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विस्तार के जरिये सेल ने की दमदार वापसी

उज्ज्वल जौहरी |  Feb 25, 2018 09:55 PM IST

भारतीय इस्पात प्राधिकरण (सेल) ने 10 तिमाहियों के बाद अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में शुद्ध मुनाफा दर्ज किया है। सेल और इसकी प्रतिस्पद्र्धी इस्पात कंपनियों को पिछले दो सालों के दौरान विभिन्न सरकारी उपायों की बदौलत अधिक आमदनी का लाभ जरूर मिल रहा था, लेकिन ये (प्राप्तियां) पूरी तरह शुद्ध मुनाफे में तब्दील नहीं हो पा रही थीं। सेल की ऊंची लागत संरचना ने परिचालन मुनाफे पर अंकुश लगा रखा था। इस वजह से परिचालन मुनाफा उस समय विस्तार कार्यक्रम के कारण बढ़ी ब्याज लागत से निपटने में अपर्याप्त साबित हो रहा था। अब क्षमता के आधुनिकीकरण और विस्तार कार्यक्रम अंतिम चरण में पहुंचने से सेल के लिए स्थितियां बेहतर हो रही हैं। कारोबार में इजाफा होने से लाभ भी मिल रहा है, जबकि लागत में कमी के प्रयासों से प्रति टन उत्पादन खर्च भी घट गया है। 

 
क्षमता विस्तार
 
सेल सालाना 2.02 करोड़ टन बिक्री का लक्ष्य लेकर चल रही है और अगर इसके नए संयंत्रों में काम जल्द पूरा हो जाता है तो जल्द ही यह देश की सबसे बड़ी इस्पात निर्माता कंपनी बन सकती है। क्रमश: 1.8 करोड़ टन और 1.3 करोड़ टन मौजूदा क्षमता के साथ जेएसडब्ल्यू स्टील और टाटा स्टील भी तेजी से बढ़ रही हैं। टाटा स्टील ओडिशा के कलिंगनगर संयंत्र में अपने विस्तार कार्यक्रम के दूसरे चरण के जरिए अगले दो सालों में 1.8 करोड़ टन क्षमता हासिल करना चाहती है। जेएसडब्ल्यू भी महाराष्टï्र के डोल्वी में अपनी क्षमता दोगुनी कर 1 करोड़ टन कर रही है। ये दोनों कंपनियां ऋण चुकाने में नाकाम कंपनियों की परिसंपत्तियों की नीलामी बोलियों में शामिल हो रही हैं। वर्ष 2016-17 में सेल ने 1.39 करोड़ टन इस्पात की बिक्री की थी। कंपनी ने राउरकेला, बोकारो, आसनसोल और दुर्गापुर संयंत्रों में विस्तार कार्यक्रम कमोबेश पूरा कर लिया है। छत्तीसगढ़ के भिलाई में एक मेल्टिंग शॉप लगने के साथ ही कंपनी का मौजूदा पूंजीगत व्यय कार्यक्रम समाप्त हो जाएगा। उत्पादों में विविधता बढ़ाने से मूल्य वद्र्धित उत्पादों की हिस्सेदारी बढ़ी है, जिससे कंपनी को बाजार हिस्सेदारी जुटाने में मदद मिल रही है।
 
कारोबार और मुनाफा
 
कंपनी प्रबंधन के मुनाफे संबंधी अनुमानों पर इलारा कैपिटल के विश्लेषकों का कहना है कि वित्त वर्ष 2017 से 2020 के दौरन सेल की बिक्री सालाना 11 प्रतिशत चक्रवृद्धि दर से बढ़ेगी। इसके विश्लेषकों का कहना है कि सेल की नई मूल्य वद्र्धित उत्पाद मिलों में उत्पादन बढऩे से भी मदद मिलेगी। आधुनिकीकरण एवं विस्तार योजना पूरी होने के बाद इसके परिणाम भी दिखने शुरू हो गए हैं। 30 लाख टन सालाना क्षमता वाले नई ब्लास्ट फर्नेस से सेल के कमजोर प्रदर्शन का सिलसिला थमेगा। दूसरी तरफ कंपनी की स्टील मेल्ट शॉप भी वित्त वर्ष 2019 में काम करना शुरू कर देगी। मोतीलाल ओसवाल के विश्लेषकों का कहना है कि इससे परिचालन लागत कम हो जाएगी। इस ब्रोकरेज कंपनी के विश्लेषकों के अनुसार कोल के इस्तेमाल और ब्लास्ट फर्नेस की उत्पादकता में सुधार दिखने भी लगे हैं। सेल उपभोक्ताओं तक पहुंच वाली एक एकीकृत श्रृंखला स्थापित करने पर भी विचार कर रही है। इससे मध्यम से दीर्घ अवधि में प्राप्तियों पर भी सकारात्मक असर होना चाहिए। 
 
मजबूत तिमाही
 
इस बीच, सेल के कारोबार और प्राप्ति में सालाना आधार पर क्रमश: 14 प्रतिशत और 18.7 प्रतिशत सुधार से बिक्री दिसंबर तिमाही में एक साल पहले के मुकाबले 36 प्रतिशत अधिक हो गई। सितंबर तिमाही में परिचालन लाभ प्रति टन करीब 3,820 रुपये रहा जबकि सितंबर तिमाही में यह 2,583 रुपये था और एक साल पहले इसमें प्रति टन 130 रुपये का नुकसान था। ईंधन लागत बढऩे के बावजूद बढ़े कारोबार और अधिक आय से कंपनी को मदद मिली। आधुनिकीकरण कार्यक्रम से ऊर्जा इस्तेमाल में सुधार में मदद मिली, वहीं बिक्री में कर्मचारी पर आने वाली लागत पिछले दो साल में 21 प्रतिशत से कम होकर 16 प्रतिशत रह गई। हालांकि कंपनी को अब भी लंबा सफर तय करना है। जेएसडब्ल्यू स्टील और टाटा स्टील भारतीय कारोबार से प्रति टन क्रमश: 8,500 रुपये और 14,000 प्रति टन मुनाफा कमा रही हैं। 
 
हालांकि विदेशी ब्रोकरेज कंपनी जेफरीज ने थोड़ा आगाह किया है। उसका कहना है कि लंबे उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण मार्जिन में क्रमागत आधार पर बढ़ोतरी हो सकती है, लेकिन इसका खास मतलब नहीं निकाला जाना चाहिए क्योंकि कारोबार के लिहाज से मार्च तिमाही आमतौर पर मजबूत होती है। जेफरीज ने कहा है कि दिसंबर तिमाही में ज्यादा कारकोबार के कारण वेतन लागत प्रति टन सालाना आधार पर 20 डॉलर कम रही थी। पहले हुए नुकसान के कारण सेल ने वेतन में महज 7.5 प्रतिशत इजाफा किया था, जबकि इसके मुकाबले ज्यादातर सरकारी कंपनियों ने वेतन में 20 प्रतिशत से अधिक वृद्धि की थी। 
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