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टीसीएस में निवेश के लिए करें इंतजार

राम प्रसाद साहू |  Jan 28, 2018 09:38 PM IST

टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) के शेयर में आई शानदार तेजी की वजह से इसका बाजार पूंजीकरण 6 लाख करोड़ रुपये के आंकड़े के पास है। कंपनी का शेयर पिछले साल फरवरी के अपने 52 सप्ताह के निचले स्तर की तुलना में 46 फीसदी बढ़ा है। इसमें से 50 प्रतिशत तेजी पिछले महीने के दौरान दर्ज की गई और खासकर दिसंबर तिमाही के परिणाम के बाद इस शेयर में अच्छी मजबूती देखी गई है। हालांकि तेज कीमत वृद्घि का मतलब है कि यह शेयर अपनी वित्त वर्ष 2020 की अनुमानित आय के 20 गुना के महंगे मूल्यांकन पर कारोबार कर रहा है। इसका मूल्यांकन ब्रोकरों के कीमत लक्ष्य के मुकाबले भी 10-14 प्रतिशत महंगा है। दूसरी तरफ, कंपनी के लिए बुनियादी आधार भी ज्यादा अनुकूल नहीं है।

कोटक इंस्टीट्ïयूशनल इक्विटीज के विश्लेषकों का कहना है कि यह शेयर व्यवसाय में संभावित चक्रीय तेजी के बाद पूरे मूल्यांकन पर कारोबार कर रहा है। शेयर पीक-साइकल मल्टीपल पर पहले ही पहुंच चुका है जिसका मतलब है अगले 7-8 वर्षों में लगभग 12 फीसदी की सालाना वृद्घि।
 
हालांकि दिसंबर तिमाही के नतीजों के बाद बाजार का उत्साह टीसीएस और अन्य प्रतिस्पर्धियों, दोनों के परिदृश्य पर सकारात्मक प्रतिक्रिया, समझौतों में सकारात्मक रुझान और अधिक वृद्घि वाले डिजिटल सेगमेंट में मजबूत वृद्घि पर आधारित है। इसके अलावा इन मूल्यांकनों के लिए तीन जोखिम हैं। पहला है बैंकिंग वित्तीय सेवा एवं बीमा (बीएफएसआई) में कमजोरी। रिटेल वर्टिकल के अलावा, बीएफएसआई हाल की तिमाहियों में भारतीय आईटी सेवाओं के लिए अन्य प्रमुख चुनौती रहा है। हालांकि टीसीएस के लिए रिटेल व्यवसाय तिमाही में 6 फीसदी की तेजी को देखते हुए दबाव से बाहर होता दिख रहा है, लेकिन कुल राजस्व में एक-तिहाई से अधिक की भागीदारी वाला सबसे बड़ा वर्टिकल बीएफएसआई लगातार समस्याओं से जूझ रहा है।
 
बीएफएसआई वर्टिकल ने 1.7 प्रतिशत की राजस्व गिरावट दर्ज की। एचएसबीसी के विश्लेषकों का कहना है कि कंपनी बीएफएसआई स्पेस के लिए परिदृश्य को लेकर अनिश्चित बनी हुई है जिसका मतलब होगा कि टीसीएस के लिए वृद्घि 6-8 फीसदी के दायरे में सीमित बनी रहेगी।  हालांकि कुछ बीएफएसआई कंपनियों ने अपना आईटी खर्च बजट अभी तय नहीं किया है जो कुछ ग्राहकों द्वारा आईटी परियोजनाओं के घरेलू तौर पर क्रियान्वयन के रुझान से भी नकारात्मक है। इस बदलाव से मौजूदा परियोजनाओं के बजट में कमी को बढ़ावा मिला है और इससे आगामी परियोजनाएं भी प्रभावित हो सकती हैं और इसलिए यह टीसीएस जैसी भारतीय आईटी कंपनियों के लिए शुभ संकेत नहीं है। 
 
अन्य नकारात्मक बदलाव नई अमेरिकी कर व्यवस्था के तहत अतिरिक्त कर बोझ है। विश्लेषकों का मानना है कि विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका में बेस इरोजियन ऐंड एंटी-एब्यूज टैक्स (बीईएटी) के क्रियान्वयन के परिणामस्वरूप कर दरों में एक फीसदी की वृद्घि देखी जा सकती है।  कुला मिलाकर, जिस वजह से समस्या और ज्यादा जटिल हुई है, वह है डॉलर के मुकाबले रुपये में तेजी आना, जिससे राजस्व प्रभावित होगा। कुछ विश्लेषक पूर्व के 65 रुपये की तुलना में अपने अनुमानों में डॉलर के मुकाबले रुपये की कीमत 64 रुपये पर अनुमानित कर रहे हैं। गुरुवार को डॉलर की तुलना में रुपया 63.545 पर बंद हुआ। क्रेडिट सुइस के विश्लेषकों का मानना है कि हालांकि टीसीएस का मार्जिन स्थिर रहा है, लेकिन उसका वित्त वर्ष 2018 का मार्जिन 26-28 फीसदी के लक्षित दायरे से कम रह सकता है। इसकी एक मुख्य वजह विपरीत मौद्रिक उतार-चढ़ाव भी है। 
 
हालांकि तीसरी तिमाही में बीएफएसआई को छोड़कर सभी वर्टिकल में दर्ज की गई मजबूत वृद्घि सकारात्मक है और डिजिटल सेवाओं (कुल राजस्व का 22 प्रतिशत) में तिमाही आधार पर 14 प्रतिशत की राजस्व वृद्घि से कुल राजस्व को मदद मिलनी चाहिए, लेकिन अल्पावधि समस्याओं को देखते हुए निवेशकों को मौजूदा तेजी पर दांव लगाने के बजाय सतर्कता बरतनी चाहिए। 
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