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एचडीएफसी के लिए अब सहायक कंपनियां भी हैं अहम

हंसिनी कार्तिक |  Jan 07, 2018 09:42 PM IST

मोटे तौर पर यह सभी को पता है कि रियल एस्टेट क्षेत्र का एक बड़ा तबका फिलहाल गिरावट का सामना कर रहा है। इस क्षेत्र में सस्ती आवासीय योजनाएं जरूर अपवाद मानी जा सकती हैं। लिहाजा पिछली कुछ तिमाहियों में ऋण कारोबार खंड की वृद्धि दर 14-18 प्रतिशत रहने के बावजूद एचडीएफसी लिमिटेड के माथे पर बल नहीं पड़े हैं। एचडीएफसी के साथ भारत का सबसे बड़ा वित्त प्रदाता होने का तमगा जुड़ा है, जो इसके लिए मददगार रहा है। हालांकि इसकी सहायक इकाइयों की बढ़ती अहमियत से भी रियल एस्टेट कारोबार में मंदी से इसे निपटने में इसे मदद मिली है। वास्तव में अगर सहाइयक इकाइयों में तेजी इसी तरह बरकरार रही तो एचडीएफसी में इनके हिस्से की वैल्यू यानी सम-ऑफ-द-पार्ट (एसओटीपी) वैल्यू आने वाले समय में बढ़ सकती है। जैसे  2017 के शुरू में एचडीएफसी के कुल शेयर मूल्यांकन में सहायक कंपनियों की हिस्सेदारी 50 प्रतिशत थी जो साल के अंत में बढ़कर 52 प्रतिशत हो गई है। 

 
ऐसा पहली बार हुआ है जब विश्लेषकों ने सहायक इकाइयों का संयुक्त मूल्यांकन एचडीएफसी के मुख्य कारोबार से अधिक रखा है। एचडीएफसी के सामान्य बीमा एवं परिसंपत्ति प्रबंधन कारोबार में अधिकतम तेजी आई है, जबकि इसकी बैंकिंग इकाई एचडीएफसी ने भी बड़ा योगदान दिया है। 2017 में एचडीएफसी बैंक के शेयरों का मूल्यांकन 55 प्रतिशत से अधिक बढ़ा है।  नोमूरा के विश्लेषकों ने एचडीएफसी की सहायक इकाइयों के मूल्यांकन में तेजी को सही ठहराया है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक सहायक कंपनी अपने संबंधित खंडों में सबसे बेहतर स्थिति में है। उन्हें उम्मीद है कि वित्त वर्ष 2017 से 2020 के बीच इनकी वृद्धि दर 20 प्रतिशत रह सकती है। ज्यादातर सहायक इकाइयों के मुकाबले एचडीएफसी के प्रमुख ऋण कारोबार का मूल्यांकन धीमा रहा है। 
 
हाल में ही एचडीएफसी ने 13,000 करोड़ रुपये जुटाने की घोषणा की है, जो संकेत है कि यह वित्तीय दिग्गज किस तरह अपनी सहायक इकाइयों को मजबूत कर रहा है। एचडीएफसी बैंक में मातृ कंपनी की 21 प्रतिशत हिस्सेदारी बरकरार रखने के लिए कंपनी 85,00 करोड़ रुपये डालेगी। वहीं यह पूंजी डालने से सामान्य बीमा कारोबार को भी लाभ होगा। एचडीएफसी संभवत: 2018 में अपनी परिसंपत्ति प्रबंधन इकाई को सूचीबद्ध कराएगी जबकि शेष पूंजी इसके मुख्य ऋण कारोबार के लिए उपलब्ध हो सकती है। इस पूंजी का इस्तेमाल विलय एवं अधिग्रहण के जरिये कारोबार विस्तार के लिए हो सकता है। 
 
तेजी से बढ़ता सस्ते घरों के क्षेत्र का कारोबार भी इसके लिए सकारात्मक रहा है। इस खंड में इसकी सहायक कंपनी  गृह फाइनैंस है। एचडीएफसी का मुख्य कारोबार मौजूदा वृद्धि दर बरकरार रखने के लिए पर्याप्त नकदी मुहैया करा रहा है, लेकिन 25-30 प्रतिशत तेजी बरकरार रखने के लिए कुछ अतिरिक्त संसाधनों की जरूरत होगी। इस मोर्चे पर प्रतिस्पद्र्धी कंपनियां सस्ते आवास खंड में अच्छा कारोबार कर रही हैं, जबकि एचडीएफसी का औसत ऋण का आकार अब भी करीब 25 लाख है। लिहाजा इस खंड में त्वरित वृद्धि से उसे मदद मिलनी चाहिए। 
 
एक और क्षेत्र है, जिस पर विश्लेषकों की नजर है, वह है बिल्डर बुक या गैर-खुदरा ऋण। कुल पोर्टफोलियो में इस कारोबार की हिस्सेदारी हाल में बढ़ी है। इन ऋणों पर बेहतर मुनाफा मिलता है, लेकिन इनके साथ जोखिम भी जुड़े होते हैं। एचडीएफसी के लिए इस खंड का सकल गैर-निष्पादित आस्तियां (एनपीए) अनुपात पिछले साल करीब 1 प्रतिशत से बढ़कर वित्त वर्ष 2018 की दूसरी तिमाही में 2.2 प्रतिशत हो गया। कुल मिलाकर दूसरी तिमाही में सकल एनपीए अनुपात 1.1 प्रतिशत बरकरार रहा, जबकि व्यक्गित ऋण खंड के अनुपात में सुधार हुआ। वित्त की लागत बढऩे से निकट भविष्य में एचडीएफसी के मुनाफे पर दबाव पड़ सकता है। मोटे तौर पर बात करें तो एचडीएफसी के प्रमुख कारोबार के लिए कुछ छोटे मुद्दे जरूर हैं, लेकिन सहायक इकाइयां एचडीएफसी शेयर में तेजी बरकरार रख सकती हैं।  पिछले साल शेयर 40 प्रतिशत से अधिक चढ़ा है। हालांकि पिछला प्रदर्शन किस तरह दोहराया जाएगा, इस पर निवेशकों की नजर जरूर रहेगी। 
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