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हादसे के शिकार स्वरोजगार प्राप्त लोगों को अदालती राहत

चिराग मडिया |  Jan 14, 2018 10:09 PM IST

सड़क हादसे के शिकार हुए स्वरोजगार लोगों के परिजनों के लिए अच्छी खबर है। सर्वोच्च न्यायालय ने हाल में एक निर्णय दिया कि इन (स्वरोजगार से जुड़े) लोगों के परिवार भी अब पीडि़त के 'आगामी भविष्य' (फ्यूचर प्रोस्पेक्ट्ïस) को ध्यान में रखकर मुआवजे के हकदार होंगे। अभी तक किसी स्थायी नौकरी के भुक्तभोगी (सड़क हादसे के शिकार) ही 'फ्यूचर प्रोस्पेक्ट्ïस' का लाभ पाने में सक्षम थे। सर्वोच्च न्यायालय द्वारा ये दिशा-निर्देश एक तरह से तीनों श्रेणियों के भुक्तभोगियों के बीच समानता पर जोर देते हैं। इसके अलावा सर्वोच्च न्यायालय ने निर्धारित आय वाले कर्मचारियों के लिए भी ये लाभ मुहैया कराने पर जोर दिया है।

 
उद्योग से जुड़े लोगों का मानना है कि इस कदम से उन भुक्तभोगियों के परिवारों या आश्रितों को राहत मिल सकती है जो किसी हादसे में मारे गए और स्वरोजगार पर निर्भर थे या निर्धारित वेतन के तहत काम करते थे। न्यू इंडिया एश्योरेंस के चेयरमैन-सह-प्रबंध निदेशक जी श्रीनिवासन का कहना है, 'सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय से मौत के उन मामलों में मुआवजे पर निर्णय के लिए नियम स्पष्टï हुए हैं जिन्हें लेकर अतीत में अलग अलग निर्णयों की वजह से अस्पष्टïता बनी हुई थी।' अदालती निर्णय में यह स्पष्टï किया गया है कि इस तरह के लाभ के लिए आवेदन के संदर्भ में कितनी आय की गणना की जाएगी और संबंधित गुणक को किस तरह से लागू किया जाएगा। पहले, स्वरोजगार या फिक्स्ड-इनकम वाले लोगों के मामले में, अदालतों के पास देय मुआवजे का निर्णय लेने के लिए विवेकाधीन अधिकार थे। शार्दूल अमरचंद मंगलदास एंड कंपनीज में पार्टनर शैलजा लाल का कहना है, 'नए दिशा-निर्देशों से स्वरोजगार या निर्धारित आय वाले लोगों के 'फ्यूचर प्रोस्पेक्ट्ïस' पर दावों की गणना के वक्त विचार किया जाएगा। इससे इस तरह के दावों को लेकर स्पष्टïता आई है।'
 
बुजुर्गों के परिवारों को मिलेगा लाभ
 
31 अक्टूबर को जारी दिशा-निर्देशों में कई बड़े उपाय शामिल हैं। उपरोक्त बदलाव के अलावा, 'फ्यूचर प्रोस्पेक्ट्ïस' का लाभ 50-60 वर्ष उम्र वर्ग के पीडि़तों को भी दिया गया है। शुरू में इस उम्र वर्ग के लोगों के परिवारों को कोई मुआवजा नहीं दिया जाता था। यह कानून मोटर बीमा के तहत थर्ड-पार्टी बीमा के लिए है। थर्ड-पार्टी बीमा मोटर यान अधिनियम के अनुसार सभी वाहन मालिकों के लिए अनिवार्य है। थर्ड-पार्टी बीमा सिर्फ थर्ड-पार्टी यानी तीसरे पक्ष से जुड़े नुकसान के लिए कानूनी देयता को कवर करता है, जिसमें चोटिल होना, मौत और थर्ड-पार्टी की संपत्ति को नुकसान (पॉलिसीधारक के वाहन का इस्तेमाल करते वक्त) शामिल है। थर्ड-पार्टी क्लेम करने के लिए, भुक्तभोगी को मोटर दुर्घटना दावा पंचाट में मामला दर्ज कराना होगा। वर्ष 2008 में सर्वोच्च न्यायालय के दो न्यायाधीशों के पीठ ने कहा था कि 'फ्यूचर प्रोस्पेक्ट्ïस' पर विचार स्थायी नौकरी वाले लोगों के लिए मुआवजे की गणना के वक्त ही किया जाना चाहिए। अंतिम वेतन का कुछ खास प्रतिशत विभिन्न उम्र वर्गों के लिए निर्धारित किया गया था। हालांकि स्वरोजगार से जुड़े लोगों और फिक्स्ड वेतन वाले लोगों के लिए इस संबंध में स्थिति स्पष्टï नहीं की गई थी।
 
