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मार्च समाप्त होने से पहले बनाएं कर निर्धारण योजना

तिनेश भसीन |  Mar 04, 2018 11:57 PM IST

मार्च की समाप्ति में कुछ ही सप्ताह रह गए हैं और आपको अपने सालाना कर नियोजन के लिए सख्त समय-सीमा से जूझना पड़ रहा है। ऐसे में यदि आप जल्दबाजी में निवेश या बीमा उत्पाद खरीद लेते हैं तो इससे गलतियां होने की ज्यादा आशंका है। इस संदर्भ में लोग जो बड़ी गलतियां करते हैं उनमें ऐसे उत्पाद की खरीदारी भी शामिल है जिनमें बाद के वर्षों में आवर्ती निवेश की जरूरत होती है। इसके परिणामस्वरूप आपकी वित्तीय योजना लडख़ड़ा सकती है।
पिछले साल स्कूल शिक्षक चंदन कुमार ने जल्दबाजी में एक पारंपरिक बीमा योजना में निवेश किया था। लेकिन बाद में उन्हें यह महसूस हुआ कि उनकी पॉलिसी से कर-बाद प्रतिफल किसी बैंक सावधि जमा के मुकाबले काफी कम है। कुमार कहते हैं, 'मैं अब इस पॉलिसी को बीच में बंद नहीं करा सकता। शायद तीन साल बाद ऐसा किया जा सकता है, इसलिए मैं इसे पेड-अप पॉलिसी में तब्दील करूंगा जिससे कि आगे और प्रीमियम न चुकाना पड़े।'
अक्सर, लोग बगैर सोचे-समझे उन परिसंपत्ति वर्गों में निवेश कर बैठते हैं जो निवेश के समय तो अच्छा प्रदर्शन कर रहे होते हैं। लैडर7 फाइनैंशियल एडवाइजर्स के संस्थापक सुरेश सदगोपन कहते हैं, 'भले ही किसी ने अभी तक कर-बचत वाला निवेश नहीं किया हो, वह थोड़ी सी नियोजित योजना बनाकर अभी भी कर बचा सकता है और निवेश को अपने लक्ष्य के अनुकूल बना सकता है।' उनके अनुसार, जब बाजार चढ़ता है, तो इक्विटी-लिंक्ड बचत योजनाओं (ईएलएसएस) या यूनिट-लिंक्ड बीमा योजनाओं (यूलिप) में निवेश के प्रति दिलचस्पी बढ़ती है। जब बाजार गिरता है तो निवेश पांच वर्षीय बैंक जमाओं, पारंपरिक योजनाओं या डाकघर की बचत योजनाओं की तरफ आकर्षित 
होता है।
आय कर छूट के लिए योजना बनाने की खास जरूरत है। हालांकि कई मामलों में, आपको खरीदारी की रसीद , बिल या सर्टिफिकेट की जरूरत होती है। उदाहरण के लिए, आवास किराया भत्ता या टर्म लाइफ इंश्योरेंस के लिए। 

जरूरत से ज्यादा न करें निवेश
अन्य मूल समस्या यह है कि कई वित्तीय योजनाकार यह मानते हैं कि 30 फीसदी कर दायरे में शामिल लोगों को तय सीमा की तुलना में कर-बचत योजनाओं में ज्यादा निवेश करने की जरूरत होती है। एक जाने-माने वित्तीय योजनाकार मल्हार मजूमदार कहते हैं, 'यह मुख्य रूप से इसलिए होता है क्योंकि ये लोग असंगठित हैं। यह देखना आम बात है कि ऐसे लोग आवास ऋण, भविष्य निधि, ईएलएसएस और बीमा पर भी पैसा खर्च करते हैं।'
सबसे पहले आप उस कर कटौती का आकलन करें जिसके लिए आप धारा 80सी के तहत क्लेम कर सकते हों, जिसके लिए 150,000 रुपये की सीमा है। मौजूदा समय में लगभग 15 तरह के निवेश और खर्च हैं जिनके लिए कोई व्यक्ति इस धारा में कर छूट का दावा कर सकता है। सही उत्पाद का चयन करने से पहले ईपीएफ की सीमा को ध्यान में रखते हुए निवेश की मात्रा सुनिश्चित करें। उपलब्ध सीमा जानने के लिए इस रकम को 150,000 रुपये से घटाएं।
यदि आपने आवास ऋण ले रखा है तो मूलधन हिस्सा बड़ा योगदान दे सकता है और आपको धारा 80सी की सीमा का पूरा लाभ उठाने में मदद मिल सकती है। यदि आपने संयुक्त रूप से आवास ऋण लिया है तो सिर्फ आपके द्वारा दिए गए योगदान के लिए ही क्लेम करें। यदि यह 50:50 अनुपात में है तो आपको मूल अदायगी के सिर्फ 50 प्रतिशत का ही क्लेम करना चाहिए। यदि आप इस प्रक्रिया को सही तरीके से पूरा करते हैं तो आप कर बचत योजनाओं के संदर्भ में विफल होने से बच सकते हैं। आप इन कोष का ऐसे बेहतर विकल्पों में निवेश के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं जो आपके लक्ष्यों के अनुकूल हों।

