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बीते साल की पांच हिदायत ताकि अपने धन की आप कर सकें हिफाजत

संजय कुमार सिंह |  Jan 07, 2018 09:46 PM IST

शेयर में रकम लगाने वालों के लिए 2017 बहुत शानदार और माल देना वाला साल रहा। लेकिन स्थिर आय वाली योजनाओं में ब्याज की दरें गिरती रहीं, जिससे स्थिर आय में निवेश करने वालों को नुकसान हुआ। इन सबके बीच बीता हुआ साल हमें और आपको पांच बड़े अहम सबक दे गया है।

 
शेयरों से निकालें, कहीं और डालें
 
इस साल शेयर बाजारों का प्रदर्शन एकदम ऐतिहासिक रहा। साल भर में निफ्टी 50 तकरीबन 30.71 फीसदी चढ़ गया, निफ्टी फ्री फ्लोट मिडकैप 100 सूचकांक में 50.09 फीसदी का इजाफा हुआ और निफ्टी फ्री फ्लोट स्मॉल कैप 100 सूचकांक ने 60.41 फीसदी की छलांग लगा डाली। इस बीच शेयरों के भाव भी कई गुना चढ़ गए, जिसकी वजह से भारत का बाजार इस समय बहुत महंगा हो गया है। निफ्टी 50 इस समय 26.51 फीसदी के ट्रेलिंग प्राइस टु अर्निंग रेश्यो पर कारोबार कर रहा है और निफ्टी फ्री फ्लोट मिडकैप 100 सूचकांक का प्राइस टु अर्निंग रेश्यो 51.37 फीसदी है और निफ्टी फ्री फ्लोट स्मॉल कैप 100 सूचकांक के लिए तो यही आंकड़ा 100.77 है।
 
ऐसे में निवेशकों को संतुलन साधने की जरूरत है। हालांकि शेयरों ने पहले से अनुमानित सभी स्तरों को लांघते हुए तमाम रिकॉर्ड इस साल कायम किए हैं, लेकिन इसे देखकर शेयर निवेशकों को जरूरत से ज्यादा जोश में नहीं आना चाहिए। मगर बाजार में शेयरों के भाव इतने ऊंचे देखकर उन्हें इस कदर डर भी नहीं जाना चाहिए कि वे बाजार से एकदम बाहर ही निकल जाएं। इस समय जरूरत है नियमित रूप से संतुलन साधने की। प्लान अहेड वेल्थ एडवाइजर्स के मुख्य वित्तीय योजनाकार विशाल धवन की सलाह है, 'शेयर बेच दीजिए और रकम स्थिर आय और सोने जैसी संपत्ति श्रेणियों में डाल दीजिए क्योंकि उनका प्रदर्शन अभी उम्मीद पर खरा नहीं उतरा है।' इतना तो तय है कि मिड और स्मॉल कैप फंडों में आपका निवेश समूचे निवेश के 25-30 फीसदी से अधिक नहीं होना चाहिए।
 
कम अवधि डेट फंड बेहतर
 
गुजरे साल की आखिरी तिमाही में 10 साल की अवधि वाली सरकारी प्रतिभूतियों की प्राप्ति चढऩी शुरू हो गई थी (इस समय 7.37 फीसदी है)। अधिक औसत अवधि वाले फंड फंस गए और उनके प्रतिफल भी नीचे आ गए। दरों में इजाफे का दौर अब खत्म होता दिख रहा है। इसीलिए डेट फंड में अपने कुल निवेश का 60-70 फीसदी छोटी अवधि के फंड में लगाना ही समझदारी होगी। आप ब्याज इक_ïा करने वाले कॉर्पोरेट बॉन्ड फंडों में भी निवेश कर सकते हैं। डेट फंड में आपके कुल निवेश का मामूली हिस्सा ही जोखिम भरे दीर्घावधि फंडों में जाना चाहिए और वह भी तब, जब आप तीन साल या उससे अधिक समय के लिए निवेश कर रहे हैं। इसी तरह क्रेडिट अपॉच्र्युनिटी फंडों में भी मामूली निवेश ही होना चाहिए।
 
