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मझोले और भारी वाणिज्यिक वाहनों से मजबूत हो रही अशोक लीलैंड

राम प्रसाद साहू |  Jan 21, 2018 09:06 PM IST

हाल के महीनों में कारोबार में मजबूत बढ़ोतरी और मॉडलों में विविधता में सुधार के कारण विश्लेषकों ने अशोक लीलैंड के कारोबार, राजस्व और मुनाफे के अनुमान में सुधार किया है। ऊंची वृद्धि वाले मझोले और भारी वाणिज्यिक वाहन (एमऐंड एचसीवी) खंड में उपस्थिति रखने वाली कंपनी को इसलिए भी ज्यादा फायदा होना चाहिए क्योंकि ग्राहकों की प्राथमिकता अब अधिक मुनाफा देने और ज्यादा वजन ढोने वाले वाणिज्यिक वाहनों (सीवी) के प्रति बढ़ रही है। कंपनी के मौजूदा प्रदर्शन को देखते हुए निवेशक दो साल के लिए यह शेयर खरीद सकते हैं। इस समय शेयर वित्त वर्ष 2019 के अनुमानों के 18 गुना स्तर पर कारोबार कर रहा है। 

कारोबार चढ़ा, हिस्सेदारी बढ़ी 
नवंबर के व्यापार में 60 प्रतिशत तेजी के बाद दिसंबर में कंपनी का एमऐंडएचसीवी कारोबार सालाना आधार पर 79 प्रतिशत बढ़ा। इससे कंपनी के शेयर के प्रति उत्साह जगा। हाल के प्रदर्शन और दिसंबर 2017 में कारोबार में 56 प्रतिशत इजाफे के मद्देनजर नोमूरा के विश्लेषकों ने वित्त वर्ष 2018 में अशोक लीलैंड के लिए कारोबार वृद्धि का अनुमान 5 प्रतिशत से बढ़ाकर 18 प्रतिशत कर दिया है। हालांकि पिछले साल के कम आधार से हाल के दो महीनों के दौरान इस क्षेत्र के कारोबार को मदद जरूर मिली है, लेकिन विश्लेषकों का मानना है कि इस तेजी का प्रमुख कारण कई राज्यों में ट्रकों में क्षमता से अधिक वजन ढोने पर पाबंदी लगना और ट्रक केबिन कोड 1 जनवरी 2018 से प्रभावी होने से पहले नए ट्रकों की खरीद बढऩा है। 

इस मजबूत प्रदर्शन की वजह से कंपनी को एमऐंडएचसीवी और हल्के वाणिज्यिक वाहन खंड (एलसीवी) में दिसंबर तिमाही में जबरदस्त होड़ के बावजूद क्रमागत आधार पर बाजार हिस्सेदारी में क्रमश: 26 प्रतिशत और 69 आधार अंक का इजाफा करने में मदद मिली है। हालांकि विश्लेषकों का मानना है कि एमऐंडएचसीवी और एलसीवी में कंपनी की बाजार हिस्सेदारी क्रमश: 32 प्रतिशत और 8 प्रतिशत पर स्थिर हो सकती है क्योंकि टाटा मोटर्स भी कारोबार वृद्घि पर ध्यान दे रही है। एमऐंडएचसीवी जहां कंपनी मजबूत है, वहीं एलसीवी खंड में वह छोटी खिलाड़ी है। इस खंड में टाटा मोटर्स और महिंद्रा ऐंड महिंद्रा का दबदबा है और इन दोनों खंडों में दोनों कंपनियों की 41-42 प्रतिशत बाजार हिस्सेदारी है। वित्त वर्ष 2018 में अधिक कारोबार सकारात्मक है। बाजार का मानना है कि कारोबार में 15 प्रतिशत वृद्धि के साथ यह रुझान वित्त वर्ष 2019 में भी जारी रहेगा। वित्त वर्ष 2020 से पहले बीएस-6 मानक लागू होने से पहले किसी भी तरह की खरीदारी से वाणिज्यिक वाहन निर्माताओं को लाभ होगा। अशोक लीलैंड ने हाल में ही जापान की हिनो मोटर्स के साथ समझौता किया है। इससे कंपनी को हीनो की तकनीक का इस्तेमाल कर बीएस-6 मानकों के अनुकूल डीजल इंजन बनाने में मदद मिलेगी। 

मांग के कई कारण
विश्लेषकों का मानना है कि सड़क मार्ग से माल ढुलाई में तेजी, कई राज्यों में क्षमता से अधिक वजन ढोने पर कड़ी पाबंदी (पहले यह पाबंदी राजस्थान और उत्तर प्रदेश में ही थी) लगने, ढांचागत परियोजनाओं पर सरकार के अधिक जोर और ई-वे बिल (वस्तु एवं सेवा कर से जुड़ा) लागू होने से मोटे तौर पर एमऐंडएचसीवी के लिए अच्छे हालात बने हैं। इक्रा के वरिष्ठï समूह उपाध्यक्ष (कॉर्पोरेट रेटिंग्स) सुब्रत रे ने कहा कि क्षमता से अधिक वजन ढोने पर कड़ी पाबंदी के अलावा निर्माण एवं खनन क्षेत्रों से टिपर की मांग और वाहन जैसे उद्योग क्षेत्र से ट्रैक्टर-ट्रेलरों की अधिक मांग, कंटेनरों की आवाजाही और इस्पात से भारी ट्रकों का कारोबार उद्योग के मुकाबले बेहतर रह सकता है। रे ने कहा कि दूसरे खंडों की तरह ही एचसीवी का मार्जिन अधिक होता है। इसका कंपनी के मुनाफे पर सकारात्मक असर होगा क्योंकि अधिक वजन ढोने वाले वाहनों का हिस्सा मौजूदा वित्त वर्ष में 55 प्रतिशत पहुंच चुका है, जो वित्त वर्ष 2017 में 45 प्रतिशत था। वित्त वर्ष 2013 से 17 के दौरान अशोक लीलैंड ने अपना परिचालन मार्जिन 410 आधार अंक बढ़ाया है और अगले दो सालों के दौरान मजबूत कारोबार और मॉडलों में विविधता के कारण इसमें 100 आधार अंक का और इजाफा हो सकता है। 

निर्यात (राजस्व में इस समय 10 प्रतिशत योगदान) से भी आशोक लीलैंड का राजस्व और मार्जिन बढ़ सकता है। साथ ही रक्षा क्षेत्र को वाहनों की बिक्री से भी इसे लाभ मिलने की उम्मीद है। अधिक मुनाफा देने वाले अफ्रीकी क्षेत्र में बिक्री बढऩे से प्राप्तियां बढऩे की उम्मीद है। रक्षा क्षेत्र से नए ठेके भी कंपनी की स्थिति मजबूत कर सकते हैं। इस खंड में कंपनी सशस्त्र और ट्रैक्ड व्हीकल्स पर ध्यान केंद्रित कर रही है।  

जोखिम भी मौजूद
हालांकि कुछ जोखिम भी हैं, जिनका निवेशकों को ध्यान रखना चाहिए। पहली बात तो यह कि इस समय वाणिज्यिक वाहनों पर भारी छूट मिल रही है। इससे अशोक लीलैंड का मुनाफा तीसरी तिमाही में प्रभावित हुआ है। हालांकि मोटे तौर पर 10 प्रतिशत की छूट दी जा रही है, लेकिन विश्लेषकों का मानना है कि ऊंची मांग और उपयोगिता के कारण कंपनी को स्थिति बेहतर बनाने में मदद मिलनी चाहिए।
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