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दवा कंपनियों की फीकी पड़ती खुराक

उज्ज्वल जौहरी |  Feb 11, 2018 09:45 PM IST

अमेरिकी बाजार में कीमत गिरावट का सिलसिला थमने की उम्मीदें भारतीय जेनेरिक दवा निर्माताओं के दिसंबर 2017 के तिमाही परिणाम के बाद कमजोर पड़ी हैं। अमेरिका में ल्यूपिन, डॉ. रेड्डीज, ग्लेनमार्क और सन फार्मा की अमेरिकी सहायक कंपनी टारो फार्मा की बिक्री 40 प्रतिशत तक घटी है जिससे उनका समेकित प्रदर्शन प्रभावित हुआ। टारो को बिक्री वृद्घि के बावजूद सालाना आधार पर बिक्री में 30 फीसदी की गिरावट का सामना करना पड़ा है। टारो के मुख्य कार्याधिकारी उदय बल्डोटा ने कहा कि अमेरिकी जेनेरिक बाजार को लगातार चुनौतीपूर्ण मूल्य निर्धारण परिवेश और प्रतिस्पर्धी दबाव का सामना करना पड़ रहा है। इजरायल की कंपनी टेवा दुनिया की सबसे बड़ी जेनेरिक निर्माता है। तेवा ने भी दिसंबर तिमाही के निराशाजनक प्रदर्शन के बाद पूर्व के अनुमानों की तुलना में 2018 में इसके कमजोर रहने की आशंका जताई है। क्रेडिट सुइस के विश्लेषकों के अनुसार प्रतिस्पर्धी दबाव और कीमत गिरावट का सिलसिला मौजूदा वर्ष में बरकरार रहेगा।

 
हालांकि बाजार अमेरिकी बाजार में एक अंक की कीमत गिरावट का अनुमान जता रहा है, लेकिन क्रेडिट सुइस के विश्लेषकों का मानना है कि यह 12 फीसदी से अधिक रहेगी। इसे अगले दो वर्षों के दौरान नए उत्पादों की मंजूरी में 50 प्रतिशत की तेजी, खरीदारों के बीच समेकन बढऩे और अपने उत्पाद पेश करने के लिए नए प्रतियोगियों के लिए अवसर मिलने से मदद मिलेगी। दो अंक की कीमत गिरावट से अमेरिकी जेनेरिक बिक्री में अगले तीन वर्षों के दौरान सालाना आधार पर 4-5 प्रतिशत की गिरावट को बढ़ावा मिलेगा। यदि ऐसा होता है तो ज्यादा कंपनियां दुनिया के इस सबसे बड़े दवा बाजार में हिस्सेदारी हासिल करने के लिए संघर्ष करेंगी, जिससे कंपनियों का राजस्व, मार्जिन और मुनाफा प्रभावित होगा।
 
अमेरिकी बाजार में बड़ी भारतीय जेनेरिक कंपनियों के संदर्भ में अरविंदो फार्मा इसका अपवाद रही है। एक प्रमुख दवा रेनवेला की पेशकश की मदद से कंपनी की अमेरिकी बिक्री 9.4 फीसदी बढ़ी। यह नई दवाओं की पेशकश और महज किसी एक उत्पाद पर कम निर्भर रहने की वजह से बेहतर वृद्घि दर्ज करने में सफल रही। बड़े उत्पाद पोर्टफोलियो के साथ साथ कुछ विशेष दवाएं अमेरिकी बाजार में उसकी वृद्घि की रफ्तार को बरकरार रखने के लिहाज से अहम हैं। बिक्री के रुझान में गिरावट के संदर्भ में अपवाद साबित हुई अन्य कंपनियां वे थीं जिन्हें उत्पाद लॉन्च से मजबूती मिली, अमेरिकी एफडीए को लेकर कोई समस्या नहीं रही, और जिनका अमेरिकी क्षेत्र में निवेश कम था। उदाहरण के लिए, कैडिला हेल्थकेयर को अल्सरेटिव कोलाइटिस दवा और अधिक उत्पाद पेश करने के लिए एक्सक्लूसिविटी के तहत की जाने वाली बिक्री से मदद मिली। 
 
अमेरिका में देर से प्रवेश करने वाली सिप्ला को इस क्षेत्र से अपने कुल राजस्व का महज 17 प्रतिशत हिस्सा प्राप्त हुआ और इसलिए वह भारत और अन्य भूभागों की मदद से कुल वृद्घि की रफ्तार को संतुलित बनाए रखने में सफल रही। डॉ. रेड्डीज और ल्यूपिन जैसे उसके लार्ज-कैप प्रतिस्पर्धियों को अमेरिकी बाजार से अपने राजस्व का 40 प्रतिशत मिला और उन्हें कड़े प्रतिस्पर्धी दबाव का सामना करना पड़ा है। भौगोलिक विविधता से भी सिप्ला और अरविंदो को मदद मिली, क्योंकि अन्य क्षेत्रों से सुधरते योगदान से कुल प्रदर्शन को मजबूती मिली। सिप्ला की राजस्व वृद्घि भारतीय बिक्री (40 प्रतिशत योगदान) और अफ्रीकी बिक्री (22 फीसदी योगदान)पर केंद्रित थी। भारतीय और अफ्रीकी वृद्घि में 15 प्रतिशत ओर 6 प्रतिशत का इजाफा दर्ज किया गया जिससे अमेरिकी बिक्री में 2 फीसदी की गिरावट के बावजूद कुल प्रदर्शन को सुधारने में मदद मिली। इसी तरह अरविंदो की 37 फीसदी की यूरोपीय (27 फीसदी योगदान) बिक्री वृद्घि से कंपनी को दो अंक में वृद्घि दर्ज करने में मदद मिली।
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