एफडी से आगे की भी सोचिए
 
जो लोग स्थिर जमा (एफडी) और डाकघर में चलने वाली लघु बचत योजनाओं में ही रकम लगाना पसंद करते हैं, उनके लिए यह साल अच्छा नहीं रहा क्योंकि इन सभी पर मिलने वाला रिटर्न बहुत कम हो गया। ब्याज दरों में कमी का सिलसिला फिलहाल थम गया है, इसलिए स्थिर आय निवेशक भी राहत की सांस ले सकते हैं। लेकिन राहत ज्यादा देर तक नहीं रहेगी। यदि भारतीय रिजर्व बैंक मुद्रास्फीति पर अंकुश रख लेता है तो ब्याज दरें नीचे ही जाएंगी। इसीलिए स्थिर आय में निवेश करने वालों को दो काम करने चाहिए। पहला, स्थिर आय की श्रेणी में ही बेहतर रिटर्न हासिल करने के लिए सही दांव खोजना चाहिए। उदाहरण के लिए कुछ छोटे बैंक एफडी पर दूसरे बैंकों की तुलना में अधिक रिटर्न दे रहे हैं। इसी तरह डाकघर की कुछ लघु बचत योजनाओं (वरिष्ठï नागरिक बचत योजना, सुकन्या समृद्घि योजना आदि) में भी आकर्षक रिटर्न हासिल हो रहा है। पहले देखिए कि आप कितने समय के लिए निवेश कर रहे हैं और उसके बाद इन योजनाओं की परिपक्वता अवधि देखिए। यदि कर काटे जाने के बाद भी इन योजनाओं का रिटर्न आपको आकर्षक लगता है तो इनमें निवेश कर डालिए। लेकिन भविष्य में आपको बाजार से जुड़ी योजनाओं का रुख भी करना पड़ सकता है। कम अवधि वाले डेट फंडों से शुरुआत करें। तीन वर्ष के बाद कर में रियायत के कारण वे एफडी पर भारी पड़ते हैं। यदि आपके पास (सात साल या उससे ज्यादा का) वक्त है तो शेयरों में भी कुछ निवेश कर सकते हैं।
 
तैयार मकान में करें निवेश
 
रियल एस्टेट के लिहाज से यह साल इतिहास रच गया क्योंकि कई राज्यों ने रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरणों का गठन कर दिया। लेकिन इनका क्रियान्वयन अब भी आधा-अधूरा है। यदि आप ऐसे किसी राज्य में रहते हैं, जहां नियामक काम नहीं कर रहा है तो एकदम तैयार संपत्ति ही खरीदिए चाहे उसके लिए आपको अधिक कीमत ही क्यों न चुकानी पड़े।
 
दूर रहिए बिटकॉइन से
 
2017 में पूरी साल बिटकॉइन सुर्खियों में ही रहा। एक दिन चढ़ता था तो दूसरे दिन लुढ़क जाता था। भारतीय बिटकॉइन एक्सचेंजों पर पंजीकरण कराने वालों की तादाद बढ़ती रही क्योंकि ढेर सारे छोटे निवेशक इसका फायदा उठाने की ललक में खिंचे चले आए। ऐसी खबरें भी आईं कि सरकार बिटकॉइन के लिए नियम-कायदे बना रही है। बिटकॉइन न तो लाभांश देता है और न ही नकदी देता है क्योंकि उसकी खुद कोई कीमत ही नहीं होती है। अरविंद राव ऐंड एसोसिएट्स के वित्तीय योजनाकार और संस्थापक अरविंद ए राव आगाह करते हैं, 'यह अजीब सी संपत्ति श्रेणी है। अपने कुल निवेश का 10 फीसदी से अधिक हिस्सा इसमें मत लगाइए।' हकीकत में आपको वही रकम इसमें लगानी चाहिए, जिसके डूबने से आप पर अधिक असर नहीं पड़े। नियमित रूप से मुनाफा कमाते रहिए और मुनाफे पर कर चुकाना मत भूलिए क्योंकि बिटकॉइन में निवेश करने वाले धनाढ्य निवेशकों को अब तक 4-5 लाख कर नोटिस भेजे जा चुके हैं। अंत में अगर आपका करियर अच्छी तरह से आगे बढ़ रहा है और आपकी आय भी लगातार बढ़ रही है तो सेबी में पंजीकृत निवेश सलाहकार के पास पहुंच जाइए। अपने ही धन का ध्यान रखना लगातार पेचीदा होता जा रहा है और नौकरी तथा दूसरी व्यस्तताओं के कारण हममें से ज्यादातर लोग इसका ध्यान नहीं रख पाते हैं। 
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