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अगर बनाना है माल तो ये संकल्प लीजिए इस साल

तिनेश भसीन |  Jan 14, 2018 10:08 PM IST

पिछले साल बाजार से मुनाफा कमाना बहुत आसान रहा, लेकिन इस साल ऐसा मुश्किल लग रहा है। बाजारों में उतार-चढ़ाव के आसार हैं, जिनसे निपटने के लिए खुद पर अंकुश लगाना होगा, कुछ संकल्प लेने होंगे और उन संकल्पों पर अमल भी करना होगा। ज्यादातर विशेषज्ञों को लगता है कि निवेशकों को इस साल मोटे प्रतिफल की उम्मीदें नहीं पालनी चाहिए क्योंकि पिछले दो साल में बाजार में जिस तरह की तेजी थी, वैसी तेजी इस साल भी रहने के आसार नहीं दिख रहे। बीते 2 वर्षों में आप अनुशासित और सतर्क नहीं थे तो भी आपको पैसा कमाने का पूरा मौका मिला होगा। पिछले कैलेंडर वर्ष में सेंसेक्स और निफ्टी करीब 30 फीसदी चढ़े हैं। इक्विटी म्युचुअल फंडों का औसत प्रतिफल भी अधिक रहा है। अगर इस साल प्रतिफल मिलना मुश्किल लग रहा है तो उसे लपकने के लिए आपको व्यवस्थित ढंग से काम करना होगा और बाजार में चल रही धारणाओं में बहने से बचना होगा। लैडर 7 फाइनैंशियल सर्विसेज के संस्थापक सुरेश सदगोपन ने कहा, 'सबसे अच्छा काम तो यह होगा कि आप अपने पास मौजूद रकम को ठीक से समझ लें। अगर आप खर्च पर अंकुश लगाते हैं तो आपको निवेश करने के लिए ज्यादा रकम मिल सकती है। निवेश बढ़ता है तो आपके पोर्टफोलियो का प्रतिफल भी बढ़ सकता है।'

 
जारी रखें पहले का निवेश
 
एसोसिएशन ऑफ म्युचुअल फंड्स इन इंडिया (एम्फी) के आंकड़ों के मुताबिक केवल 34 फीसदी इक्विटी निवेश 2 साल से अधिक मियाद तक रखा जाता है। इससे यह बात सही साबित होती है कि ज्यादातर निवेशक उस आते हैं, जब बाजार नई ऊंचाइयां छू रहा होता है। जैसे ही बाजार में बड़ी गिरावट आती है, वे अपना निवेश निकाल लेते हैं। सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (एसआईपी) से लंबे अरसे के दौरान संपत्ति बनाने में तभी मदद मिलती है, जब आप बाजार के उतार-चढ़ाव में लगातार निवेश जारी रखते हैं और इस तरह अपनीे खरीद लागत को औसत बनाते हैं। अच्छे प्रतिफल के लिए लंबे समय तक निवेश को बनाए रखना जरूरी है। आपको यह संकल्प लेना चाहिए कि बाजार में गिरावट आती है या भारी उतार-चढ़ाव आता है तो आप न तो एसआईपी बंद करेंगे और न ही पैसे निकालेंगे। इसके उलट उस समय आप एसआईपी की राशि बढ़ाएंगे ताकि आपको गिरावट का फायदा उठाने का मौका मिल सके।
 
बजट बनाएं और उसी पर चलें
 
बहुत से वेतनभोगी लोगों को अपने बैंक खाते में आने वाले वेतन का पता होता है, लेकिन वे अपने खर्चों पर नजर नहीं रखते हैं। पटना की एक शिक्षिका शेरिल सिन्हा को हरेक छोटे-मोटे खर्च का रिकॉर्ड रखना झंझट भरा लगता है। उनके वेतन से एक निश्चित राशि एसआईपी के जरिये म्युचुअल फंडों में चली जाती है और कुछ रकम एक टिकाऊ उपभोक्ता उपकरण की मासिक किस्त में चली जाती है। घरेलू खर्च के बाद बची रकम को वह एफडी में रखती हैं।  वित्तीय योजनाकारों का कहना है कि बहुत से लोगों का अपने पैसे के प्रबंधन का तरीका सिन्हा की तरह ही होता है। उनके लिए एक आसान तरीका दो बैंक खाते रखना है। टीबीएनजी कैपिटल एडवाइजर्स के संस्थापक और सीईओ तरुण बिरानी कहते हैं, 'मुख्य खाते का इस्तेमाल निवेश, बच्चों की फीस और ऋण भुगतान जैसे तय खर्च के लिए किया जा सकता है।' वे हर महीने एक निश्चित राशि विभिन्न खर्चों के लिए दूसरे खाते में डाल सकते हैं। कुछ ही महीनों में वे अपने खर्च को ठीक से समझ पाएंगे और उसके मुताबिक बजट बना पाएंगे। इसके बाद वे खर्च में कटौती शुरू कर सकते हैं और निवेश के लिए रकम बढ़ा सकते हैं।  
 
