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सर्किल रेट पर बजट प्रस्ताव से रियल एस्टेट सौदों पर होगा असर

तिनेश भसीन |  Feb 11, 2018 09:50 PM IST

अब खरीदार और बिकवाल को महानगरों, खासकर उपनगरीय क्षेत्रों में जायदाद के एग्रीमेंट (करारनामा) मूल्य और स्टांप शुल्क मूल्य में अंतर 5 प्रतिशत से कम रहने पर अतिरिक्त कर का भुगतान नहीं करना होगा। केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बजट में इस राहत का प्रस्ताव दिया है। फिलहाल अगर जायदाद का बिक्री मूल्य सर्किल रेट से कम पर होता है तो दोनों के अंतर को खरीदार की आय में जोड़ करके उस पर कर लगाया जाता है। यहां तक कि बिकवाल को भी सर्किल रेट के आधार पर पंूजीगत लाभ की गणना करनी होती है और इस अंतर के कारण उसे अधिक कर देना पड़ता है। सर्किल रेट जायदाद का सरकार द्वारा तय मानक या संदर्भ मूल्य होता है, जिसके हिसाब से स्टांप शुल्क की गणना करके कर लगाया जाता है। इसे 'रेडी रेकनर' या 'कलेक्टर रेट' भी कहा जाता है।

 
अगर 1 करोड़ रुपये मूल्य की किसी संपत्ति का सौदा होता है, लेकिन सर्किल रेट 1 करोड़ 5 लाख रुपये है तो पहले खरीदार को अपनी कर श्रेणी के अनुसार 5 लाख रुपये पर कर देना होता था। उदाहरण के लिए 30 प्रतिशत कर दायरे में आने वाला व्यक्ति कर के रूप में 150,000 का भुगतान करना होता था। इस अंतर को खरीदार के लिए आय कर अधिनियम के प्रावधान 45(2) के तहत मुनाफा समझा जाता है। लेकिन अब उसे 5 प्रतिशत तक के अंतर तक कर का भुगतान नहीं करना होगा। जायदाद की बिक्री करने वाले किसी व्यक्ति को धारा 50सी के तहत स्टांप शुल्क की निर्धारित कीमत पर पूंजीगत लाभ की गणना करनी होती है। अब विके्रता की कर देनदारी थोड़ी कम हो जाएगी। उदाहरण के लिए अगर मौजूदा समय में मुनाफा 798,120 रुपये रहा होता तो कर देनदारी में 1 लाख रुपये की कमी आ जाएगी। 
 
मगर उस स्थिति में क्या होगा जब जायदाद मूल्य और सर्किल रेट में अंतर 5 प्रतिशत से अधिक रहता है? ऐसी स्थिति में खरीदार और बिकवाल को प्रस्तावित कर का लाभ नहीं मिलेगा। टैक्समैन डॉट कॉम के प्रबंध निदेशक नवीन वाधवा कहते हैं, 'अंतर 5 प्रतिशत या इससे कम रहना चाहिए। ऐसा नहीं होने पर मौजूदा कराधान प्रणाली लागू होगी।' ये बदलाव केवल आय कर उद्देश्यों के लिए ही किए गए हैं। वाधवा कहते हैं, 'अगर सर्किल रेट अधिक है तो भी खरीदार को संबंधित राज्यों के मानक मूल्यों के आधार पर स्टांप शुल्क का भुगतान करना होगा।' विशेषज्ञों का कहना है कि महानगरों के उपनगरीय इलाकों में ऐसा अंतर देखा जाता है। रियल एस्टेट कंसल्टैंसी कंपनी लाइजेज फोराज के प्रबंध निदेशक पंकज कपूर कहते हैं, 'उपनगरीय क्षेत्रों में सर्किल रेट आम तौर पर वास्तविक मूल्य के करीब होते हैं। छोटे शहरों में ये और भी कम होते हैं।' 
 
बजट प्रस्ताव से उन क्षेत्रों में खरीदारों और बिकवालों को लाभ होगा, जहां पिछले दो से तीन साल में जायदाद की कीमतों में खासी कमी आई है। जेएलएल इंडिया में शोध प्रमुख आशुतोष लिमये कहते हैं, 'दिल्ली-एनसीआर में गुरुगाम पर विचार करें तो कुछ इलाकों में कीमतें सरकारी मानक कीमत से भी कम है। यह अलग बात है कि राज्य सरकार ने भी कुछ जगहों पर पिछले दो साल में सर्किल रेट कम कर दिए हैं। हालांकि नियम ऐसे हैं कि खरीदार और विक्रेता को अंतर पर अपनी जेब से कर भुगतान करना होता है।' 
 
लिमाये ने कहा कि ऐसे मौके भी हैं जब अगल-बगल की दो जायदाद की बिक्री अलग-अलग कीमतों पर होती है, लेकिन दोनों के लिए सर्किल रेट एक जैसे होते हैं। सरकार अब ऐसी असमानता को मान रही है। बजट भाषण में जेटली ने इस बदलाव के कारण भी बताए हैं। उन्होंने कहा, 'कभी-कभी भूखंड के आकार और स्थिति सहित विभिन्न कारणों से एक ही क्षेत्र में विभिन्न जायदाद में अंतर पाया जाता है। लेकिन अब खरीदार और बिकवाल को महानगरों खासकर उपनगरों में जायदाद के  एग्रीमेंट मूल्य और स्टांप शुल्क में अंतर 5 प्रतिशत से कम रहने पर कर नहीं देना होगा।'
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