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आईटीसी शेयर नरम पर आगे दिखाएगा दम

विशाल छाबडिय़ा |  Jan 14, 2018 10:05 PM IST

विश्व के दिग्गज निवेशक वारेन बफेट का कहना है कि बाजार में बिकवाली का दौर वास्तव में लिवाली करने का बेहतरीन अवसर होता है। बफेट के इस निवेश मंत्र की जद में फिलहाल आईटीसी पूरी तरह फिट बैठता है। मसलन निवेशक इस शेयर पर गौर फरमा सकते हैं। इस समय आईटीसी का शेयर कमजोर चल रहा है और पिछले 12 महीने में यह एसऐंपीबीएसई सेंसेक्स के मुकाबले धीमा चला है। सेंसेक्स में आई 27 प्रतिशत तेजी के मुकाबले आईटीसी शेयर महज 6 प्रतिशत चढ़ा है। कंपनी के सिगरेट कारोबार पर ऊंचे कर की चोट से भी शेयर की चाल प्रभावित हुई है। हालांकि विश्लेषकों की मानें तो इस शेयर पर दांव लगाने का यह एक अच्छा मौका है। 

 
शेयर की कमजोरी का एक मतलब यह भी है कि वित्त वर्ष 2018 की अनुमानित प्राप्तियों के आधार पर आईटीसी के शेयर का मूल्यांकन इस समय 24-25 गुना स्तर पर है, जो हिंदुस्तान यूनिलीवर की अनुमानित आय 45-46 गुना के मुकाबले आधा है। आईटीसी के पिछले 12 महीने (सितंबर 2017 तक) का आय मूल्यांकन (अर्निंग वैल्युएशन) 31.2 प्रतिशत के साथ 10 साल के अर्निंग मल्टीपल 30.4 से थोड़ा अधिक है। कम मूल्यांकन भविष्य में गिरावट के समय मददगार साबित होता है।   शेयर के लिए दिक्कतें तब शुरू हुई थी जब सरकार ने जुलाई मध्य में सिगरेट पर वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) तार्किक बनाने के लिए उपकर बढ़ा दिया था। यहीं से शेयर के प्रति कमजोर रुझान बना। 
 
जीएसटी लागू होने के बाद पहले एक पखवाड़े में सिगरेट पर कर जीएसटी लागू होने से पहले लगने वाले कर के मुकाबले काफी कम था। इसके मद्देनजर दो दिन के भीतर ही आईटीसी शेयर 13 प्रतिशत उछल कर 353.20 रुपये के स्तर पर चला गया। हालांकि कर में अनियमितता दूर होते ही इसमें गिरावट आ गई। तब से शेयर मुरझाया हुआ है। आईटीसी ने सितंबर तिमाही के नतीजों की घोषणा में सिगरेट कारोबार की हालत अच्छी नहीं रहने की बात कही थी।  हालांकि दूसरी तिमाही में 6 से 7 प्रतिशत गिरने के बाद बाजार तीसरी तिमाही में सिगरेट कारोबार में मामूली गिरावट या इसके सपाट रहने की बात कह रहा है। अधिक मुनाफा देने वाले सिगरेट कारोबार का आईटीसी की कर एवं ब्याज पूर्व आय में 85 प्रतिशत तक योगदान होता है, इसलिए इस कारोबार के कमजोर रहने से बाजार में धारणा प्रभावित होना स्वाभाविक है। 
 
हालांकि वित्त वर्ष 2019 में प्राप्तियां अच्छी रहने की उम्मीद है, इसलिए विश्लेष्कों का कहना है कि बाजार जल्द ही शेयर में भरोसा दिखा सकता है। अगली कुछ और तिमाहियों तक सिगरेट कारोबार भले ही मंदा रह सकता है, लेकिन सुधार आना भी शुरू हो गया है।  जेएम फाइनैंशियल के विश्लेषकों ने जनवरी में प्रकाशित अपनी रिपोर्ट में कहा,'कारोबार में स्थिरता आने के शुरुआती संकेत दिखने लगे हैं और इसमें आगे और सुधार आएगा। हमारे विचार से कारोबार में गिरावट का बुरा दौर बीत चुका है और अब आगे तंबाकू खंड में कारोबार सुधरने की उम्मीद है।'
 
