होम » Investments
«वापस

बाजार में गिरावट के दौरान कमाई के अवसर

जयदीप घोष और संजय कुमार सिंह |  Feb 11, 2018 09:48 PM IST

लगभग एक साल तक तेजी बरकरार रहने के बाद बीएसई के सूचकांक-सेंसेक्स में अब गिरावट का दौर शुरू हो गया है। सेंसेक्स का गिरना लगातार जारी है। हालांकि बाजार के विश्लेषक पहले से ही इसका अनुमान लगा रहे थे और उस हिसाब से निवेशकों को सतर्क भी कर रहे थे। आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल म्युचुअल फंड के मुख्य निवेश अधिकारी एस नरेन कहते हैं, 'हम वैश्विक तेजी के बाजार में थे जिसमें कुछ वैश्विक सूचकांकों में जनवरी तक ज्यादा ही खरीदारी हुई थी। आपको यह तथ्य समझने की जरूरत होगी कि अमेरिकी बाजार 2009 से 2018 तक लगातार बढ़े हैं। इसलिए भारतीय शेयरों में बिकवाली वैश्विक बाजारों में गिरावट की वजह से आई।'

 
अच्छी खबर
 
कुछ समय से बाजार विश्लेषक निवेशकों को शेयरों की ऊंची कीमतों को लेकर आगाह करते आ रहे थे। इस गिरावट के बाद शेयरों के मूल्यांकन घटने लगे हैं। सेंसेक्स का पीई अनुपात (पिछले 12 महीनों का) 18 जनवरी को 26.4 दर्ज किया गया। ताजा गिरावट के बाद यह अनुपात घटकर करीब 24 रह गया है। 10 वर्षीय औसत पीई अनुपात 19 है। मगर बुरी खबर यह है कि कई विश्लेषक अभी भी मान रहे हैं कि गिरावट का दौर समाप्त नहीं हुआ है और शेयरों का मूल्यांकन ऊंचा बना हुआ है। नरेन ने कहा, 'मूल्यांकन के दृष्टिïकोण से बाजार लगातार महंगा बना हुआ है और स्मॉल- और मिड-कैप वाकई काफी महंगे हो गए हैं। जहां तक आय की बात है तो हमारा मानना है कि वृद्घि की रफ्तार अगले 18 महीनों में सुधरेगी।'
 
  निवेशकों को याद रखना चाहिए कि हालात कुछ समय तक नहीं सुधरेंगे। मोतीलाल ओसवाल फाइनैंशियल सर्विसेज के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक मोतीलाल ओसवाल कहते हैं, 'मैं इस पर कायम हूं कि भारत के लिए दीर्घावधि परिदृश्य मजबूत बना रहेगा, लेकिन भारतीय शेयरों के लिए यात्रा आसान रहने के आसार नहीं हैं। अच्छे भविष्य की नई उम्मीदों के साथ इसमें उत्साह का दौर भी होगा तो वृद्घि में मजबूत सुधार को लेकर अनिश्चितताओं के कालो बादल भी घुमड़ते रहेंगे।' उनके अनुसार फिलहाल ज्यादा घबराने की कोई वजह नहीं है। यह देखना जरूरी है कि क्या यह गिरावट बरकरार रहेगी, अगर ऐसा होता है तो बाजार में उन लोगों के लिए निवेश के अच्छे अवसर होंगे जो इस तेजी का फायदा नहीं उठा सके थे। लेकिन खरीदारी या बिकवाली को लेकर बहुत ज्यादा आक्रामक भी न बनें।  
 
यदि लाभ अच्छा तो करें मुनाफावसूली
 
अगर आप पिछले दो-तीन साल से बाजार में बने हुए हैं तो इस बात की काफी संभावना है कि आप अच्छा-खासा मुनाफा कमाने की स्थिति में हों। ताजा गिरावट के बाद भी सेंसेक्स की अभी पिछले की करीब 19 फीसदी बढ़त कायम है। इसी तरह लार्ज-कैप इक्विटी फंडों का श्रेणी औसत प्रतिफल पिछले साल में 18.80 प्रतिशत रहा है। मिड- और स्मॉल-कैप फंडों में निवेशकों के लिए श्रेणी का औसत प्रतिफल 21.08 प्रतिशत और 28.89 प्रतिशत अधिक रहा है।  एक निवेश विश्लेषक ने कहा, 'यदि इक्विटी में ऊंचे प्रतिफल और गिरती ब्याज दरों की वजह से आपका परिसंपत्ति आवंटन गलत रहा है तो और ज्यादा नुकसान से बचने के लिए इसे फिर से संतुलित बनाने का यह अच्छा अवसर है।' प्लान अहेड वेल्थ एडवाइजर्स के मुख्य वित्तीय योजनाकार विशाल धवन का मानना है, 'ताजा गिरावट के बावजूद कई निवेशक अभी भी मिड- और स्मॉल-कैप फंडों में अधिक आवंटन पर ध्यान दे रहे हैं, क्योंकि इस सेगमेंट में अच्छी तेजी दर्ज की गई। बेहतर है कि वे बेच दें और इसे ठीक कर लें।' 
 
