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टाटा मोटर्स: उतर रहे विदेशी निवेशक

शैली सेठ मोहिले |  Jan 28, 2018 09:38 PM IST

आर्थिक हालात से जुड़ी बाधाओं के बीच गिरती बिक्री और ब्रिटेन में सहायक इकाई जगुआर लैंड रोवर ऑटोमोटिव में विदेशी मुद्रा विनिमय दरों में उतार-चढ़ाव से निवेशकों का उत्साह प्रभावित हो रहा है। इससे विदेशी निवेशकों के लिए टाटा मोटर्स बहुत आकर्षक नहीं रह गया है। टाटा मोटर्स में विदेशी संस्थानों (विदेशी संस्थागत निवेशकों एवं अमेरिकी डिपॉजिटरी रिसीट सहित) की हिस्सेदारी दिसंबर तिमाही में आठ तिमाहियों के निचले स्तर 37.7 प्रतिशत पर आ गई। 2015-16 में यह हिस्सेदारी 39.9 प्रतिशत थी। पिछली 26 तिमाहियों के विश्लेषण से पता चलता है कि एफआईआई की हिस्सेदारी 10 तिमाहियों के निचले स्तर 21.9 प्रतिशत पर आ गई। 

 
नए मॉडलों से कारोबार को मजबूती मिलने की उम्मीद जरूर है, लेकिन विश्लेषकों को कंपनी ऊंचे मार्जिन और शानदार कारोबार के दौर में लौटती नजर नहीं आ रही है। उन्हें लघु एवं दीर्घ अवधियों में शेयर का प्रदर्शन कमजोर रहने की आशंका है। एसबीआईकैप सिक्योरिटीज के खुदरा शोध प्रमुख महंतेश सबराड कहते हैं, 'टाटा मोटर्स ज्यादातर विश्लेषकों की पसंदीदा कंपनियों की सूची से बाहर हो गई है।' फिलिप कैपिटल इंडिया में विश्लेषक नितेश शर्मा ने कहा कि उन्होंने शेयर को लेकर तटस्थ रवैया अपना रखा है। शर्मा ने कहा कि शेयर मूल्यांकन के लिहाज से प्रतिस्पद्र्धी हो सकता है, लेकिन संभावनाएं मजबूत नहीं लग रही हैं।
 
शर्मा ने कहा कि बिक्री कमजोर होने और इलेक्ट्रिक वाहनों से मिल रही चुनौतियों के अलावा एफआईआई विदेशी मुद्रा विनिमय में आने वाले उतार-चढ़ाव के कारण बाहर निकल रहे हैं। डॉलर के मुकाबले पौंड में तेजी से गिरावट आ रही है। शर्मा ने कहा कि टाटा मोटर्स के लिए यह स्थिति नकारात्मक है, क्योंकि वे डॉलर में शुद्ध निर्यातक हैं। उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रिक वाहन भी जेएलआर का कारोबार प्रभावित करेंगे। शर्मा ने कहा, 'अन्य तीन जर्मनी की महंगी कार निर्माता कंपनियों की तरह जेएलआर का बहीखाता मजबूत नहीं है।' 
 
जब से टाटा मोटर्स ने जेएलआर का अधिग्रहण (जून 2008 में) किया है तब से नए मॉडलों में लगातार निवेश और बढ़ती भौगोलिक, खासकर चीन जैसे तेजी उभरते बाजारों में उपस्थिति से इस ब्रिटेन की वाहन निर्माता की बिक्री की रफ्तार बरकरार रही है। 2016-17 में बिक्री लगभग 6 गुना बढ़कर 600,806 यूनिट हो गई, जो 2008-09 में 167,348 थी। हालांकि जेएलआर के लिए बाद में चीजें अच्छी नहीं रही हैं। यूरोप और अमेरिका सहित इसके कई बाजार वृहद आर्थिक अनश्ििचतताओं से जूझ रहे हैं। पूर्ण रूप से बिक्री जरूर बढ़ी है, लेकिन इसकी रफ्तार कम होती जा रही है।
 
दिसंबर तिमाही इसका एक उदहारण है, जो पिछले तीन साल में पहली बार धीमी चाल का संकेत दे रही है। टाटा मोटर्स की ब्रिटिश इकाई ने दुनियाभर के ग्राहकों को 154,447 वाहनों की बिक्री की, जबकि एक साल पहले की समान अवधि में यह आंकड़ा 154,450 रहा था। इसके अलावा टाटा की इकाई बनने के बाद 9 सालों में पहली बार इसने जगुआर एक्सई सिडैन और रेंज रोवर इवोक की बिक्री में गिरावट दर्ज की है। हालांकि गिरावट मामूली रही है। इससे पहले 2013-14 की दिसंबर तिमाही में इन दोनों ब्रांडों की बिक्री कम हुई थी। 
 
जेएलआर के एक प्रवक्ता ने कहा, 'हमें यह कहने में गुरेज नहीं है कि कुछ दूसरे प्रमुख बाजारों में अनिश्चितता से हमारे कारोबार पर असर पड़ा है। ब्रिटेन में डीजल की हालत ठीक नहीं है और इससे इस क्षेत्र में वाहन उद्योग के लिए डीजल वाहनों की बिक्री सालाना आधार पर 30 प्रतिशत कम रही है।' इस वित्त वर्ष अब तक ज्यादातर बाजारों में जेएलआर दबाव में रहा है। चीन एकमात्र अपवाद रहा है, जहां इसका कारोबार 23 प्रतिशत बढ़ा है। अमेरिका में आपूर्ति जरूर 56 गुना बढ़ी है, लेकिन प्रायद्वीपीय यूरोप और ब्रिटेन में बिक्री में क्रमश: 2 प्रतिशत और 9 प्रतिशत की कमी आई है। चीन मुनाफे एवं बिक्री के लिहाज से जेएलआर के लिए एक प्रमुख बाजार रहा है, जहां यह चेरी ऑटोमोबाइल्स के साथ संयुक्त उद्यम के तहत 10 में 8 मॉडलों की बिक्री करता है। विश्लेषकों को लगता है कि बढ़ती प्रतिस्पद्र्धा, अधिक छूट और लैंड रोवर मॉडलों पर अधिक निर्भरता से चीन में बिक्री प्रभावित हो सकती है। एसबीआईकैप के सबराड ने कहा, 'चीन में छूट के साथ बिक्री चल रही है। जगुआर वहां अच्छा नहीं कर रहा है।' उन्होंने कहा कि कभी तेजी से बढऩे वाली अमेरिकी में बिक्री की रफ्तार अब धीमी पड़ गई है।
 
हालांकि जेलएलआर के प्रवक्ता इन आशंकाओं को सही नहीं मातने हैं। उन्होंने कहा, 'चीन में हमें मजबूत कारोबार जारी रहने की उम्मीद है। जगुआर ई-पेस जैसे मॉडलों से मदद मिली। ये मॉडल स्थानीय स्तर पर ही बने होंगे।' अमेरिका में जेएलआर सर्वाधिक तेजी से बढऩे वाला महंगा कार ब्रांड है।
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