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कृषि कंपनियों का मुनाफा बना रहेगा जोरदार!

दिलीप कुमार झा |  Jan 21, 2018 09:10 PM IST

रबी सीजन के दौरान बीज, कृषि-रसायन और उर्वरक की बढ़ती मांग के कारण कृषि संबंधी सामान की कंपनियां दिसंबर तिमाही में बेहतर मुनाफा दर्ज करने की तैयारी में हैं। वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में यही रुख जारी रहने के आसार हैं। इन कंपनियों की कुल बिक्री और शुद्ध आय से मुनाफे में जोरदार वृद्धि की उम्मीद है। वस्तु और सेवा कर लागू होने और मॉनसून की बारिश में विलंब की अवधि में स्टॉक की पुनर्खरीद से वर्ष की पहली छमाही पर असर पड़ा था।

12 जनवरी को रबी की बुआई पिछले साल के 6.151 करोड़ हेक्टेयर की तुलना में कुछ कम 6.095 करोड़ हेक्टेयर थी, लेकिन फिर भी पिछले साल देर से हुई मॉनसूनी बारिश की वजह से मिट्टïी में पर्याप्त नमी और जलाशयों में ऊंचे जल स्तर के कारण यह संतोषजनक रही। एचडीएफसी सिक्योरिटीज के विश्लेषक बसंत पाटिल ने कहा कि न्यूनतम समर्थन मूल्य में वृद्धि से कृषि आय बेहतर रहेगी और कृषि-रसायन पर व्यय को प्रोत्साहित करेगी। वैश्विक कृषि जिंस के दामों में सुधार से निर्यात में भी तेजी आने के आसार हैं।

पीआई इंडस्ट्रीज, धानुका एग्रीटेक, रैलीज, यूनाइटेड फास्फोरस और इन्सेक्टिसाइड्स इंडिया जैसी कंपनियों की कुल बिक्री में दिसंबर तिमाही में 10-12 प्रतिशत की वृद्धि और मार्च तिमाही में कुछ कम वृद्धि होने की संभावना है। इनमें से इन्सेक्टिसाइड्स इंडिया और धानुका एग्रीटेक से बढिय़ा इजाफे की उम्मीद है। सितंबर तिमाही में एक हफ्ते की कमजोर खरीद के बाद दिसंबर में मांग ने जोर पकड़ लिया। कमजोर स्टॉक, मिट्टी में अधिक नमी और दक्षिण भारत में जलाशय स्तर में सुधार के कारण मांग में तेजी आई।

देसी उर्वरकों की बिक्री में तीव्र वृद्धि की वजह से दिसंबर तिमाही में उद्योग की संयुक्त बिक्री में सालाना 12-14 प्रतिशत वृद्धि होने की उम्मीद है। अधिक आयात से यूरिया की बिक्री में सालाना 8-10 प्रतिशत तक वृद्धि होने की उम्मीद है। सरकार का अनुमान है कि वर्ष 2017-18 में कुल कृषि उत्पादन 27.568 करोड़ टन रहेगा, जो पिछले वर्ष के समान है और 27.455 करोड़ टन से कुछ अधिक है।

यूरिया और डाई-अमोनियम फॉस्फेट जैसे उर्वरकों के दाम वैश्विक रूप से बढ़ रहे हैं, जबकि पिछली तिमाही के दौरान पोटाश लवण के दाम स्थिर रहे हैं। फॉस्फोरिक अम्ल, अमोनिया और प्राकृतिक गैस जैसे प्रमुख कच्चे माल की कीमतों में भी मजबूती आनी शुरू हो गई है। जब तक सरकार सब्सिडी नहीं बढ़ाती या कंपनियों को दाम बढ़ाने के अनुमति नहीं देती, तब तक कंपनियों के मुनाफे पर दबाव रहने की संभावना है।
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