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सेंसेक्स 36,000 के पार आप कितने तैयार!

जयदीप घोष और संजय कुमार सिंह |  Jan 28, 2018 09:36 PM IST

बीएसई का सेंसेक्स 36,000 के आंकड़े को पार कर चुका है। बाजार लगातार नई ऊंचाइयों की ओर अग्रसर है। निवेशकों के लिए शायद ही पहले ऐसा शानदार मौका आया हो। लेकिन इस तेजी के बीच निवेशकों के लिए यह अधिक सतर्क रहने और बाजार पर नजर बनाए रखने का भी समय है। यही वजह है कि ज्यादातर विश्लेषक बाजार के तेजी को लेकर सतर्क हैं। 

 
कर लें थोड़ी मुनाफावसूली 
 
निवेश विश्लेषकों की यह पहली सलाह है। इंडियाबुल्स ऐसेट मैनेजमेंट में समूह कार्यकारी प्रमुख और मुख्य कार्याधिकारी अक्षय गुप्ता कहते हैं, 'बाजार के इन स्तर पर जिन निवेशकों ने कुछ मुनाफा (0-50 प्रतिशत) कमा लिया है, उन्हें पोर्टफोलियो पोजीशन बरकरार रखनी चाहिए और निवेश बनाए रखना चाहिए। बढ़ी हुई रकम हर महीने सिर्फ एसआईपी के जरिये निवेश की जानी चाहिए। जिन निवेशकों को अच्छा मुनाफा (50 प्रतिशत से अधिक) हो चुका है, उनको सुझाव है कि वे कुछ मुनाफावसूली कर लें और नए पोर्टफोलियो के लिए गिरावट का इंतजार करना चाहिए।' क्रिस सिक्योरिटीज के निदेशक अरुण केजरीवाल भी गुप्ता के सुझाव से सहमत हैं। वह कहते हैं कि मौजूदा निवेशक कुछ मुनाफावसूली कर सकते हैं और अपने पास नकदी रख सकते हैं। वह कहते हैं, 'मौजूदा हालात में यह अच्छी रणनीति साबित हो सकती है।'
 
आएंगे मौके 
 
ज्यादातर निवेश विशेषज्ञों का मानना है कि इस साल बड़ा उतार-चढ़ाव देखा जा सकता है। लिहाजा, वैल्यू तलाश करने वाले निवेशकों के लिए पर्याप्त मौके मौजूद होंगे। केजरीवाल कहते हैं, 'बाजार में गिरावट आएगी, और जब ऐसा हो तो बाजार में थोड़ा-थोड़ा निवेश करें।' उनका सुझाव है कि निवेशकों को एवरेजिंग प्रणाली का इस्तेमाल करना चाहिए। यानी अगर आपने 10 लाख रुपये की मुनाफावसूली कर ली है तो हर गिरावट पर आप 100,000 रुपये का निवेश कर सकते हैं जिससे कि यदि और अधिक गिरावट आए तो पहले से कमाए गए मुनाफे को एक ही झटके में न गंवा दें। दरअसल, आप अगली गिरावट में अधिक रकम निवेश कर सकते हैं।  जोखिम उठाने में सक्षम निवेशकों के लिए केजरीवाल का सुझाव है कि कुछ रकम आगामी आईपीओ में लगाई जा सकती है, क्योंकि तुरंत मुनाफे के लिए यह एक अच्छा विकल्प साबित हो सकता है।  वह कहते हैं, 'हालांकि अच्छे बाजार हालात का मतलब है कि आईपीओ महंगा होगा। इससे उन लोगों के लिए इस विकल्प से अच्छी कमाई का भी अवसर मिलेगा जो अच्छा मुनाफा कमा चुके हैं।'
 
