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दूरसंचार में गरमाई कंटेंट की लड़ाई

राम प्रसाद साहू |  Feb 25, 2018 09:53 PM IST

प्रमुख दूरसंचार कंपनियों भारती एयरटेल, आइडिया सेल्युलर, वोडाफोन और रिलायंस जियो के बीच उपभोक्ता बाजार भागीदारी के लिए संघर्ष कंटेंट आधारित पेशकशों की ओर आकर्षित हो रहा है। मूल्य निर्धारण दबाव और नियामकीय समस्याओं के बीच अपना आधार बनाए रखने के लिए संघर्ष कर रही दूरसंचार कंपनियों को अब कंटेंट आधारित बाजार के साथ चुनौती का सामना करना पड़ रहा है, जहां रुझान रिलायंस जियो की तरफ झुकता दिख रहा है। डॉयचे बैंक के श्रीनिवास राव के नेतृत्व में विश्लेषकों का मानना है कि दूरसंचार कंपनियों के लिए कंटेंट नया प्रतिस्पर्धी कारक है। उनका कहना है, 'कंटेंट निर्माण के अलावा, कीमत 4जी फीचर फोन या जियोफोन के लॉन्च के दौरान प्रमुख विभेदकों में से एक रहा। एयरटेल के विपरीत, टीवी और डिजिटल कंटेंट में जियो अपनी मूवी लाइब्रेरी और निवेश के स्वामित्व से संपन्न है।' मुख्य संपत्तियों में, रिलायंस जियो की पैतृक कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज नेटवर्क-18 और एंटरटेनमेंट गु्रप कंपनियों की मालिक है।

 
जहां दूरसंचार कंपनियों को मोबाइल सेवाओं में अपनी बाजार भागीदारी बनाए रखने/बढ़ाने में मदद मिल रही है वहीं कंटेंट स्वयं में एक बड़ा अवसर है। विश्लेषकों का मानना है कि लगभग 2 लाख करोड़ रुपये की संभावनाओं के अनुमान और वित्तीय स्थिति को देखते हुए इससे उन कंपनियों को मदद मिल सकती है जो अपना राजस्व और लाभ बढ़ाने के लिए इस अवसर का बड़ा हिस्सा हासिल करने में सक्षम हैं।  सितंबर 2016 में अपनी सेवाएं शुरू (वाणिज्यिक तौर पर वित्त वर्ष 2018 में शुरुआत) करने वाली रिलायंस जियो ने 14 प्रतिशत बाजार भागीदारी पहले ही हासिल कर ली है। हाल में उसकी पैतृक रिरलायंस इंडस्ट्रीज (आरआईएल) ने इरोस इंटरनैशनल में 5 प्रतिशत हिस्सेदारी हासिल की और कंटेंट के सह-निर्माण के लिए इरोस इंटरनैशनल मीडिया के साथ भागीदारी भी की। कंपनी ने वायाकॉम 18 में निवेश किया है और बालाजी टेलीफिल्म्स में उसकी 25 फीसदी हिस्सेदारी है जो उसके उपयोगकर्ताओं को जियो सिनेमा, जियो टीवी और जियो म्यूजिक जैसे ऐप के जरिये ओरिजनल कंटेंट तक पहुंच बनाने की अनुमति देगी। 
 
एयरटेल भी अपनी कंटेंट पेशकश को मजबूत बना रही है और उसने पोस्ट-पेड प्लांस के साथ एमेजॉन की प्राइम सदस्यता के लिए हॉटस्टार और एमेजॉन के साथ भागीदारी की घोषणा की है। कंपनी एयरटेल टीवी तक मुफ्त पहुंच पहले से ही उपलब्ध करा रही है जिसमें जून 2018 तक ग्राहकों के लिए हूक और सोनी लिव का कंटेंट शामिल है। एयरटेल ने विंक और जुगरनॉट बुक्स जैसी म्यूजिक स्ट्रीमिंग सेवाओं में निवेश कर रखा है। इसी तरह, वोडाफोन अपने प्लेटफॉर्म वोडाफोन प्ले ऐप पर कंटेंट की पेशकश कर रही है और अपने प्रीमियम ग्राहकों के लिए नेटफ्लिक्स के साथ करार भी किया है। इस कंटेंट स्लगफेस्ट में देर से प्रवेश करने वाली आइडिया सेल्युलर ने हंगामा डिजिटल और इरोस के साथ करार किया है और वह कंटेंट वितरित करने के लिए अपने ऐप आइडिया म्यूजिक और आइडिया मूवीज का इस्तेमाल कर रही है। 
 
जहां उसके प्रतिस्पर्धियों ने विभिन्न कंपनियों के साथ कंटेंट शेयरिंग में प्रवेश किया है, वहीं रिलायंस जियो इसमें मजबूती दर्ज कर रही है और कंटेंट निर्माताओं के साथ अपनी भागीदारियों और स्वामित्व के जरिये अपना स्वयं का एक्सक्लूसिव कंटेंट तैयार कर रही है। इससे उसे उस व्यवसाय में बढ़त हासिल हो सकती है जिसमें किसी की सेवाओं और पेशकशों को खास बनाना बेहद जरूरी है। ऐम्बिट कैपिट के विवेकानंद सुब्बारमन और दीप शाह का कहना है, 'हमें विश्वास है कि कंटेंट भागीदारियों के मौजूदा दृष्टिïकोण के विपरीत, जीरो-रेटेड एक्सेस स्ट्रेटेजी (डेटा पैक की सीमा घटाए बगैर कुछ खास ऐप पर विशेष कंटेंट) जियो को अन्य कंपनियों से अलग दिखने में मददगार साबित हो सकती है और अधिक वैल्यू वाले पोस्ट-पेड ग्राहक जोडऩे में मदद कर सकती है।' मौजूदा समय में 5.1 करोड़ हाई-वैल्यू पोस्ट-पेड ग्राहक हैं जिनका उपयोगकर्ता आधार पर पांच प्रतिशत है, लेकिन इस सेक्टर के राजस्व में उनकी भागीदारी 20 फीसदी की है। दूरसंचार क्षेत्र के लिए अन्य समस्या है कंटेंट की बिक्री, जो मौजूदा समय में नि:शुल्क है। एक्सक्लूसिव कंटेंट सौदों और ग्राहक पसंद को सीमित करने वाले सौदों पर नियामकीय सख्ती को देखते हुए दूरसंचार कंपनियों को भुगतान के लिए सबस्क्रिप्शन मॉडल जैसे विकल्पों पर विचार करने की जरूरत होगी। 
 
यूबीएस के विश्लेषकों का मानना है कि रिलायंस जियो के लिए डिजिटल कंटेंट की बिक्री वित्त वर्ष 2019 में शुरू हो सकती है और डिजिटल राजस्व अगले पांच साल के दौरान दोगुना हो जाने का अनुमान है। उनका मानना है कि जियो का डिजिटल कंटेंट राजस्व वित्त वर्ष 2019 में 23 अरब रुपये पर है जो वित्त वर्ष 2023 में बढ़कर 70 अरब रुपये हो सकता है। ऐसे परिदृश्य में दूरसंचार कंपनियों को लाभ मिलना चाहिए। यह ध्यान देने की बात है कि ग्राहकों में कंटेंट के लिए भुगतान करने का रुझान भी बढ़ा है और ये सभी बदलाव दूरसंचार उद्योग के लिए अच्छी खबर हैं।  मौजूदा समय में मोबाइल सेवाओं में व्यापक दबाव को देखते हुए कई विश्लेषक दूरसंचार शेयरों पर सतर्क बने हुए हैं। 
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