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नियमित आय को बैलेंस्ड फंडों से बचें

संजय कुमार सिंह |  Feb 04, 2018 09:56 PM IST

वित्त वर्ष 2018-19 के बजट में दो अहम फैसले लिए गए हैं, जिनका शेयर और शेयर आधारित फंडों के निवेशकों पर असर पड़ेगा। ये दो फैसले हैं- 10 फीसदी दीर्घावधि पूंजीगत लाभ कर और इन फंडों के लाभांश पर 10 फीसदी कर। इन बदलावों के बाद आपको आगे के निवेश फैसले कर लाभ के आधार पर नहीं बल्कि योजनाओं के खूबियों और खामियों के आधार पर लेने चाहिए। 

 
लंबी अवधि के लिए शेयर अब भी अच्छे 
 
इक्विटी फंडों में दीर्घावधि पूंजीगत लाभ पर 10 फीसदी कर लगाए जाने से अल्पावधि में निवेशकों का रुझान प्रभावित होने के आसार हैं क्योंकि हर कोई कर-मुक्त विकल्पों को पसंद करता है। लेकिन शेयरों में लंबी अवधि की संभावनाएं बरकरार हैं। डीएसपी ब्लैकरॉक म्युचुअल फंड के अध्यक्ष कल्पेन पारेख ने कहा, 'जो निवेशक लंबी ïअवधि में अपनी पूंजी को बढ़ाना चाहते हैं, उनके लिए शेयर अब भी सबसे अच्छी संपत्ति हैं क्योंकि इनमें वृद्धि अधिक है और इन पर कर की दर अब भी अन्य संपत्ति वर्गों के मुकाबले कम है।' 
 
दीर्घावधि पूंजीगत लाभ कर से प्रतिफल पर मामूली असर पड़ेगा। अगर कोई निवेशक किसी लार्ज-कैप फंड में पिछले 15 साल से हर महीने 1,000 रुपये का निवेश कर रहा है तो इसका मतलब है कि वह कुल 1,80,000 रुपये का निवेश कर चुका है। उसका निवेश 2017 के अंत तक बढ़कर 6,08,085 रुपये (श्रेणी के औसत प्रतिफल के आधार पर) हो गया है यानी यह 3.38 गुना हो गया है। अगर दीर्घावधि पूंजीगत लाभ कर होता तो उसका प्रतिफल घटकर 3.15 गुना हो जाता।  सेबी में पंजीकृत एक ऑनलाइन निवेश सलाहकार क्लीयरफंड्स डॉट कॉम के सीईओ और संस्थापक कुणाल बजाज ने कहा, 'कर के बावजूद इक्विटी म्युचुअल फंड लंबी अवधि के लिए सबसे बेहतर संपत्ति वर्ग बने रहेंगे।'
 
मल्टी-कैप का लंबी अवधि का प्रतिफल (पिछले 10 साल में 11.28  फीसदी सीएजीआर प्रतिफल) और मिड-कैप श्रेणियों का प्रतिफल (13.90 फीसदी) लार्ज-कैप फंडों के प्रतिफल (9.35 फीसदी) से अधिक है। इस खबर की त्वरित प्रतिक्रिया में निवेशकों को किसी भी परिस्थिति में अपने इक्विटी फंडों से निकासी नहीं करनी चाहिए। इसके बजाय उन्हें अपनी योजनाओं में मामूली बदलाव करना चाहिए। प्लान अहेड वेल्थ एडवाइजर्स के मुख्य वित्तीय योजनाकार विशाल धवन कहते हैं, 'अपने लक्ष्यों को हासिल करने के लिए या तो ज्यादा निवेश कीजिए या अपने लक्ष्यों का समय थोड़ा आगे बढ़ाइए।'
 
अब इक्विटी फंडों पर दीर्घावधि पूंजीगत लाभ कर 10 फीसदी होगा, जबकि यह डेट फंडों में इंडेक्सेशन के साथ 20 फीसदी बना रहेगा। बजाज कहते हैं, 'इंडेक्सेशन लाभ के कारण लंबी अवधि के बॉन्ड फंडों पर कर की प्रभावी दर इक्विटी फंडों से कम हो सकती है।' बजट के बाद निवेशकों को कर के गुणा-भाग के आधार पर किसी संपत्ति वर्ग को निवेश के लिए चुनने से बचना चाहिए।  पीपीएफएएस म्युचुअल फंड के मुख्य निवेश अधिकारी राजीव ठक्कर कहते हैं, 'संपत्तियों में निवेश के उचित आवंटन के लिए समयावधि, जोखिम लेने की क्षमता, विविधिकरण की जरूरत और लक्ष्यों के आधार पर फैसला लें।'
 
अब पोर्टफोलियो को नए सिरे से संतुलित करने की लागत आएगी। अब जब आप इक्विटी में मुनाफावसूली करेंगे और इस पैसे को फिक्सड इनकम या सोने में निवेश करेंगे तो आपको कर चुकाना होगा। इसलिए बार-बार पोर्टफोलियो में फेरबदल से बचें। निवेशकों को रिडेंपशन की योजना सोच-समझकर बनानी होगी। फंड्सइंडिया डॉट कॉम की अनुसंधान प्रमुख विद्या बाला ने कहा, 'अब भी हर साल 1 लाख रुपये के रिडेंपशन पर दीर्घावधि पूंजीगत लाभ कर नहीं है, इसलिए बड़ी मात्रा में रिडेंपशन से बचें। इस छूट का फायदा उठाने के लिए अपने लक्ष्य से दो तीन साल पहले रिडीम करना शुरू करें।' दो वित्त वर्षों का फायदा उठाने के लिए आप मार्च और उसके बाद अप्रैल में भी निकासी कर सकते हैं। 
 