धन का प्रबंधन बेहतरी से करें
 
हो सकता है कि आपने सही फंड चुने हों और आपका एसआईपी जारी रखने का भी इरादा हो। लेकिन थोड़ा बेहतर प्रबंधन करने से आपको प्रतिफल बढ़ाने में मदद मिल सकती है। अपने निवेश पोर्टफोलियो को मजबूत बनाने पर ध्यान दें। निवेश सलाहकारों का कहना है कि निवेशक आम तौर पर अपने दोस्तों या परिवार की सलाह पर रकम बचाते हैं या किसी खास मकसद के लिए बचत के इरादे से पोर्टफोलियो में धन डालते हैं। उदाहरण के लिए दिल्ली के एक सॉफ्टवेयर डेवलपर नितिन गर्ग का 14 फंड का पोर्टफोलियो है। कुछ ऐसे फंड हैं, जिनमें से उन्होंने पैसे तो नहीं निकाले लेकिन उनमें निवेश बंद कर दिया है। जब उनकी बेटी का जन्म हुआ था तो उन्होंने उसके लिए दो नई योजनाओं में निवेश शुरू किया था। किसी भी पोर्टफोलियो में तीन से अधिक लार्ज-कैप, दो से अधिक मिड एवं स्मॉल कैप और एक या दो सेक्टर फंड से अधिक फंड नहीं होने चाहिए। इन सेक्टर फंडों में से ज्यादातर निवेश (50 फीसदी से उससे अधिक) लार्ज-कैप फंडों में करना चाहिए। इस सीमा से अधिक फंडों में निवेश करने से ज्यादा विधिता के कारण प्रतिफल घट सकता है। 
 
तय करें कि कौन सा कर्ज सही
 
ज्यादातर लोगों को यह पता होता है कि क्रेडिट कार्डों में ब्याज की ऊंची दर होती है। इसके बावजूद बहुत से लोग बकाया भुगतान नहीं करते हैं। उदाहरण के लिए माना कि आप पर 2 लाख रुपये बकाया हैं और आप हर महीने बकाया के 50 फीसदी का भुगतान करते हैं। आप हर महीने मूलधन का 25 फीसदी खर्च करना जारी रखते हैं। पहले महीने में आपको 1 लाख रुपये लौटाने होंगे और यह तीन साल एक महीने में शून्य हो जाएगा। इस अवधि में आप कुल 8,333 रुपये ब्याज के रूप में चुकाएंगे।  आप यह संकल्प लें कि ऊंची ब्याज दर वाले ऋण का पहले भुगतान करूंगा और हर साल जीवनशैली से जुड़े उत्पादों के लिए ऋण नहीं लूंगा। अपने कर्ज को जल्द चुकाने के कई विकल्प हैं। अगर दूसरा कार्ड निर्गमकर्ता आपसे कम ब्याज दर वसूल रहा है तो आप अपने बकाया कर्ज को ईएमआई में बदलवा सकते हैं, पर्सनल लोन ले सकते हैं या बैलेंस को ट्रांसफर कर सकते हैं। अगर आप पर ऊंची ब्याज दर का पर्सनल लोन है तो इन्क्रीमेंट या बोनस मिलते ही इसे चुकाने की कोशिश करें। आप ब्याज पर होने वाला जो खर्च बचाएंगे, उसका इस्तेमाल अपनी मासिक बचत बढ़ाने में कर सकते हैं। 
 
आभासी मुद्रा.. न बाबा न
 
पिछले साल बिटकॉइन के शानदार प्रतिफल से बहुत से निवेशक क्रिप्टोकरेंसी की दुनिया में खिंचे चले आए। निवेशकों का निवेश एक साल में 15 गुना हो गया। इसकी कीमत जितनी ज्यादा बढ़ी है, उतनी ही इसमें निवेशकों की तादाद भी बढ़ी है। हालांकि यह कोई नहीं जानता कि आगे आभासी मुद्रा यानी क्रिप्टोकरेंसी किस दिशा में जाएंगी क्योंकि इनका खुद का कोई मोल नहीं है। इनकी कीमत केवल रुझानों से घटती-बढ़ती है। यही वजह है कि निवेश प्रबंधक निवेशकों को आभासी मुद्राओं से दूर रहने का सुझाव देते हैं। लेकिन बहुत से लोग दूसरों के निवेश की सफल कहानियों से प्रभावित हो सकते हैं। एक बैंक कर्मचारी अंकित गुप्ता क्रिप्टोकरेंसी की दुनिया को समझना और अनुभव करना चाहते हैं। इसमें उनके परिवार के कुछ लोगों के 1 लाख रुपये 17 लाख रुपये बन गए हैं। लेकिन वित्तीय योजनाकार सलाह देते हैं कि व्यक्ति को क्रिप्टोकरेंसी में केवल उतनी ही राशि का निवेश करना चाहिए, जिसका नुकसान वह आराम से बरदाश्त कर सके। इसकी वजह यह है कि इन करेंसी में भारी गिरावट के आसार हैं। जब क्रिप्टोकरेंसी के बारे में प्रतिकूल खबर या घोटाला या सरकारी कार्रवाई की खबरें आती हैं तो इसकी कीमत घटती है। बीते वर्षों में कई बार बिटकॉइन की कीमतें 50 फीसदी तक गिर चुकी हैं। हैप्पिनेसफैक्टरी डॉट इन के संस्थापक अमर पंडित ने कहा, 'अगर कोई व्यक्ति हाल के प्रतिफल को देखते हुए निवेश करना चाहता है तो उसे सलाह है कि वह ऐसा न करे। अगर वे इसे समझते हैं और इसमें लंबे समय तक बने रहना चाहते हैं तो उन्हें इस बात पर ïिवचार करना चाहिए कि इसे पोर्टफोलियो में कैसे जगह दी जाएगी।'
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