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बीएसई-500 के आधे शेयर अपने 200-डीएमए से नीचे

पवन बुरुगुला |  Feb 11, 2018 09:45 PM IST

बीएसई-500 के लगभग आधे शेयर ताजा बिकवाली के बाद अपने 200 दिन के मूविंग एवरेज (डीएमए) से नीचे पहुंच गए हैं। इसके अलावा शीर्ष-500 शेयरों में से 20 फीसदी अपने 200-डीएमए से 10 प्रतिशत से नीचे कारोबार कर रहे हैं जिससे बाजार में कमजोर रुझान का संकेत मिलता है। सेंसेक्स और बीएसई-500 सूचकांक पिछले महीने अपने ऊंचे स्तर से 6 फीसदी गिरे हैं। बीएसई मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांकों में अपने ऊंचे स्तरों से 8.8 फीसदी और 11 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। 

 
200-डीएमए लगभग एक साल का औसत है और इसका विश्लेषण बाजार रुझान समझने के लिए कारोबारियों द्वारा किया जाता है। इस स्तर से नीचे गिरावट एक कमजोर रुझान का संकेत देती है। सिक्वेंट साइंटिफिक और बैंक ऑफ महाराष्ट्र उन शेयरों में शुमार हैं जो अपने 200-डीएमए के मुकाबले 30 फीसदी नीचे कारोबार कर रहे हैं। आंकड़ों से पता चलता है कि एमसीएक्स, क्वालिटी और देना बैंक अपने 200-डीएमए से 25 फीसदी नीचे हैं। विश्लेषकों के अनुसार ये शेयर काफी कमजोर हो गए हैं और निवेशकों को इन्हें खरीदने से पहले इनके बुनियादी आधार में सुधार का इंतजार करना चाहिए।
 
इस बीच, जो शेयर बाजार रुझान से लगातार अलग बने हुए हैं, उनमें ग्रेफाइट शेयर शामिल हैं। एचईजी मौजूदा समय में अपने 200-डीएमए से 151 प्रतिशत ऊपर कारोबार कर रहा है, जबकि ग्रेफाइट इंडिया 83 प्रतिशत बढ़त के साथ करोबार कर रहा है। ये शेयर शुक्रवार को बाजार में गिरावट के दौरान भी चढ़े थे। कुल मिलाकर, खासकर विदेशों से निवेशकों ने अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल में तेजी के बीच अपने इक्विटी निवेश में कमी की है। इसके अलावा, आय सुधार में विलंब की वजह से ऊंचे मूल्यांकन से भी शेयरों की कीमतों को कुछ मदद मिल रही है।
 
इक्विनोमिक्स रिसर्च ऐंड एडवाइजरी के संस्थापक जी चोकालिंगम ने कहा, 'भारी पूंजी प्रवाह की वजह से मिड- और स्मॉल-कैप क्षेत्र में काफी हद तक बुलबुले जैसी स्थिति देखी गई है। दूसरी तरफ, इनका बुनियादी आधार कई वजहों से कमजोर बना हुआ है। इसलिए, इस क्षेत्र में बड़ी गिरावट संभावित थी। निवेशकों को इस क्षेत्र में अधिक अस्थिरता के लिए तैयार रहना चाहिए क्योंकि बाजार अल्पावधि से लेकर मध्यावधि में कई अनिश्चितताओं से घिरे रह सकते हैं जिनमें राज्य चुनाव, अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा दर वृद्घि और मॉनसून को लेकर अनिश्चितता।' पिछला वर्ष भारतीय बाजारों के लिए कम उतार-चढ़ाव वाले वर्षों में से एक रहा, क्योंकि मजबूत पोर्टफोलियो प्रवाह और वैश्विक रूप से कम ब्याज दर व्यवस्था से इक्विटी को मजबूती मिली। हालांकि 2018 कई संभावित बाधाओं की वजह से 2017 की तुलना में अलग होगा।
 
मौजूदा हालात में ब्रोकर अपने ग्राहकों को अच्छी आय संभावना वाले ब्लू-चिप शेयरों के साथ बने रहने और मिड-कैप से परहेज करने की सलाह दे रहे हैं। यह शुरू में दिए गए उनके सुझावों की तुलना में अलग है जब उन्होंने अच्छे रिटर्न के लिए छोटे शेयरों पर दांव लगाने का सुझाव दिया था। बाजार विश्लेषक मौजूदा समय में यह सुझाव दे रहे हैं कि निवेशकों को मिड- और स्मॉल-कैप के लिए 'गिरावट पर खरीदारी' के मंत्र से फिलहाल परहेज करना चाहिए और अपना ध्यान लार्ज-कैप पर लगाना चाहिए। रिलायंस सिक्योरिटीज के मुख्य कार्याधिकारी बी गोपकुमार ने कहा, 'रुझान अब स्पष्टï रूप से अच्छी आय संभावना वाले लार्ज-कैप शेयरों के पक्ष में है।'
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