ईएलएसएस सभी के लिए उपयुक्त नहीं
ज्यादातर विश्लेषक यही सामान्य सलाह देंगे कि यदि इक्विटी में जोखिम उठाने की क्षमता रखते हैं तो ईएलएसएस में निवेश करें। यह इक्विटी पर 10 प्रतिशत पूंजीगत लाभ कर लगाए जाने के बावजूद भविष्य में कर बचत की पसंदीदा विकल्प बना रहेगा। कर बचत योजनाओं में इसमें तीन वर्ष की सबसे कम लॉक-इन अवधि है और इसमें ज्यादा कर-बाद प्रतिफल देने की संभावना होती है। लेकिन यह हर किसी के लिए उपयुक्त नहीं है। यदि आप 50 साल से कम उम्र के हैं तो ईएलएसएस का चयन कर सकते हैं। मार्च समाप्त होने से पहले अपने निवेश को दो हिस्सों में विभाजित करें। यदि आप 30 साल से कम उम्र के हैं तो आप दीर्घावधि नजरिये के साथ एक-मुश्त निवेश भी कर सकते हैं। 
यदि आप सेवानिवृत होने वाले हैं तो ईएलएसएस से परहेज करें। सेवानिवृति नजदीक होने की वजह से अस्थिर निवेश में फंसना तब तक उचित नहीं है जब तक कि आप अपेक्षित सेवानिवृति कोष तक पहुंचने के लक्ष्य से दूर बने हुए हों। यही सलाह बुजुर्गों के लिए है। 50 साल से अधिक उम्र के लोग म्युचुअल फंडों की सेवानिवृति योजनाओं पर विचार कर सकते हैं। ऐसे फंडों का चयन करें जो डेट-आधारित हों। ये योजनाएं पांच वर्षीय लॉक-इन से जुड़ी होती हैं और डेट-आधारित फंड इक्विटी फंडों की तुलना में कम उतार-चढ़ाव वाले होते हैं।
यदि आप पूरी तरह से इक्विटी से परहेज करना चाहते हैं तो श्रेष्ठï विकल्प वोलंटरी प्रोविडेंट फंड (वीपीएफ) है, क्योंकि इसमें ब्याज दर का भुगतान कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) के अनुसार किया जाएगा। पिछले साल यह दर 8.65 प्रतिशत थी। यदि वीपीएफ विकल्प उपलब्ध नहीं हो तो फिर पीपीएफ अपनाएं जिसमें मौजूदा समय 7.6 फीसदी की ब्याज दर है। मजूमदार कहते हैं, 'चूंकि पीपीएफ दर में नियमित तौर पर उतार-चढ़ाव आता है, ऐसे में इसमें अब तक निवेश नहीं करने वाला व्यक्ति इनसे परहेज कर सकता है। उन लोगों के लिए राष्ट्रीय पेंशन योजना (एनपीएस) बेहतर विकल्प है जो सरकारी योजनाओं में भरोसा करते हैं और उतार-चढ़ाव को सहन कर सकते हैं।'

बुजुर्ग और आश्रितों के लिए लाभ
यदि आपके माता-पिता बुजुर्ग हैं और आप उनके स्वास्थ्य बीमा के लिए भुगतान करते हैं तो आपको 30,000 रुपये तक की कर छूट मिलेगी। यदि माता-पिता 80 साल से अधिक उम्र के हैं, और बीमा के लिए योग्य नहीं हो सकते हैं तो 30,000 रुपये के संयुक्त खर्च का दावा किया जा सकेगा। यदि आपका आश्रित किसी गंभीर बीमारी (कैंसर, तंत्रिका संबंधी रोग, गुर्दा फेल होने की समस्या आदि) से जूझ रहा है तो धारा 80डीडीबी के तहत कर छूट का दावा किया जा सकता है। 60 साल से कम उम्र के आश्रितों के लिए, यह कर छूट 40,000 रुपये तक स्वीकार्य है। वरिष्ठï नागरिकों के संदर्भ में यह सीमा 60,000 रुपये तक और 80 साल से अधिक उम्र के लोगों के लिए 80,000 रुपये तक है। धारा 80डीडी विकलांग आश्रितों के लिए 75,000 रुपये तक का लाभ मुहैया कराती है। 

दान और शैक्षिक ऋण
आप किसी खास तरह की संस्थाओं के लिए दिए गए दान पर 50 प्रतिशत या 100 प्रतिशत कर छूट पा सकते हैं। एक साल में सकल आय का 10 प्रतिशत से अधिक का दान कर छूट के योग्य नहीं होगा। यदि व्यक्ति ने शैक्षिक ऋण ले रखा हो तो उस पर चुकाए जाने वाले ब्याज का इस्तेमाल धारा 80ई के तहत कर छूट के लिए किया जा सकता है। 
कीवर्ड निवेश, बीमा उत्पाद,

  
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