बाजार का अनुमान न लगाएं
 
जब बाजार गिरता है तो कई निवेशक घबराकर बिकवाली करने लगते हैं, क्योंकि वे अपने निवेश को नुकसान में जाते नहीं देखना चाहते। इस मोड़ पर वे अपने आप को तसल्ली देते हैं कि बाजार फिर से बढ़ेगा तो वे इसमें पुन: निवेश करेंगे। लेकिन ऐसा करना आसान नहीं होता। यहां तक कि पेशेवर फंड प्रबंधकों के लिए भी बाजार का अनुमान लगाना मुश्किल होता है क्योंकि बाजार में उतार-चढ़ाव अचानक आता है। इसलिए अपने सांकेतिक नुकसान के साथ बने रहें और बाजार में सुधार का इंतजार करें। यदि आपका लक्ष्य दूर है तो घबराने और निवेश से बाहर निकलने की जरूरत नहीं है। 
 
एसआईपी रखें जारी
 
एसआईपी के जरिये निवेश आपको बाजार में गिरावट की स्थिति फायदेमंद रहता है। बाजार में गिरावट के दौरान चूंकि कीमतें गिर जाती हैं जिससे आपको अपनी योजना के अधिक यूनिट मिलते हैं। इस तरह आपका दीर्घावधि प्रतिफल मजबूत बनता है। अगर बाजार में गिरावट बरकरार रहे तो यह संभावना रहती है कि आप इक्विटी में अपना आवंटन कम कर दें। मॉर्निंगस्टार इन्वेस्टमेंट एडवाइजर इंडिया के निदेशक-प्रबंधक (शोध) कौस्तुभ बेलापुरकर कहते हैं, 'उस स्थिति में आप पूरी तरह बाहर निकलने के बजाय इक्विटी में अधिक निवेश कर सकते हैं।'
 
अंतरराष्ट्रीय फंडों पर दांव
 
कई भारतीय निवेशक उस स्थिति में अंतरराष्ट्रीय फंडों को नजरअंदाज करते हैं जब उनके अपने घरेलू बाजार में प्रतिफल अच्छा होता है। लेकिन अंतरराष्ट्रीय विविधता से पोर्टफोलियो में अस्थिरता कम करने में मदद मिलती है। इस समय जबकि दुनिया भर के बाजारों में गिरावट जारी है तो आप सोच सकते हैं कि वैश्विक फंडों में निवेश का भी कोई फायदा नहीं होने वाला। लेकिन विश्लेषकों का कहना है कि आपको वैश्विक फंडों में दांव लगाना चाहिए। धवन कहते हैं, 'आपको हमेशा ऐसी स्थिति नहीं मिलेगी जिसमें विदेशी और घरेलू बाजार विपरीत दिशा में चल रहे हों। लेकिन यह संभव है कि विदेशी बाजार घरेलू बाजार की तुलना में कम गिरे। इस स्थिति में आपके पोर्टफोलियो में कुल गिरावट कम ही रहेगी।'  अंतरराष्ट्रीय विविधता का फायदा लंबी अवधि के दौरान भी दिखेगा। अंतरराष्ट्रीय फंडों में 10 प्रतिशत आवंटन के साथ निवेश शुरू करें। अमेरिकी बाजार में निवेश से इसकी शुरुआत करें, जो दुनिया का सबसे बड़ा इक्विटी बाजार है। अमेरिका में सूचीबद्घ कई कंपनियां बहुराष्ट्रीय हैं जिनको पूरी दुनिया से राजस्व मिलता है।
 
निवेश शैली में लाएं विविधता 
 
यह आपके पोर्टफोलियो को बढ़ाने का एक अन्य तरीका है। बेलापुरकर कहते हैं, 'वैल्यू फंड, और डिविडेंड यील्ड फंड तेजी के बाजार में भी अच्छा प्रदर्शन नहीं भी कर सकते हैं, लेकिन इनमें गिरते बाजार में नुकसान से बचने की अच्छी संभावना होती है।' 
 
गुणवत्ता पर जोर
 
प्रत्यक्ष निवेशकों को भी घबराहट से बचना चाहिए। सेबी में पंजीकृत स्वतंत्र इक्विटी रिसर्च कंपनी स्टालवार्ट एडवाइजर्स के संस्थापक और मुख्य कार्याधिकारी जतिन खेमानी कहते हैं, 'ऐसे दीर्घावधि निवेशकों को चिंता करने की जरूरत नहीं है जिनका अच्छी कंपनियों में निवेश है। यदि आपको 100 रुपये पर कोई चीज आकर्षक लगती है तो तो 80 रुपये में इसका आकर्षण घटने की कोई वजह नहीं है।' दूसरी तरफ, जिन निवेशकों ने किसी के बताने पर या रोजाना तेज उतार-चढ़ाव वाली उन कंपनियों में निवेश किया है, उन्हें अपने पोजीशन पर पुनर्विचार करना चाहिए और देखना चाहिए कि क्या ऐसेे निवेश से बाहर निकलने में समझदारी है? 
कीवर्ड share, market, sensex, बीएसई, कंपनी, शेयर,

  
X

शेयर बॉक्स

पर्मलिंक