मानक पैमाना
 
अदालती निर्णय ने दावों की गणना के लिए भी मानक निर्धारित कर दिए हैं। उदाहरण के लिए, यदि स्थायी नौकरी कर रहा कोई 40 वर्षीय व्यक्ति सड़क दुर्घटना में मर जाता है तो उसकी वास्तविक सैलरी का अतिरिक्त 50 प्रतिशत हिस्सा संबद्घ गुणक के साथ फ्यूचर प्रोस्पेक्ट्ïस के लिए निर्धारित होगा। अब सर्वोच्च न्यायालय ने कहा है कि स्वरोजगार या फिक्स्ड सैलरी से जुड़े व्यक्ति की मौत के मामले में उसकी आय का अतिरिक्त 40 प्रतिशत हिस्सा शामिल किया जाएगा बशर्ते कि उसकी उम्र 40 साल से कम हो। शुरू में फ्यूचर प्रोस्पेक्ट्ïस का निर्णय दावों के निपटान के लिए संबद्घ अधिकारी द्वारा लिया जाता था। इसके अलावा, संपत्ति के नुकसान और अंतिम संस्कार के खर्च का आंकड़ा भी बढ़ाकर 15,000 रुपये और कंसोर्टियम नुकसान का आंकड़ा बढ़ाकर 40,000 रुपये किया गया है। सर्वोच्च न्यायालय ने यह भी कहा है कि यह रकम तीन साल के बाद 10 फीसदी की दर से बढ़ जाएगी। इन नए दिशा-निर्देशों से दावे की रकम और बीमा कंपनी की देयता बढ़ जाएगी, क्योंकि शुरू में स्वरोजगार और फिक्स्ड सैलरी वाले लोगों के लिए 'फ्यूचर प्रोस्पेक्ट्ïस' लागू नहीं था। लेकिन इससे सड़क हादसे में मारे गए व्यक्ति के पारिवारिक सदस्यों या नॉमिनी के हाथ में ज्यादा रकम आ सकती है। 
 
हालांकि यदि स्वरोजगार से जुड़े लोगों या फिक्स्ड आय वाले लोगों के पास आय का सबूत नहीं है तो उनके न्यूनतम पारिश्रमिक पर सरकार के मानकों के अनुसार निर्णायक क्लेम की रकम की गणना के वक्त विचार किया जाएगा। एसबीआई जनरल इंश्योरेंस के सहायक उपाध्यक्ष (प्रोडक्ट डेवलपमेंट) पुनीत साहनी कहते हैं, 'फ्यूचर प्रोस्पेक्ट्ïस की गणना अब लोगों के लिए बगैर आय सबूत के साथ की जा सकेगी जिसमें राज्य के मानकों के अनुसार न्यूनतम पारिश्रमिक का निर्णय लिया जाएगा। बीमा परिदृश्य से, मैं कहना चाहूंगा कि इससे थर्ड-पार्टी की देनदारी पर बोझ बढ़ जाएगा क्योंकि बीमा कंपनियों को सभी आगामी मामलों के लिए नए समायोजन की गणना करनी होगी।' 
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