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एनपीएस सेवानिवृत्ति के लिहाज से बेहतर विकल्प

तिनेश भसीन |  Jan 21, 2018 08:58 PM IST

सेवानिवृत्ति के लिए आमतौर पर सार्वजनिक भविष्य निधि (पीपीएफ) में निवेश करने वाले स्व-रोजगार में लगे लोगों को राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस) पर विचार करना चाहिए। सरकार ने 1 जनवरी से पीपीएफ सहित अन्य लघु बचत योजनाओं पर ब्याज दरों में कमी कर दी है। इस घोषणा के बाद अब पीपीएफ में निवेश पर महज 7.6 प्रतिशत ही ब्याज मिलेगा, जो पिछली तिमाही के मुकाबले 20 आधार अंक कम है। 

इससे स्व-रोजगार वाले और वेतनभोगी लोगों के लिए उपलब्ध लंबी अवधि की फिक्स्ड इनकम रिटायरमेंट योजनाओं यानी ईपीएफ और पीपीएफ के रिटर्न के बीच अंतर बढ़ गया है। वित्त वर्ष 2016-17 में कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) से वेतनभोगी कर्मचारियों को 8.65 प्रतिशत ब्याज  मिला था। अगर श्रम मंत्रालय चालू वित्त वर्ष के लिए ईपीएफ  पर ब्याज दर 20 आधार अंक कम भी कर दे तो भी वेतनभोगी कर्मचारियों को 8.45 प्रतिशत यानी पीपीएफ के मुकाबले 85 आधार अंक अधिक ब्याज मिलेगा।

स्व-रोजगार में लगे लोगों के लिए पीपीएफ लंबी अवधि की एकमात्र सेवानिवृत्ति योजना है, जो छूट-छूट-छूट श्रेणी के तहत कर मुक्त है। उन्हें निवेश पर कर कटौती का लाभ मिलता है और संचय करने या निकासी दोनों में किसी पर भी कर नहीं लगता है। पॉजिटिव वाइब्स कंसल्टिंग ऐंड एडवाइजरी में पार्टनर और सलाहकार मल्हार मजूमदार कहते हैं, 'अगर खुद के रोजगार वाला कोई व्यक्ति शेयरों के उतार-चढ़ाव को झेल सकता हो तो उसके लिए लंबी अवधि में पीपीएफ के बजाय एनपीएस में निवेश करना अधिक समझदारी होगी। जो लोग सरकार की कम लागत वाली सेवानिवृत्ति योजनाओं में निवेश करना चाहते हैं, उनके लिए एनपीएस बढिय़ा विकल्प है।'

एनपीएस से बेहतर प्रतिफल संभव
एनपीएस में निवेश के कई विकल्प दिए जाते हैं। कोई भी निवेशक इक्विटी, कॉर्पोरेट बॉन्ड और सरकारी प्रतिभूतियों के मिश्रण का विकल्प चुन सकता है। शेयरों में अधिक आवंटन की संभावनाओं के कारण एनपीएस दूसरी सरकारी सेवानिवृत्ति योजनाओं के मुकाबले अधिक प्रतिफल दे सकता है। एक ऐसे व्यक्ति के उदाहरण पर विचार करें जो अपने कामकाजी जीवन में डेट और इक्विटी में 50:50 अनुपात में रकम रखता है। उसे पीपीएफ से अधिक बेहतर प्रतिफल मिल सकता है। एननपीएस में जितनी अवधि तक वह निवेश करता है, उसे उतना ही बेहतर प्रतिफल मिलता है। 50 साल का कोई व्यक्ति, जिसका एनपीएस 60 साल की उम्र में परिपक्व होता है, वह अपने फंड के प्रदर्शन के आधार पर पीपीएफ के मुकाबले 4 से 21 प्रतिशत के बीच अधिक प्रतिफल अर्जित कर सकता है। 35 साल का कोई व्यक्ति, जिसके एनपीएस के परिपक्व होने में 25 साल का समय है, वह पीपीएफ के मुकाबले 14 से 79 प्रतिशत तक अधिक प्रतिफल अर्जित कर सकता है।
 