आईटीसी का एफएमसीजी कारोबार मोटे तौर पर अच्छा चल रहा है। कंपनी ने 2030  तक एक लाख करोड़ रुपये राजस्व अर्जित करने के लक्ष्य के साथ एफएमसीजी पर अधिक ध्यान दिया है। वित्त वर्ष 2017 में कंपनी के एफएमसीजी खंड की कुल बिक्री 105.37 अरब रुपये रही थी। पिछले दो से तीन साल में एफएमसीजी का राजस्व थोड़ा कम जरूर हुआ है, लेकिन यह आंशिक रूप से महंगाई के निचले स्तर पर रहने से हुआ है। इससे भी अहम बात यह है कि पिछले चार सालों से यह मुनाफा कमा रहा है और वित्त वर्ष 2018 की पहली छमाही में मुनाफे में और सुधार हुआ है। जून 2017 तिमाही में 5.4 करोड़ रुपये कर एवं ब्याज पूर्व आय और एक साल पहले 3.3 करोड़ रुपये नुकसान के मुकाबले वित्त वर्ष 2018 की दूसरी छमाही में इसे 20.5 करोड़ रुपये की कर एवं ब्याज पूर्व आय की प्राप्ति हुई है। एडलवाइस के विश्लेषकों के अनुसार यह कारोबार तीसरी तिमाही में 15 प्रतिशत वृद्धि दर्ज कर सकता है। 
 
दूसरे कारोबारों में होटल कारोबार भी दूसरी तिमाही में सुधरा है, जबकि पेपरबोर्ड, पेपर और पैकिंग कारोबार के मुनाफे में सालाना आधार पर 18 प्रतिशत तेजी आई है। कागज कारोबार वास्तव में अच्छी स्थिति में है और कंपनियां आयात से मिली सुरक्षा के बीच कीमतें अपने हिसाब से तय कर पा रही हैं। आईटीसी वैल्यू-एडेड पेपरबोर्ड और नोटबुक में अग्रणी है, इसलिए उद्योग जगत की संभावित बाधाओं से निपटने के लिए बेहतर स्थिति में है।  आगे चलकर मोटे तौर पर कारोबारी माहौल सुधर रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि आगामी बजट में सरकार सिगरेट पर कर बढ़ाने से गुरेज कर सकती है। सिगरेट पर पहले ही अधिक कर है और इससे तंबाकू उद्योग प्रभावित हो रहा है, जबकि तस्करी और आयात से आए उत्पादों का बाजार फल-फूल रहा है। फिलहाल ऊंचा कर ही आईटीसी की आय के लिए जोखिम है। विश्लेषकों का कहना है कि पिछले दो साल में आईटीसी ने खराब परिस्थितियों में भी 5 से 7 प्रतिशत की दर से तिमाही आय में वृद्धि दर्ज की है।
 
आने वाले समय पर एचडीएफसी सिक्योरिटीज के विश्लेषकों ने पिछले महीने कहा,'हमें वित्त वर्ष 2017 से 2020 के बीच राजस्व/कर एवं ब्याज पूर्व आय/समायोजित शुद्ध मुनाफे में 9/10/11 प्रतिशत चक्रवृद्धि दर से वृद्धि की उम्मीद है। आईटीसी का कर एवं ब्याज पूर्व आय मार्जिन 36 प्रतिशत है और निवेशित पूंजी पर प्रतिफल 40 प्रतिशत है।' विश्लेषकों ने इस समय 265 रुपये पर कारोबार कर रहे शेयर के लिए 'बाई' रेटिंग के साथ 358 रुपये का लक्ष्य रखा है। 
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