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कटौती के बाद भी ईपीएफ बेहतर बचत योजना

सोमेश झा और संजय कुमार सिंह |  Feb 25, 2018 07:19 PM IST

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) ने लगातार पांचवें साल भविष्य निधि पर दी जाने वाली ब्याज दरों में कमी की है। इस तरह वर्ष 2017-18 के लिए नई दर 8.55 फीसदी होगी जो इससे पिछले साल 8.65 प्रतिशत थी। पिछले पांच साल में ईपीएफ की यह सबसे कम दर होगी। पिछले हफ्ते ईपीएफओ के केंद्रीय ट्रस्टी बोर्ड की 220 वीं बैठक हुई। इसकी अध्यक्षता करते हुए श्रम एवं रोजगार मंत्री संतोष कुमार गंगवार ने कहा, 'मौजूदा परिदृश्य को ध्यान में रखते हुए काफी विचार-विमर्श के बाद हमने ब्याज दर 8.55 प्रतिशत करने का फैसला किया है। हमारे पास पर्याप्त मात्रा में अधिशेष राशि है और आशा है कि वित्त मंत्रालय इसे स्वीकृति दे देगा।' 

 
वर्ष 2016-17 में ईपीएफओ के अंशधारकोंं को 8.65 प्रतिशत ब्याज मिलता था। ईपीएफओ द्वारा अपने सदस्यों को दी जाने वाली ब्याज दर में लगातार काफी कमी हो रही है। वर्ष 2015-16 में यह 8.8 प्रतिशत और 2014-15 एवं 2013-14 में 8.75 प्रतिशत थी। हालांकि ईपीएफओ में निवेश करने वालों को अधिक चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। पिछले कुछ समय से सार्वजनिक भविष्य निधि (पीपीएफ) समेत सभी लघु बचत योजनाओं की ब्याज दरें लगातार कम होती जा रही हैं। उस हिसाब से देखें तो यह अब भी सबसे अच्छी दर है। दिसंबर 2017 में सरकार ने लघु बचत योजनाओं की ब्याज दरों में 20 आधार अंकों की कटौती कर दी थी। सेबी में पंजीकृत निवेश सलाहकार फर्म पर्सनल फाइनेंस प्लान डॉट इन के संस्थापक दीपेश राघव कहते हैं, 'इस समय पीपीएफ पर 7.6 प्रतिशत ब्याज मिलता है। अर्थव्यवस्था में ब्याज दरों का बेंचमार्क कहलाने वाले 10 वर्षीय सरकारी बॉन्ड पर प्राप्तियों की दर लगभग 7.71 प्रतिशत है। इस लिहाज से ईपीएफ अभी भी बेहतर विकल्प लगता है।'  उन्होंने कहा, 'ईपीएफओ इतनी ऊंची ब्याज दर इसलिए दे सकेगा क्योंकि उसके पोर्टफोलियो में कई ऐसे पुराने बॉण्ड हैं जिनकी दर अधिक है। इसलिए अंशधारकों को उस दिन का इंतजार करना चाहिए जब ईपीएफओ अपने ऋण हिस्से यानी डेट फंड के लिए निश्चित ब्याज दर की घोषणा करेगा और इक्विटी हिस्से के बदले अपने निवेशकों को यूनिट देगा।'
 
बैठक में मौजूद मजदूर संगठन के नेताओं ने बताया कि सरकार ब्याज दर को और घटाकर 8.5 प्रतिशत करना चाहती थी लेकिन उन लोगों ने इस प्रस्ताव का जोरदार विरोध किया। सभी श्रम संगठनों के विरोध के कारण इसे 8.55 प्रतिशत किया गया।  हालांकि दरों में 10 आधार अंकों की कमी के बाद भी छोटी बचत योजनाओं में ईपीएफ सबसे बेहतर विकल्प है। 8.55 प्रतिशत की ब्याज दर पर ईपीएफओ के पास 8.5 अरब रुपये का अधिशेष होगा। ईपीएफओ अपनी आय का एक हिस्सा सभी देनदारियों के बाद सरप्लस के रूप में रखता है। देनदारी कम होने पर अधिशेष बढ़ जाएगा। अगर वह 8.65 प्रतिशत की मौजूदा दर बरकरार रखता तो अधिशेष 48 करोड़ रुपये रहता और अगर ब्याज दर 8.6 प्रतिशत होती हो यह राशि 320 करोड़ रुपये होती। 
 
गंगवार का कहना था कि ईपीएफ के तहत दी जाने वाली ब्याज दर सामान्य भविष्य निधि (जीपीएफ) और सार्वजनिक भविष्य निधि (पीपीएफ) द्वारा दी जा रही 7.6 प्रतिशत की ब्याज दर से काफी अधिक है। ईपीएफओ के केंद्रीय भविष्य निधि आयुक्त वी. पी. जॉय ने यह कहते हुए इसे जायज बताया, 'पिछले वर्ष जब हमने अपनी ब्याज दर 8.65 प्रतिशत रखने की घोषणा की थी, तब जीपीएफ के सदस्यों को 8 प्रतिशत का रिटर्न मिल रहा था। तब इन दोनों निधियों की दरों में 0.65 प्रतिशत का अंतर था। आज यह अंतर 0.95 प्रतिशत है।' वर्ष 2018 की जनवरी-मार्च तिमाही में पीपीएफ और राष्ट्रीय बचत पत्र (एनएससी) पर 7.6 प्रतिशत की सालाना ब्याज दर मिलेगी, वहीं 11 महीने की परिपक्वता अवधि वाले किसान विकास पत्र पर 7.3 प्रतिशत की दर से ब्याज मिलेगा। बालिका बचत योजना यानी सुकन्या समृद्धि खातों पर ब्याज दर 8.1 प्रतिशत रखी गई है। वहीं 1 से 5 वर्ष के सावधि जमाओं पर 6.6 से लेकर 7.4 प्रतिशत तक का ब्याज मिलेगा जो हर तीन महीने मेंं दिया जाएगा। साथ ही, 5 वर्षीय आवृत्ति जमा (रिकरिंग डिपॉजिट) की ब्याज दर 6.9 प्रतिशत है। पिछले वर्ष  मध्यम और लंबी अवधि के गिल्ट फंडों का प्रदर्शन भी काफी खराब रहा था। इन योजनाओं की श्रेणी में औसत रिटर्न 2.08 प्रतिशत रहा और इसकी मुख्य वजह थी 10 वर्षीय बॉन्ड की प्राप्तियों में तेजी। 
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