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शुद्ध ब्याज आय से मिला मुनाफे को दम

हंसिनी कार्तिक और निकहत हेटावकर |  Jan 28, 2018 09:39 PM IST

लंबे समय से तिमाही नतीजों के बाद नकारात्मक प्रतिक्रिया दिखाने वाले ऐक्सिस बैंक के शेयर ने अब यह सिलसिला तोड़ दिया है। दिसंबर तिमाही में मजबूत नतीजे दर्ज करने के बाद बैंक का शेयर 3.5 प्रतिशत उछल गया। बैंक के तिमाही नतीजे के बारे में ज्यादातर विश्लेषकों ने यही कहा कि आंकड़े उनकी उम्मीदों से बेहतर रहे। प्रमुख कारोबार और परिसंपत्ति गुणवत्ता में सुधार से आलोच्य अवधि में बैंक का प्रदर्शन अच्छा रहा।  शुद्ध ब्याज आय में तेजी से आलोच्य अवधि में बैंक का शुद्ध मुनाफा सालाना आधार पर 25 प्रतिशत बढ़कर 726 करोड़ रुपये रहा। बैंक की शुद्ध ब्याज आय 9 प्रतिशत बढ़कर 4730 करोड़ रुपये हो गई। हालांकि शुद्ध ब्याज मार्जिन (एनआईएम) 3.38 प्रतिशत के साथ थोड़ा कमजोर रहा, जो एक साल पहले 3.43 प्रतिशत था। सितंबर 2017 में एनआईएम 3.45 प्रतिशत रहा था। एनआईएम ऋणों पर प्राप्तियों और कोष पर आई लागत का अंतर होता है। 

 
 तीसरी तिमाही में फंड की लागत कम होकर 5.08 प्रतिशत रह गई, लेकिन कई खाते (ऋण खाते के करीब 43 प्रतिशत) कोष की सीमांत लागत आधारित उधारी दर (एमसीएलआर) प्रणाली में आ गए और मजबूत रेटिंग वाले कॉर्पोरेट खातों (जिनसे बैंकों को अपेक्षाकृत कम मुनाफा होता है) में बढ़ोतरी से तीसरी तिमाही में एनआईएम कमजोर हो गया। हालांकि यह सालाना आधार पर 20 आधार अंक की कमी के दायरे में ही है, जिसका अनुमान बैंक ने वित्त वर्ष के शुरू में लगाया था। बैंक के मुख्य वित्तीय अधिकारी जयराम श्रीधरन ने कहा कि कार्यशील पूंजी के लिए और अधिक कंपनियों के बॉन्ड बाजार के बजाय बैंकिंग माध्यमों का रुख करने से एनआईएम में तेजी आ सकती है। ऋण खाते में सालाना आधार पर 21 प्रतिशत तेजी (ज्यादातर छोटे ग्राहक) से भी आलोच्य अवधि में बैंक  को लाभ हुआ। तीसरी तिमाही के दौरान परिसंपत्ति गुणवत्ता में सुधार सबसे अहम बात रही। कम से कम छह तिमाहियों तक गैर-निष्पादित आस्तियों (एनपीए) में बढ़ोतरी के बाद सकल एनपीए कम होकर 25,000 करोड़ रुपये रह गया, जो दूसरी तिमाही में 27,400 करोड़ रुपये था। इससे सकल एनपीए अनुपात दूसरी तिमाही के 5.9 प्रतिशत से कम होकर 5.3 रह गया। शुद्ध एनपीए अनुपात 2.6 प्रतिशत रहा जो दूसरी तिमाही के 3.1 प्रतिशत से कम है।  
 
पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले सकल एनपीए थोड़ा अधिक रहा, लेकिन श्रीधरन का कहना है कि अब बैंक पर कोई नया बोझ नहीं दिख रहा है। तीन बातों से संकेत मिलता है कि बैंक के लिए बुरे कर्ज का दौर अब खत्म होने के कगार पर है। पहली बात तो यह कि फंसी परिसंपत्तियां क्रमागत आधार पर कम होकर 4430 करोड़ रुपये रह गईं। श्रीधरन ने कहा,'फंसी संपत्तियों के बोझ का सबसे बुरा दौर समाप्त हो चुका है। हम फंसे कर्जों की पहचान के अंतिम चरण और समाधान के शुरुआती चरण में प्रवेश कर रहे हैं।' बैंक ने करीब 4010 करोड़ रुपये कर्ज की वसूली की। सूचना-प्रौद्योगिकी क्षेत्र की एक कंपनी के खाते से बड़ी मात्रा में नकदी वसूली और इस्पात क्षेत्र की एक कंपनी के ऋण की स्थिति सुधरने से ऐक्सिस बैंक ने तीसरी तिमाही के दौरान ऋण वसूली के मोर्चे पर अच्छा प्रदर्शन किया। फंसे कर्जों के लिए प्रावधान भी एक साल पहले के 37,900 करोड़ रुपये से कम होकर 28,100 करोड़ रुपये रह गया। लिहाजा, फंसे ऋणों के लिए प्रावधान कवरेज अनुपात सुधरकर 66 प्रतिशत हो गया। रिलायंस सिक्योरिटीज के आशुतोष मिश्रा कहते हैं, 'ऐक्सिस बैंक की एनपीए में तब्दील होने की आशंका वाली परिसंपत्तियों की मात्रा कम होकर 12 प्रतिशत रह गई है और अब यह ऋण खाते की महज 1.33 प्रतिशत है (मार्च 2016 में यह 6.7 प्रतिशत थीं)। यह इस बात का संकेत है कि बैंक अब फंसे कर्ज की पहचान के आखिरी पड़ाव की ओर बढ़ रहा है। अगली चार से छह तिमाहियों के लिए यह साख लागत अनुमान के लिहाज से राहत भरा है।'
 
बैंक कमजोर रेटिंग प्राप्त 1610 करोड़ रुपये के कर्ज को लेकर सतर्क है। इसी तरह, एनपीए में बदलने की आशंका वाली परिसंपत्तियों का 25 प्रतिशत बिजली क्षेत्र से ताल्लुक रखता है। श्रीधरन का कहना है कि सभी नकारात्मक बातें अभी पूरी तरह सामने नहीं आई हैं और उन्हें इस क्षेत्र से थोड़ी परेशानी का अंदेशा है।  हालांकि तीसरी तिमाही में पूंजी पर्याप्तता अनुपात सुधरकर 17.5 प्रतिशत हो गया, जो राहत देने वाला है। 1160 करोड़ रुपये की रकम जुटाने से बैंक का यह अनुपात सुधरा है।
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