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अशोक लीलेंड: तेज रफ्तार पर सवार

टी ई नरसिम्हन |  Feb 11, 2018 09:47 PM IST

अशोक लीलेंड (एएलएल) द्वारा पिछले कुछ वर्षों में उठाए गए कदमों के अलावा सुधरते औद्योगिक परिदृश्य से कंपनी को अपना व्यवसाय और वित्तीय प्रदर्शन सुधारने में मदद मिल रही है। दिसंबर 2017 की तिमाही भी इसका प्रमाण है। कंपनी प्रबंधन और विश्लेषकों का कहना है कि स्थिति और ज्यादा बेहतर होगी।

 
मजबूत तिमाही प्रदर्शन 
 
तकनीकी उन्नयन और नियामकीय बदलावों की मदद से एलएल का शुद्घ लाभ तीसरी तिमाही में लगभग तीन गुना बढ़कर 4.49 अरब रुपये पर पहुंच गया जो एक साल पहले की समान तिमाही में 1.61 अरब रुपये था। इसी के साथ यह यह आंकड़ा विश्लेषकों के 4 अरब रुपये के अनुमान को भी पार कर गया है। कच्चे माल की लागत में वृद्घि के बावजूद एएलएल अपना परिचालन मुनाफा मार्जिन सालाना और तिमाही आधार पर 100 आधार अंक तक बढ़ाकर तीसरी तिमाही में 11.1 फीसदी दर्ज करने में कामयाब रही है। कंपनी के लिए कच्चे माल की लागत एक साल पहले के 34.02 अरब रुपये से 59 प्रतिशत बढ़कर 54.06 अरब रुपये हो गई है। साथ ही कंपनी ने वाहनों पर ऊंचा डिस्काउंट भी बरकरार रखा है। उत्पादों (वाहन बिक्री) के सुधरते समावेश, बढ़ती मांग, और कीमतों में वृद्घि से बेहतर मुनाफे में मदद मिली है। मजबूत निर्यात बिक्री (46 प्रतिशत तक) और मझोले और भारी वाणिज्यिक वाहनों (एमऐंडएचसीवी) की घरेलू बिक्री (41 प्रतिशत तक की वृद्घि) से एएलएल को मदद मिली है। अशोक लीलेंड के प्रबंध निदेशक विनोद के दसारी ने कहा कि वृद्घि की मजबूत रफ्तार से कंपनी की तकनीकी श्रेष्ठïता का पता चलता है।
 
उन्होंने कहा, 'हमने जिस चीज पर ध्यान केंद्रित किया, वह है शुद्घ बिक्री की प्राप्ति। कीमतें बढ़ी हैं और डिस्काउंट में भी इजाफा किया गया। शुद्घ रूप से कीमतें पहले की तुलना में ऊंची हैं, प्राप्ति भी पिछली तिमाही के मुकाबले बेहतर रही है।' मुख्य वित्तीय अधिकारी गोपाल महादेवन ने कहा, 'एएलएल को राजस्व में वृद्घि और लागत किफायत की कोशिश से मुनाफा सुधारने में मदद मिली है।'
 
नई प्रौद्योगिकी और भूभाग शामिल
 
इंटेलीजेंट एक्जॉस्ट गैस रीसर्कुलेशन (आईईजीआर) से कंपनी को बिक्री बढ़ाने और ग्राहकों तक बेहतर ढंग से पहुंचने के लिए अपने नेटवर्क को मजबूत बनाने में मदद मिली है। एएलएल का दावा है कि उसकी आईईजीआर टेक्नोलॉजी भारत के लिए सलेक्टिव कैटालिटिक रिडक्शन (एससीआर) की तुलना में अधिक उपयुक्त है और यह बीएस-3 इंजनों की तुलना में 10 प्रतिशत बेहतर माइलेज मुहैया कराती है। एएलएल का यह भी कहना है कि वह दक्षिण भारत में लंबे समय से मौजूद नहीं है, जहां उसकी बाजार भागीदारी लगभग 50 प्रतिशत है। एएलएल के पांच साल पहले 500 की तुलना में मौजूदा समय में 2800 प्वाइंट ऑफ प्रजेंस (पीओपी) हैं, चाहे यह बिक्री, सेवा या कलपुर्जों के संदर्भ में हों।
 
अन्य क्षेत्रों में, एएलएल की बाजार भागीदारी 25-30 प्रतिशत है। इसलिए भारत में बिक्रने वाले प्रत्येक तीन ट्रकों में लगभग 1.25 अशोक लीलेंड का होता है। भारत के अलावा, कंपनी ने वैश्विक रूप से भी अपना विस्तार किया है। इसने तीसरी तिमाही में आयवरी कोस्ट में अपना कार्यालय खोला। महादेवन कहते हैं, 'उत्पाद पेश करने पर जोर, नेटवर्क विस्तार, ग्राहकों से जुड़ाव, और श्रेष्ठï सॉल्युशनों की पेशकश पर ध्यान केंद्रित करने से हमें मुनाफा वृद्घि को मजबूत बनाने में मदद मिलनी चाहिए। हमारी कार्यशील पूंजी की स्थिति बेहद मजबूत बनी रहेगी और लागत पर हमारा ध्यान बरकरार रहेगा।' एएलएल हल्के वाणिज्यिक वाहनों, रक्षा और कलपुर्जा व्यवसाय जैसे सेगमेंटों पर ध्यान केंद्रित कर रही है जिससे उसे घरेलू एमऐंडएचसीवी में चक्रीयता से पैदा होने वाले जोखिम से बचने में मदद मिल सकती है।
 
मांग के वाहक
 
कई प्रमुख कारक इस उद्योग और एएलएल के लिए बिक्री को मजबूत प्रदान कर रहे हैं जिनमें ट्रकों पर सामान के भार की सीमा से संबंधित नियम भी शामिल हैं। उत्तरी राज्यों, खासकर राजस्थान, उत्तर प्रदेश और अन्य में नियम लागू हैं और ट्रक ऑपरेटरों को नए वाहनों में निवेश करने की जरूरत होगी। जीएसटी का सकारात्मक असर दिखा है क्योंकि वाहनों की उत्पादकता बढ़ रही है। बुनियादी ढांचा क्षेत्र में गतिविधियां तेज हुई हैं जिससे मांग बढ़ रही है और एएलएल अधिक भारी वाहनों की बिक्री में तेजी दर्ज कर रही है। पिछले चार से पांच साल के दौरान मिड-20-25 टनर के बजाय 31-41 टनर में तेजी आई और अब उद्योग में 49 टनर्स के बारे में चर्चा चल रही है। 
 
नजरिया
 
हालांकि एएलएल मार्च तिमाही को लेकर आशान्वित है, लेकिन यह इसे लेकर चिंतित भी है कि पिछले साल की चौथी तिमाही में बीएस-3 से बीएस-4 के प्रति बदलाव की वजह से और वाहनों को जल्द बेचने के लिए भारी भरकम डिस्काउंट दिए जाने की वजह से अधिक बिक्री दर्ज की गई थी। लेकिन चौथी तिमाही और वर्ष के शेष समय में मांग मजबूत रहने की उम्मीद है। बसों (जिसमें 13 प्रतिशत की गिरावट देखी जा सकती है) के अलावा, सायम का भी मानना है कि सअभी अन्य वाणिज्यिक वाहनों में 2018 में लगभग 16 फीसदी तक की वृद्घि दर्ज की जाएगी। वृद्घि की रफ्तार बुनियादी ढांचा विकास, निर्माण कार्य और खदान गतिविधियों पर निर्भर करेगी।
कीवर्ड ashok leyland, vehicle,

  
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