रणनीति में बदलाव
स्व-रोजगार वाले व्यक्ति के लिए एनपीएस में रकम लगाना इस बात पर निर्भर करता है कि वह पीपीएफ में कितने समय से निवेश कर रहा है और उसने कितनी रकम जमा कर ली है। अगर आपने पीपीएफ में 10 से 15 लाख का कोष बना लिया है तो निवेश सलाहकारों की राय में पीपीएफ में निवेश जारी रखने में ही समझदारी है। प्रमाणित वित्तीय योजनाकार अर्णव पंड्या कहते हैं, 'एक बार खासी रकम जमा होने के बाद उसे लंबी अवधि में जमा के ब्याज पर ब्याज का फायदा मिलता है। इससे उसका कोष बढ़ता जाता है। जिस व्यक्ति ने अपने कामकाजी जीवन में ज्यादातर रकम पीपीएफ में ही निवेश की है, उसे ब्याज दरें कम होने के बावजूद इसमें निवेश बनाए रखना चाहिए। हालांकि ऐसे लोगों को हर महीने कम से कम 50,000 रुपये एनपीएस में डालना चाहिए, क्योंकि इसमें उनको अतिरिक्त कर छूट का लाभ मिलता है।'

50 साल से अधिक उम्र के स्व-रोजगार वाले व्यक्ति को भी यही रणनीति अपनानी चाहिए और पीपीएफ के साथ बने रहना चाहिए क्योंकि शेयरों में उतार-चढ़ाव होता है और इनसे आकर्षक प्रतिफल हासिल करने के लिए लंबे समय तक निवेश रखना होता है। लेकिन अगर आपके पीपीएफ में बड़ी रकम जमा नहीं है तो पीपीएफ में सालाना 12,000 से 24,000 रुपये डालते हुए एनपीएस की तरफ रुख कर सकते हैं। पीपीएफ को सक्रिय रखने और मौजूदा रकम पर ब्याज पाने के लिए आपको इसमें निवेश जारी रखना होता है। कुछ वित्तीय योजनाकारों के अनुसार एनपीएस में निवेश से पहले किसी व्यक्ति को अपनी जोखिम क्षमता पर जरूर गौर करना चाहिए। अगर किसी व्यक्ति में उतार-चढ़ाव झेलने की क्षमता नहीं है तो उसे एनपीएस से दूर ही रहना चाहिए। 

इंटरनैशनल मनी मैटर्स में संस्थापक और मुख्य कार्याधिकारी लवी नवलखी का कहना है, 'इक्विटी ही नहीं बल्कि एनपीएस में डेट निवेश के साथ भी अनिश्चितता हो सकती है और कुछ अवधि में उसमें पीपीएफ से भी कम रिटर्न मिल सकता है।' उदाहरण के लिए हाल में सरकारी प्रतिभूतियों पर प्राप्तियां अधिक हो गईं, इसलिए बॉन्ड की कीमतें कम गिरने लगीं। एनपीएस की श्रेणी-1 में जहां सरकारी प्रतिभूतियों पर रिटर्न 8.71 प्रतिशत से अधिक है, वहीं एक साल का प्रतिफल 0.53 से 2.5 प्रतिशत के बीच है। 

एन्युइटी और कर से न घबराएं
एनपीएस के सदस्य के लिए रिटायरमेंट या 60 साल का होने पर अपने जमा कोष से 40 प्रतिशत की एन्युइटी खरीदना अनिवार्य है। उदाहरण के लिए अगर आप 1 करोड़ रुपये जमा करते हैं तो आप अधिकतम 60 लाख रुपये ही निकाल सकते हैं। अगर आप कोष से 60 प्रतिशत रकम निकालते हैं तो 20 प्रतिशत रकम पर कर लगेगा। ऊपर दिए उदाहरण में 12 लाख रुपये पर कर लगेगा। लैडर7 फाइनैंशियल एडवाइजर्स के संस्थापक सुरेश सद्गोपन कहते हैं, 'अनिवार्य एन्युइटी और 20 प्रतिशत कोष पर कर (निकासी पर) के बावजूद एनपीएस आकर्षक है।' ज्यादातर वित्तीय योजनाकारों का कहना है कि एनपीएस काफी अरसे से है और यह लगातार बेहतर हो रहा है। निवेशक आगे चलकर इसमें अधिक खूबियों और एन्युइटी योजनाओं की उम्मीद कर सकते हैं। 
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