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अच्छे और बड़े शेयर ही भले, बाकी से रखें फासले

विशाल छाबडिय़ा |  Feb 11, 2018 09:49 PM IST

घरेलू बाजार लगातार गिरावट का शिकार बना हुआ है। कई विश्लेषक कह रहे हैं कि अभी गिरावट पूरी नहीं हुई है और बाजार पर दबाव बना हुआ है। हालांकि इस गिरावट में भी निवेशक कुछ उम्मीद देख सकते हैं। विश्लेषक आगाह कर रहे हैं कि बाजार में शेयरों के बढ़े हुए भाव बढ़ते बॉन्ड प्रतिफल के लिहाज से ज्यादा हैं और आय वृद्घि में अभी वांछित तेजी नहीं आई है। उनका कहना है कि ऐसी सूरत में अच्छे प्रबंधन और मजबूत आय संभावना वाली कंपनियां गिरावट वाले बाजार में निवेशकों के लिए सुरक्षित दांव साबित हो सकती हैं।

 
इतना ही नहीं, वैश्विक वृद्घि बढऩे से वे घरेलू कंपनियां बेहतर हो सकती हैं जो अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कारोबार कर रही हैं। आईटी जैसे क्षेत्र और चुनिंदा दवा कंपनियां अच्छा प्रतिफल दे सकती हैं या कम से कम गिरावट के दौर में आपकी मददगार हो सकती हैं। क्रेडिट सुइस में शोध विश्लेषक नीलकंठ मिश्रा ने हाल में जारी एक रिपोर्ट में कहा है, 'वित्त वर्ष 2019 में जीडीपी के अनुपात में सरकारी खर्च कम रहने से हम घरेलू वृद्घि को लेकर चिंतित हैं। इतना कम खर्च कई दशकों में दिख रहा है। हम ऊर्जा, धातु, आईटी सेवाओं (जिनका वैश्विक कारोबार है) और सरकारी बैंकों को तरजीह दे रहे हैं।' क्रेडिट सुइस के पसंदीदा शेयरों में लार्सन ऐंड टुब्रो, महिंद्रा ऐंड महिंद्रा और टाटा स्टील शामिल हैं। आईटीसी, कमिंस और मदरसन सूमी को भी वह पसंद कर रहे हैं। इस बीच बढ़ती महंगाई, केंद्र सरकार के राजकोषीय घाटे के लक्ष्य से फिसलने और कच्चे तेल की मजबूत वैश्विक कीमतों को देखते हुए आरबीआई ने भी अपने नीतिगत रुख में थोड़ी सख्ती दिखाई है। कुछ बाजार विशेषज्ञ अल्पावधि से मध्यावधि में भारतीय मुद्रा में थोड़ी गिरावट का अनुमान जता रहे हैं। रुपया पिछले एक सप्ताह में डॉलर के मुकाबले पहले ही एक प्रतिशत से अधिक गिर चुका है। लेकिन कमजोर रुपया भारत फोर्ज, मदरसन सूमी जैसी निर्यात-केंद्रित कंपनियों के लिए मददगार भी साबित हो सकता है।
 
इसी तरह, अगर विकसित देशों में सुधरते आर्थिक परिदृश्य के बीच जिंस कीमतें मजबूत बनी रहती हैं तो इससे टाटा स्टील, हिंडाल्को, वेदांत और ओएनजीसी जैसी धातु और ऊर्जा कंपनियों को भी फायदा होगा।  ज्यादातर बाजार विश्लेषकों की आम राय यह है कि निवेश के लिए लार्ज कैप बेहतर हैं। छोटे शेयरों में 10 से 20 फीसदी की बड़ी गिरावट के बावजूद वे बड़े शेयरों के पक्ष में हैं। मोतीलाल ओसवाल इंस्टीट्ïयूशनल इक्विटीज में शोध प्रमुख गौतम दुग्गड कहते हैं, 'आय में सुधार हो रहा है। वित्त वर्ष 2018 की तीसरी तिमाही की आय अभी तक उम्मीदों के अनुरूप है। हमारा मानना है कि इस गिरावट में 2-3 साल के लिहाज से खरीदारी के लिए अच्छा अवसर है। मिडकैप की तुलना में लार्ज-कैप हमारी पसंद बने हुए हैं। हालांकि निफ्टी का मूल्यांकन वित्त वर्ष 2019 के  अनुमानित ईपीएस के 17-17.5 गुना पर है जो बहुत सस्ता भी नहीं है।'
 
क्षेत्रों के संदर्भ में बात की जाए तो दुग्गड बैंकों (चुनिंदा निजी बैंक जो खुदरा और कॉरपोरेट उधारी दोनों क्षेत्रों में हैं) के साथ साथ कुछ गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों और खपत से जुड़े शेयरों को भी तरजीह दे रहे हैं। उनका कहना है कि आईटी और फार्मा उन निवेशकों के लिए अच्छे साबित हो सकते हैं जो धैर्य रखें और थोड़े लंबे समय के लिए निवेश करें। घरेलू क्षेत्र में एचडीएफसी बैंक, इंडसइंड बैंक के साथ-साथ आईसीआईसीआई जैसे कॉरपोरेट बैंक को भी प्रमुख शेयर के रुप में रखने की सलाह दी गई है। इसी तरह मारुति, एमऐंडएम, डाबर के साथ साथ आईटीसी जैसे ग्रामीण और खपत केंद्रित शेयर भी अच्छा प्रदर्शन करते दिख रहे हैं। निवेशकों के लिए एक मुख्य सलाह यह है कि उन्हें हड़बड़ी न करते हुए अनुशासित रहना चाहिए और दुस्साहस के बजाय अच्छे बुनियादी आधार वाले शेयरों पर टिके रहना चाहिए।
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