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इस साल जियो की ताल से बदलेगी रिलायंस की चाल

राम प्रसाद साहू |  Jan 07, 2018 09:42 PM IST

रिलायंस इंडस्ट्रीज (आरआईएल) उन शेयरों में शुमार रहा है, जिनमें 2017 में सर्वाधिक तेजी आई है। दूरसंचार कारोबार में सकारात्मक उपलब्धि और रिफाइनिंग एवं पेट्रोरसायन कारोबार के मजबूत प्रदर्शन की बदौलत आरआईएल ने अपने शेयरधारकों की संपत्ति में 68 प्रतिशत इजाफा किया है। शेयर में ताजा हलचल की वजह कंपनी द्वारा हाल में रिलांयस कम्युनिकेशन्स (आरकॉम) से फाइबर, टावर और स्पेक्ट्रम परिसंपत्तियां खरीदना रही है। यह सौदा करीब 25,000 करोड़ रुपये में हो रहा है। हालांकि इस सौदे से आरआईएल पर कर्ज जरूर बढ़ेगा, लेकिन उसे कम लागत, 4जी नेटवर्क में विस्तार और कारोबार में अधिक तारतम्यता का लाभ भी मिलेगा। आरकॉम की परिसंपत्तियां खरीदने से कंपनी टावरों के किराये में सालाना 1500 से 1600 करोड़ रुपये की बचत भी कर सकेगी। 

 
आरआईएल में मजबूती की दूसरी वजह जियो का मजबूत परिचालन प्रदर्शन है। उदाहरण के लिए अक्टूबर में जियो ने 73 लाख उपभोक्ता जोड़े, जो इसी अवधि में एयरटेल के उपभोक्ताओं की संख्या में हुई बढ़ोतरी का लगभग दोगुना है। इस समय जियो की बाजार हिस्सेदारी करीब 13 प्रतिशत है। अक्टूबर में शुरू किए गए नए प्लान की बदौलत इसके सबसे लोकप्रिय प्लान के शुल्क में भी करीब 15 फीसदी का इजाफा हुआ। शेयरखान के विश्लेषकों का कहना है कि उपभोक्ताओं की संख्या में शानदार इजाफे और प्रति उपभोक्ता औसत राजस्व (एआरपीयू) में सुधार से जियो का मुनाफा बढ़ेगा। विश्लेषकों के अनुसार जियो का उपभोक्ता बाजार वित्त वर्ष 2020 तक दोगुना बढ़कर 24 प्रतिशत हो जाएगा, जबकि एआरपीयू बढ़कर 195 के स्तर पर पहुंच जाएगा। जियो का शुद्ध मुनाफा वित्त वर्ष 2020 तक 11,100 करोड़ डॉलर रहने का अनुमान है, जो आरआईएल के समेकित मुनाफे का 20 प्रतिशत हो सकता है। 
 
नवंबर के अंत में जारी एक रिपोर्ट में गोल्डमैन सैक्स के विश्लेषकों ने कहा कि रिफाइनिंग कारोबार वित्त वर्ष 2019 तक आरआईएल की आय में सर्वाधिक योगदान देगा। ज्यादा कारोबार और लागत ढांचे में सुधार की वजह से अगले तीन सालों में परिचालन मुनाफा बढ़कर 300 करोड़ डॉलर हो जाएगा। उन्होंने रसायन कारोबार के परिचालन मुनाफे का अनुमान 550 करोड़ डॉलर रखा है जो वित्त वर्ष 2017 में करीब 250 करोड़ डॉलर रहा है। कंपनी को उत्पादों के बेहतर एकीकरण एवं कच्चे माल आदि आवश्यक वस्तुओं के मामले में लचीलेपन से आर्थिक हालात में बदलाव का प्रभाव कम करने में भी मदद मिलेगी। 
 
कंपनी के रिफाइनिंग कारोबार का प्रदर्शन बेंचमार्क सिंगापुर ग्रॉस रिफाइनिंग मार्जिन्स (जीआरएम) के मुकाबले बेहतर रहना चाहिए। कंपनी को पेटकोक गैसिफिकेशन परियोजनाओं में तेजी से लाभ मिल सकता है। पेटकोक परियोजना आरआईएल के जीआरएम में 1.5 डॉलर प्रति बैरल तक इजाफा कर सकती है। कंपनी का जीआरएम सिंगापुर मार्जिन के मुकाबले पिछले दो सालों से 3-4 अरब डॉलर अधिक रहा है।  कुल मिलाकर आरजियो के वित्तीय आंकड़ों में अपेक्षित सुधार विश्लेषकों के लिए अकेला सबसे बड़ा कारण रहा है, जिसके चलते उन्होंने आरआईएल की आय का अनुमान बढ़ा दिया है। कंपनी के प्रमुख कारोबार में नई परियोजनाएं और अधिक क्षमता का इस्तेमाल भी उसके समूचे सुधारों में योगदान देते हैं। वित्त वर्ष 2017 में 19 प्रतिशत वृद्धि के बाद नोमूरा के विश्लेषकों ने कहा कि वित्त वर्ष 2017 से 20 के बीच आरआईएल की आय 21 प्रतिशत से 38 प्रतिशत के बीच बढ़ेगी। चूंकि, आरआईएल का ज्यादातर पूंजीगत व्यय बंद हो चुका है और अब ये इसके राजस्व में योगदान देने लगे हैं, ऐसे में कंपनी के मुनाफे में खासी बढ़ोतरी होनी चाहिए। अगली बड़ी निवेश योजना तैयार होने तक कंपनी इसे अंशधारकों में बांट सकती है या कर्ज कम कर सकती है।  
कीवर्ड RIL, oil, gas, mukesh ambani, reliance,

  
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