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भारती इन्फ्राटेल: टावर समेकन से राजस्व पर दबाव के आसार

राम प्रसाद साहू |  Feb 11, 2018 09:47 PM IST

समेकन, कमजोर अल्पावधि परिदृश्य और रिलायंस जियो द्वारा अन्य सेवा प्रदाताओं से टावर किराए पर लेने के बजाय अपने स्वयं के टावरों पर ध्यान केंद्रित किए जाने से भारती इन्फ्राटेल का शेयर पिछले तीन महीनों के दौरान 21 फीसदी गिरा है।  अपने टावरों को तरजीह देने का मतलब होगा कि भारती इन्फ्राटेल के लिए किराया आय पिछले साल दर्ज किए गए स्तरों और शुरू में विश्लेषकों द्वारा जताए गए अनुमान से कम रहेगी। अल्पावधि चिंता है दूरसंचार क्षेत्र में समेकन के जरिये किराए के व्यवसाय में कमी आना। जेपी मॉर्गन के विश्लेषकों के अनुसार इससे वित्त वर्ष 2019 में कंपनी सपाट राजस्व वृद्घि ही दर्ज कर पाएगी। 

 
भारती इन्फ्राटेल के प्रबंधन ने कहा था कि इस सेक्टर में समेकन को देखते हुए आगामी तिमाहियां कमजोर रहने की आशंका है। एयरसेल द्वारा अपना परिचालन घटाए जाने और टेलीनोर तथा टाटा टेलीसर्विसेज के भारती एयरटेल के साथ विलय से भारती इन्फ्राटेल के नेटवर्क पर लगभग 15,000 टावरों पर संकट छा जाएगा क्योंकि कंपनियों ने अपनी जरूरतों को तर्कसंगत बनाने की योजना बनाई है। जियो और बीएसएनएल को छोड़कर, अन्य ऑपरेटरों का भारती इन्फ्राटेल के लिए किराया आधार में 7 प्रतिशत का योगदान है। नोमुरा के विश्लेषकों के अनुसार इस तरह से वोडाफोन इंडिया और आइडिया सेल्युलर के विलय के अगले कुछ महीनों में पूरा होने से किराए को तर्कसंगत बनाए जाने/टावर किराए पर लेने की जरूरत समाप्त होने से आय घटेगी। 
 
कंपनी के लिए कुछ अल्पावधि बदलावों में इंडस टावर्स में बड़ी हिस्सेदारी का अधिग्रहण (वोडाफोन और आइडिया से हिस्सेदारी की खरीदारी शामिल) भी शामिल होगा। मौजूदा समय में इंडस टावर्स में भारती इन्फ्राटेल और वोडाफोन 42-42 फीसदी की हिस्सेदारी है, जबकि आदित्य बिड़ला गु्रप (आइडिया की 11 प्रतिशत हिस्सेदारी समेत) की 16 प्रतिशत भागीदारी है।  बाजार की नजर मूल्यांकन पर लगी रहेगी जिस पर यह सौदा हो रहा है। माना जा रहा है कि इंडस टावर्स सौदा इन्फ्राटेल के वित्त वर्ष 2018 की 9 गुना उद्यम वैल्यू (परिचालन लाभ के मुकाबले) के मूल्यांकन के समान है। भारती इन्फ्राटेल का मौजूदा बाजार पूंजीकरण 640 अरब रुपये है।
 
नोमुरा के विश्लेषकों का कहना है कि यदि सौदा इन मूल्यांकनों पर पूरा होता है तो यह अधिग्रहण के दूसरे वर्ष में आय प्राप्ति वाला सौदा साबित होगा, बशर्ते कि सौदे की 90 प्रतिशत वैल्यू को कर्ज और शेष को नकदी द्वारा वित्त पोषित किया जाए। भारती इन्फ्राटेल को वित्त वर्ष 2018 का समापन 67 अरब रुपये की नकदी और नकदी समतुल्य निवेश के साथ होने का अनुमान है। इसके अलावा भारती एयरटेल द्वारा इस कंपनी में नियंत्रण हिस्सेदारी छोडऩे से एक अलग टावर इकाई को बढ़ावा मिलेगा और उसके परिणामस्वरूप मूल्यांकन गिरावट में कमी आएगी। 
 
जियो द्वारा पिछले महीने कीमतों में कटौती से इस क्षेत्र की सेहत प्रभावित हुई है। सेवा प्रदाताओं (नेटवर्क लागत) के लिए टावर कंपनियों की सर्वाधिक लागत को देखते हुए अनुबंधों को लेकर मोलभाव करने के लिए दबाव बढ़ सकता है। भारती इन्फ्राटेल के लिए वृद्घि की रफ्तार में तेजी जियो और एयरटेल जैसी कंपनियों से आएगी, क्योंकि वे वित्त वर्ष 2020 और वित्त वर्ष 2021 से 4जी नेटवर्क को बढ़ाएंगी और 5जी में निवेश करेंगी।  पिछली कुछ तिमाहियों के दौरान सेवाओं में दक्षता और तेज डेटा वृद्घि को देखते हुए विश्लेषकों का कहना है कि नेटवर्क गुणवत्ता और गति बड़ा अंतर लाने में मददगार होगी क्योंकि कंपनी अपनी राजस्व भागीदारी सुधारने पर ध्यान दे रही है। इसके अलावा साझा बुनियादी ढांचा सेवाएं अन्य कारक हो सकती हैं जिनसे कंपनी के राजस्व आधार को विविध बनाने और समेकन से जुड़ी अस्थिरता में कमी लाने में मदद मिलेगी। 
 
कुल मिलाकर, अल्पावधि परिदृश्य सुस्त दिख रहा है। राजस्व में अनिश्चितता और वित्त वर्ष 2019 के लिए अनुमानों में भारी कटौती (15 प्रतिशत तक) को देखते हुए निवेशकों को फिलहाल इस शेयर से परहेज करना चाहिए। यह शेयर मौजूदा समय में अपने वित्त वर्ष 2019 के आय अनुमानों के 23 गुना पर कारोबार कर रहा है। 
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