नेटवर्क उपलब्ध होने पर ऐप को भेजा जाता है।'
 
सस्ते विकल्प, सीमित फीचर  
 
अगर 4,500 से 7,500 रुपये का खर्च ज्यादा लगता है तो कार मालिक सस्ते चीनी डिवाइस पर भी विचार कर सकता है। ये ब्लूटूथ के जरिये काम करते हैं और इनकी कीमत 500 से 600 रुपये है। ये केवल तभी काम करेंगे, जब आप कार में होते हैं और आपका मोबाइल इनसे जुड़ा होता है।  अगर आप कार की स्थिति को लेकर ही फिक्रमंद हैं तो ये डिवाइस आपके लिए विकल्प बन सकते हैं। इनका खुद का कोई ऐप नहीं है। आपको टॉर्क प्रो जैसे ऐप भी खरीदने होंगे, जो सभी जेनेरिक ओबीडी-2 डिवाइसों पर काम करते हैं। इन रिपोर्टों को समझने के लिए आपको तकनीक का थोड़ा जानकार भी होना होगा। भारतीय विनिर्माताओं के ऐप आसान प्रारूप में रिपोर्ट देते हैं। उदाहरण के लिए एयर फ्यूल कंट्रोल, ट्रांसमिशन आदि ठीक काम कर रहे हैं या नहीं। टॉर्क जैसे ऐप में आपको कोड मिलते हैं। 
 
वाहन विनिर्माता कंपनियां भी ये डिवाइस अपने वाहनों में लगा रही हैं। जैसे होंडा की होंडा कनेक्ट है। अगर आपकी विनिर्माता कंपनी ऐसी सुविधा देती है तो इसे पहली तरजीह दीजिए। ओबीडी-2 पोर्ट दो तरह के डेटा मुहैया कराता है। एक जेनेरिक है, जिसका सभी भारतीय स्मार्ट डिवाइस विनिर्माता इस्तेमाल कर रहे हैं। दूसरा कार विशेष से संबंधित ब्योरा है, जो विनिर्माता साझा नहीं करता है। इसलिए विनिर्माता को ऐसा प्लेटफॉर्म चुनना चाहिए, जो यह ब्योरा मुहैया कराता हो।  जाइम के गुप्ता ने कहा, 'ओबीडी-2 में दूर से ही कार के सभी कार्यों को नियंत्रित करने की संभावना है। जैसे गाड़ी को रोक देना। आप उम्मीद कर सकते हैं कि वर्ष 2020 तक ज्यादातर कार विनिर्माताओं के पास ऐसे प्लेटफॉर्म होंगे।' 
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