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योजनाबद्ध निकासी से मिलेगी नियमित आय

तिनेश भसीन |  Feb 25, 2018 07:21 PM IST

जिन म्युचुअल फंड निवेशकों ने इक्विटी फंडों के लाभांश विकल्प (डिविडेंड ऑप्शन) को चुन रखा है, उन्हें 1 अप्रैल 2018 से मिलने वाली रकम पर 10 प्रतिशत कर का भुगतान करना होगा। जिन लोगों को रकम की जरूरत नहीं है, उन्हें तत्काल ग्रोथ वाला विकल्प चुनना चाहिए और केवल जरूरत पडऩे पर ही इसे भुनाना चाहिए। नियमित आय के लिए लाभांश विकल्प चुनने वाले निवेशकों को योजनाबद्ध निकासी यानी सिस्टमैटिक विड्रॉल प्लान (एसडब्ल्यूपी) का चयन करना चाहिए, जो कर बचत के लिहाज से अधिक फायदेमंद है। 

 
एसडब्ल्यूपी में कर की गणना केवल पंूजीगत लाभ पर होती है, न कि फंड से मिलने वाली पूरी रकम पर। इससे कराधान कम हो जाता है। दूसरी तरफ लाभांश विकल्प में निवेशक को प्राप्त होने वाली पूरी रकम पर कर का भुगतान करना होता है। मिसाल के तौर पर अगर आपने 80 रुपये शुद्ध परिसंपत्ति मूल्य (एनएवी) के हिसाब से 80,000 रुपये किसी इक्विटी म्युचुअल फंड योजना में निवेश किए हैं तो आपको योजना के 10,000 यूनिट मिलेंगे। जब एनएवी 100 रुपये पर पहुंच जाता है और आप हर महीने 1,000 रुपये (100 यूनिट) की निकासी यानी एसडब्ल्यूपी शुरू करते हैं तो आपको एक साल में 12,000 रुपये मिलेंगे। चूंकि, कराधान केवल पूंजीगत लाभ पर ही लगेगा। इसलिए आप 360 रुपये (लघु अवधि के पूंजीगत लाभ के मामले में 2,400 रुपये पर 15 प्रतिशत) भुगतान करेंगे। अगर पूंजीगत लाभ दीर्घावधि हुआ तो यह रकम 240 रुपये होगी। दूसरी तरफ लाभांश कर लगा तो आपको 1,200 रुपये बतौर कर देने होंगे। एसडब्ल्यूपी ऑप्शन में निवेशक को नियमित तौर पर एक तय रकम मिलती है। लाभांश विकल्प में लाभांश भुगतान की अवधि और रकम फंड कंपनी निर्धारित करती है और इसे निवेशक तय नहीं कर सकता। फंड कंपनियां फंड द्वारा अर्जित अधिशेष रकम से ही लाभांश का भुगतान कर सकती हैं। अगर इस अधिशेष रकम में कमी या गिरावट आती है तो फंड कंपनी भुगतान बंद करने के लिए स्वतंत्र होती है। एसडब्ल्यूपी का दूसरा लाभ यह है कि 1,00,000 रुपये तक के दीर्घावधि पूंजीगत लाभ पर कोई कराधान नहीं होगा। लाभांश विकल्प के तहत आपको मिलने वाली किसी भी रकम पर कर चुकाना होगा। 
 
लैडर7 फाइनैंशियल एडवाइजरीज के संस्थापक सुरेश सद्गोपन कहते हैं, 'निवेशकों को सामान्य परिस्थितियों में नियमित आय के लिए शेयरों पर ही निर्भर नहीं रहना चाहिए। जब कोई इक्विटी फंड नकारात्मक रिटर्न दे रहा होता है तो उस स्थिति में किसी तरह की निकासी पूंजी ह्रïास का कारण बन सकती है। नियमित आय के लिए निवेशकों को शॉर्ट-टर्म डेट फंड में एसडब्ल्यूपी का विकल्प चुनना चाहिए।' चूंकि, शॉर्ट-टर्म डेट फंड में उतार-चढ़ाव कम होता है, इसलिए बाजार में गिरावट के समय पूंजी ह्रïास का जोखिम भी कम होता है। डेट फंड में एसडब्ल्यूपी की सुविधा कर बचत के लिहाज से भी मददगार है। डेट फंडों पर एलटीसीजी कर की दर कुछ सालों के निवेश के बाद इक्विटी फंडों पर दर के मुकाबले कम हो सकती है। इंडेक्सेशन लाभ के कराण ऐसा होता है। 
 
कुछ निवेश प्रबंधकों का कहना है कि अगर निवेशकों ने निवेश के कुछ सालों बाद मोटी रकम संचित कर ली है तो इक्विटी में एसडब्ल्यूपी विकल्प लेने में कोई हर्ज नहीं है। ऐसी स्थिति में निवेशक अपने मुनाफे से ही रकम निकालेगा, इसलिए पूंजी ह्रïास का अधिक जोखिम नहीं होगा। साथ ही निवेशक को संचित रकम की तुलना में काफी कम रकम निकालनी चाहिए। अगर आपका शेयरों से प्रतिफल पहले से ही 10 से 12 प्रतिशत रहा है तो आपको एक साल में जमा कोष का केवल 1 से 3 प्रतिशत हिस्सा निकालना निकालना चाहिए। इससे आपका कोष निरंतर बढ़ता रहेगा। अगर आपका कोष 1 करोड़ रुपये है तो सालाना अधिक से अधिक आपको 2 लाख रुपये से 3 लाख रुपये निकालने चाहिए। 
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