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क्रिप्टोकरेंसी बाजार में भारी गिरावट

राजेश भयानी |  Feb 06, 2018 10:53 PM IST

नई नहीं क्रिप्टो की लड़खड़ाती चाल

वर्ष 2018 की शुरुआत में भी आभासी मुद्रा (क्रिप्टोकरेंसी) बाजार बुलबुले की तरह तेजी से फट गया। आभासी मुद्राओं की कीमतें और बाजार पूंजीकरण अपने सर्वोच्च स्तर से दो तिहाई कम हो चुकी है। वहीं, भारत ने यह कहकर इस बुलबुले में एक और पिन चुभा दी कि क्रिप्टोकरेंसी मान्य मुद्रा नहीं है और इसे लेनदेन का माध्यम नहीं बनाया जा सकता। हालांकि प्रमुख बिटकॉइन एक्सचेंजों पर क्रिप्टोकरेंसी की कुल मात्रा को देखने से लगता है कि सिलसिला अभी थमा नहीं है। दिसंबर 2017 में बिटकॉइन की कीमत लगभग 15 लाख रुपये थी जो मंगलवार दोपहर 4.28 लाख रुपये पर पहुंच चुकी है तथा अंतरराष्ट्रीय बाजार में 6,100 डॉलर के करीब बनी हुई है।

वहीं, कुछ जगह यह 6,000 डॉलर से भी नीचे जा चुकी है। बिटकॉइन का बाजार पूंजीकरण घटकर 108 खरब डॉलर पर आ गया है। भारत में बजट 2018-19 भाषण के ठीक बाद भारतीय क्रिप्टो एक्सचेंजों पर कुछ देर के लिए तेजी से बिक्री हुई जिससे कीमतें गिर गईं। इस कारण, अनेक निवेशक जो दाम कम होने का इंतजार कर रहे थे, बाजार में आ गए और भारतीय क्रिप्टो एक्सचेंजों पर करेंसी वॉल्यूम तेजी से बढ़ा। सरकारी अधिकारियों का कहना है कि भारत में क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज के लिए नियम अंतिम चरण में हैं और एक्सचेंज भी इनका इंतजार कर रहे हैं। 

भारत में बिटकॉइन एक्सचेंज जेबपे के प्रमुख निश्चिंत सांघवी कहते हैं, 'हम बिटकॉइन की कीमतों में अस्थिरता को लेकर अपने उपभोक्ताओं को लगातार शिक्षित कर रहे हैं और संबंधित चेतावनी भी जारी कर रहे हैं। हम उपयोगकर्ताओं को क्रिप्टोकरेंसी संबंधित तकनीक समझने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं। बजट भाषण के 1-2 घंटे बाद क्रिप्टोऐसेट्स की कीमतें स्थिर हो गई थी और अब वैश्विक कारकों से प्रभावित हो रही हैं। इस सप्ताह वैश्विक एक्सचेंजों में करेंसी वॉल्यूम बढ़ा है और भारत में भी इसी तरह का रुख देखने को मिला। साथ ही, हम चाहते हैं कि इस वर्ष तक आभासी मुद्रा का नियमन हो जाए।'

जेबपे की वेबसाइट पर बताया गया है कि वर्तमान में इसके 30 लाख से अधिक यूजर हैं और इस कारण जेबपे भारत का सबसे बड़ा बिटकॉइन एक्सचेंज होने का दावा करता है। जेबपे ने हाल ही में लाइटकॉइन में भी ट्रेडिंग शुरू की है लेकिन तब से इसकी कीमतें लगाीतार गिर रही हैं। जो निवेशक अक्टूबर-नवम्बर 2017 के समय इस बाजार में आए, वे अभी भी लाभ में हैं लेकिन इसके बाद निवेश करने वालों को बहुत अधिक हानि का सामना करना पड़ रहा है।

भारत के एक दूसरे बिटकॉइन एक्सचेंज यूनोकॉइन के संस्थापक और मुख्य कार्याधिकारी सात्विक विश्वनाथ कहते हैं, 'हम खरीदारों का ऐसा समूह देख सकते हैं जो कम कीमत पर बिटकॉइन खरीदना चाहते थे लेकिन अब तो रोज कीमतें कम हो रही हैं। क्रिप्टो बाजार में इस तरह की अस्थिरता और करेक्शन नए नहीं हैं लेकिन बाजार में आए नए निवेशक इसे पहली बार महसूस कर रहे हैं। इन नए निवेशकों से वॉल्यूम अधिक प्रभावित नहीं हुआ है।'

भारत के अनेक एक्सचेंजों ने अपनी तकनीक में सुधार किया है जिससे तरलता बढ़ी तथा खरीद-बिक्री कीमत के बीच का अंतर 3-4 प्रतिशत से कम होकर लगभग समाप्त हो गया। इस अंतर में कमी से दैनिक रूप से ट्रेडिंग करने वालों को काफी सहायता मिली। बंगलूरु के स्टार्टअप वीलूप नेटवक्र्स अनेक वर्ष से ओवरसीज सेवाओं के लिए बिटकॉइन में शुल्क ले रही है।

कंपनी के संस्थापक और बिटकॉइन निवेशक अशरिथ गोविंद कहते हैं, 'हम वर्तमान के औसत पर कीमतें रखेंगें जो बिटकॉइन के सर्वोच्च स्तर से 60 प्रतिशत कम हैं। इससे हम अपना बिटकॉइन पोर्टफोलियो बढ़ाएंगे।' वह कहते हैं, ' कीमतें गिर रही हैं तथा अभी और गिरावट आ सकती है। लेकिन मुझे भरोसा है कि लंबे समय में बिटकॉइन की कीमतों में तेजी आएगी।' कई निवेशक कीमतें कम होने पर खरीदारी करते हैं जिससे उनका पोर्टफोलियो और एक्सचेंज का वॉल्यूम, दोनों बढ़ जाता है। आभासी मुद्रा पर भारत में बजट भाषण तथा जापानी बिटकॉइन एक्सचेंज के हैक होने की खबरों के बाद कीमतें गिरती गईं।

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