गलतियों से बचें
 
तेजी के ऐसे बाजार में निवेशक सबसे बड़ी गलती यह करते हैं कि वे निवेश में विविधता पर ध्यान नहीं देते। शेयरों में पहली बार निवेश करने वालों को वर्ष 2017 के इक्विटी बाजारों के शानदार प्रतिफल से प्रभावित नहीं होना चाहिए। अगर आप पिछले साल शानदार प्रदर्शन करने वाली परिसंपत्तियों के बारे में ही सोचेंगे तो अगले साल आपको निराशा हाथ लग सकती है। सेबी के साथ पंजीकृत ऑनलाइन म्युचुअल फंड सलाहकार क्लियरफंड्ïस के संस्थापक एवं मुख्य कार्याधिकारी कुणाल बजाज कहते हैं, 'अगर आप पिछले साल अच्छा प्रदर्शन करने वाली परिसंपत्तयिां ही खरीदते हैं तो फिर आपको 2010 के शुरू में भारी मात्रा में शेयर, 2012 के शुरू में सोने और 2016 के शुरू में बॉन्ड प्रतिफल ही खरीदा होता। पूर्ववर्ती वर्ष में शानदार प्रदर्शन के बावजूद इन सभी परिसंपत्ति वर्गों ने उससे अगले साल निराशाजनक प्रतिफल दिया।'
 
उनके अनुसार दिसंबर 2017 के अंत में मिड-कैप फंडों के प्रबंधन के अधीन औसत परिसंपत्तियां (एयूएम) 2938 करोड़ रुपये पर थीं। लार्ज-कैप फंडों की औसत एयूएम मौजूदा समय में थोड़ी कम यानी 2396 करोड़ रुपये पर है। आज एक औसत मिड-कैप फंड किसी औसत लार्ज-कैप फंड के मुकाबले 23 प्रतिशत बड़ा है। हमेशा ऐसा नहीं रहा है। दिसंबर 2013 के अंत में मिड-कैप फंडों का औसत आकार 509 करोड़ रुपये थी जबकि लार्ज-कैप फंड का औसत आकार 694 करोड़ रुपये था। दूसरे शब्दों में कहें तो मिड-कैप फंड का औसत आकार किसी औसत लार्ज-कैप फंड की तुलना में लगभग 36 प्रतिशत कम था। बजाज कहते हैं, 'इससे आपको पता चलता है कि पिछले साल के प्रदर्शन को देखते हुए काफी रकम मिड और स्मॉल-कैप फंडों में जा रही है।'
 
नए निवेशकों को मौजूदा ऊंची कीमतों पर ज्यादा रकम नहीं लगानी चाहिए। इसके बजाय उन्हें थोड़ा-थोड़ा करके निवेश करना चाहिए। इक्विटी रिसर्च कंपनी स्टालवर्ट एडवाइजर्स के संस्थापक एवं मुख्य कार्याधिकारी जतिन खेमानी कहते हैं, 'निवेशकों को ज्यादा लालच नहीं करना चाहिए और उन शेयरों में निवेश नहीं करना चाहिए जो बहुत तेजी सेे बढ़ते और हर दिन सर्किट पार करते हों, खासकर स्मॉल-कैप और माइक्रो-कैप शेयर। उन शेयरों के बुनियादी आधार को भी नजरअंदाज न करें जिनमें आपने निवेश करते हों और जिनकी तेजी पर आपकी नजर रहती है।  आपने जिस कंपनी में निवेश कर रहे हों, पहले उसे अच्छी तरह से समझें और बहुत ज्यादा महंगे शेयरों पर दांव लगाने से परहेज करें। बाजार से उचित प्रतिफल की ही उम्मीद रखें क्योंकि यह काफी बढ़ चुका है। आखिरकार निवेश धीरे धीरे करें और लंबी अवधि के लिए करें।' 
 
विश्लेषकों के अनुसार इस समय बाजार में प्रवेश कर रहे सभी निवेशकों को दीर्घावधि नजरिया अपनाना चाहिए और म्युचुअल फंडों के जरिए निवेश को प्राथमिकता देनी चाहिए या फिर जिस शेयर में निवेश करें. उस कंपनी का अच्छी तरह से विश्लेषण कर लेना चाहिए। गुप्ता कहते हैं, 'शेयर बाजार महंगे हैं और निश्चित ही सतर्कता बेहद जरूरी है।' 
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