लाभांश पर कर का असर 
 
पहले लाभांश पुनर्निवेश विकल्प और वृद्धि विकल्प समान थे। लेकिन अब लाभांश पुनर्निवेश के विकल्प की चमक कम हो जाएगी। बाला कहती हैं, 'हर बार जब लाभांश की घोषणा होगी तो इस पर 10 फीसदी कर लगेगा। इससे वृद्धि विकल्प की तुलना में लाभांश पुनर्निवेश विकल्प में कुल लाभ कम हो जा जाएगा। वृद्धि विकल्प में आप पर रिपेंडशन के वक्त ही 10 फीसदी कर लगेगा।'
 
बैलेंस्ड की जगह अल्पावधि डेट फंडों को चुनें 
 
हाल के वर्षों में बहुत से निवेशकों को इस वादे के साथ बैलेंस्ड फंड बेचे गए हैं कि उन्हें नियमित मासिक लाभांश मिलेगा। ये फंड अल्पावधि में लाभांश या रीडेंपशन के जरिये आय सृजित करने के लिए उपयुक्त नहीं हैं। इन फंडों का 65 फीसदी या उससे अधिक निवेश शेयरों में होता है, इसलिए जोखिम घटाने और प्रतिफल देने के लिए उन्हें कम से कम 3 से 5 साल रखना जरूरी है। नियमित लाभांश के लिए बैलेंस्ड फंड खरीदने वाले निवेशकों को अब इस पर कर चुकाना होगा। अगर आप ऐसे नए निवेशक हैं, जिन्हे पैसे की जरूरत नहीं है तो वृद्धि विकल्प वाले फंड को चुनें और इसमें निवेश बनाए रखें। 
 
बाला कहती हैं, 'अगर आपको तत्काल आमदनी की जरूरत है और आप इन फंडों में लंबे समय से नहीं हैं तो अत्यधिक अल्पावधि या अल्पावधि वाले फंडों का रुख करें और उनमें सिस्टेमैटिक विड्राअल प्लान शुरू करें।' जिन लोगों 3 से 5 साल से बैलेंस्ड फंड हैं, उन्हें वृद्धि विकल्प वाले फंडों का रुख करना चाहिए और 1 लाख रुपये तक दीर्घावधि पूंजीगत लाभ की छूट का फायदा उठाने  के लिए सिस्टेमैटिक विड्राअल प्लान शुरू करें। 
 
आर्बिट्राज फंडों का आकर्षण घटा 

निवेशक आर्बिट्राज फंडों को उनमें कम उतार-चढ़ाव और एक साल के बाद कोई कर नहीं होने की वजह से इस्तेमाल कर रहे थे, जबकि लिक्विड फंड जैसी डेट फंड श्रेणी में कर लगता था। पिछले एक साल में आर्बिट्राज फंडों ने 6.23 फीसदी प्रतिफल दिया है, जो लिक्विड फंडों के प्रतिफल 6.44 फीसदी से कम है। आर्बिट्राज फंडों पर 10 फीसदी दीर्घावधि पूंजीगत लाभ कर से ये और ज्यादा अनाकर्षक बनेंगे। हालांकि लाभांश विकल्प में आर्बिट्राज फंडों पर कर 10 फीसदी है, जबकि लिक्विड फंडों में फंड हाउस 29.12 फीसदी लाभांश वितरण कर चुकाता है। लेकिन आर्बिट्राज फंडों में लाभांश विकल्प से बचना बेहतर है। 
 
यूलिप योजनाएं बनी लुभावनी
 
अमेरिकी ब्रोकरेज कंपनी मॉर्गन स्टैनली का मानना है कि शेयरों में दीर्घकालिक निवेश से होने वाले लाभ पर कर (एलटीसीजी) फिर शुरू किए जाने से जीवन बीमा उत्पादों, विशेषकर यूलिप जैसी योजनाएं काफी आकर्षक हो गई हैं। वित्त मंत्री ने शेयरों में निवेश पर एक लाख रुपये से अधिक के वार्षिक दीर्घकालिक लाभ पर 10 फीसदी की दर से कर लगाया है। इसकी गणना 31 जनवरी, 2018 के बाद के लाभ के आधार पर होगी। बजट में शेयरों में निवेश वाली म्युचुअल फंड योजनाओं पर भी इसी दर से लाभांश वितरण कर लगाया गया है। मॉर्गन स्टैनली ने अपने एक साप्ताहिक नोट में कहा है, ' इस संदर्भ में हमारा मानना है कि मध्यम और दीर्घकालिक निवेश की दृष्टि से जीवन बीमा योजनाएं आकर्षक लगने लग सकती हैं, जिसमें खास कर यूनिट-लिंक्ड बीमा योजनाएं प्रमुख हैं। 
 
गौरतलब है कि आयकर की धारा 10डी के तहत बीमा निवेश को आय कर मुक्त रखा गया है। उसने कहा है, 'हम बजट की स्पष्ट तस्वीर सामने आने की प्रतीक्षा कर रहे हैं, लेकिन यदि जो चीजें सामने आईं हैं, वह सही है तो इसका लाभ निजी क्षेत्र की कंपनियों आईसीआईसीआई प्रुडेंशियल लाइफ और एचडीएफसी लाइफ जैसी कंपनियों को मिल सकता है।  
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