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कर बचत के लिए पूंजीगत लाभ बॉन्ड कितने उपयोगी

तिनेश भसीन |  Mar 04, 2018 11:55 PM IST

यदि किसी निवेशक ने सोना, बॉन्ड, मकान और गैर-सूचीबद्घ शेयर जैसी परिसंपत्तियों को तीन साल रखने के बाद बेचा है और उसे मुनाफा हासिल हुआ है तो कर बचत के लिए पूंजीगत लाभ बॉन्ड अभी तक सर्वश्रेष्ठ विकल्प रहे हैं। लेकिन 1 अप्रैल से कुछ नियम बदल जाएंगे। अब करदाता किसी जमीन-जायदाद से प्राप्त पूंजीगत लाभ को ही इस तरह के बॉन्ड में निवेश कर सकेंगे।
बजट में पूंजीगत लाभ बॉन्डों को सिर्फ संपत्ति तक सीमित रखने का प्रस्ताव किया गया है। साथ ही, ऐसे बॉन्ड की अवधि तीन साल से बढ़ाकर पांच ïवर्ष की गई है। करदाताओं के पास दूसरी तरह की परिसंपत्तियों से हासिल दीर्घावधि पूंजी लाभ बचाने के विकल्प सीमित हो गए हैं।
एक विकल्प है लाभ को आवासीय संपत्ति में निवेश करना और आयकर अधिनियम की धारा 54एफ के तहत लाभ उठाना। टैक्समैन डॉट कॉम के महा प्रबंधक नवीन वाधवा कहते हैं, 'अगर कोई व्यक्ति प्रॉपर्टी के अलावा किसी और दीर्घावधि पूंजी संपत्ति से प्राप्त लाभ को निवेश करता है तो वह उस स्थिति में कर बचा सकता है जब वह कोई घर या मकान खरीद ले।' लेकिन इस मामले में पूरी राशि-मूल और लाभ दोनों को मकान में निवेश करना होगा। पूंजीगत लाभ बॉन्ड में करदाताओं को सिर्फ 50 करोड़ रुपये तक का कर योग्य हिस्सा ही निवेश करने का विकल्प था।
वर्ष 2016 के बजट में वित्त मंत्री ने पूंजीगत लाभ कर बचाने के लिए एक अन्य विकल्प की घोषणा की थी। उन्होंने कहा था कि सरकार स्टार्ट-अप के लिए फंडों को अधिसूचित करेगी और इन फंडों में निवेश करने वाले करदाता उसी तरह कर बचा सकेंगे जैसे वे पूंजीगत लाभ बॉन्ड में निवेश करके बचाते हैं। लेकिन कर जानकारों का कहना है कि ऐसे फंडों को अभी तक अधिसूचित नहीं किया गया है। ये फंड कर बचत के लिए अधिक आकर्षक विकल्प होंगे।
वित्तीय योजनाकारों का कहना है कि अगर आप सिर्फ प्रतिफल देखते हैं तो पूंजीगत लाभ कर बॉन्ड सबसे श्रेष्ठï विकल्प थे। लैडर7 फाइनैंशियल एडवाइजरीज के संस्थापक सुरेश सद्गोपन कहते हैं, 'इनको सरकार की गारंटी है। इनमें प्रतिफल भी गारंटी वाला है। जब कोई व्यक्ति इन बॉन्ड में निवेश करता है तो फिर उसे किसी परिसंपत्ति की बिक्री से प्राप्त लाभ पर किसी तरह का कर चुकाने की जरूरत नहीं होती है। लेकिन इन बॉन्ड से प्राप्त ब्याज पर कर लगता है।'  इस समय भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एचएनएआई) और रूरल इलेक्ट्रिफिकेशन कॉरपोरेशन इन बॉन्डों पर 5.25 फीसदी की ब्याज 
दर दे रहे हैं।
यदि करदाता को संपत्ति के अलावा किसी और दीर्घावधि पूंजीगत परिसंपत्ति से लाभ हासिल होता है और वह धारा 54एफ का इस्तेमाल करने में विफल रहता है तो उसे संबद्घ कर चुकाने की जरूरत होगी। लेकिन परेशान न हों। अगर अच्छे रिकॉर्ड वाले म्युचुअल फंडों में सही ढंग से निवेश किया जाए तो करदाता उसी तरह का प्रतिफल हासिल कर सकता है जैसा उसे धारा 54ईसी के इस्तेमाल के बाद मिलता।
मान लीजिए कि कोई व्यक्ति 1.2 करोड़ रुपये में दीर्घावधि पूंजीगत संपत्ति बेचता है। उसकी कर देनदारी 4.3 लाख रुपये बैठती है। अगर वह इस रकम को पूंजीगत लाभ बॉन्ड में निवेश करता है तो उसे कर के बाद 51.6 लाख रुपये मिलेंगे। 
इसके बजाय अगर वह इक्विटी और डेट में 50:30 के अनुपात में निवेश करता है तो इक्विटी से 12 प्रतिशत और डेट से 7 प्रतिशत प्रतिफल मानें तो उसे कर कटौती के बाद 52.3 लाख रुपये मिलेंगे। लेकिन यदि इक्विटी प्रतिफल घटकर 10 प्रतिशत रह जाए तो भी उसका शुद्घ प्रतिफल 50 लाख रुपये के आसपास होगा। 
कीवर्ड सोना, बॉन्ड, मकान,

  
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