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सेबी ने टाला कर्ज डिफॉल्ट खुलासा नियम

बीएस संवाददाता | मुंबई Mar 07, 2018 10:32 PM IST

पूंजी बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने ऋण डिफॉल्ट खुलासा ढांचे को लागू करने के प्रस्ताव को फिलहाल टाल दिया है। पिछले साल सेबी ने एक परिपत्र जारी कर सूचीबद्ध कंपनियों के लिए किसी भी बैंक ऋण डिफॉल्ट का खुलासा 24 घंटे के भीतर करना अनिवार्य कर दिया था। हालांकि नियामकीय जटिलताओं के कारण इसे लागू होने से एक दिन पहले ही वापस ले लिया गया था। 

 

सेबी के चेयरमैन अजय त्यागी ने उद्योग संगठन आईवीसीए द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान कहा, 'हमारी पिछली बोर्ड बैठक में इस मुद्दे को टाल दिया गया।' जब उनसे पूछा गया कि क्या इसे हमेशा के लिए टाल दिया गया है तो त्यागी ने कहा, 'मैं इस पर कोई टिप्पणी नहीं कर सकता, इस संबंध में निर्णय बोर्ड को लेना है।' सेबी के उस परिपत्र को काफी महत्त्वपूर्ण माना जा रहा था क्योंकि इससे कंपनियों के बीच पारदर्शिता में काफी सुधार हो सकता था। साथ ही इससे सरकार को बैंकिंग उद्योग में परिसंपत्ति गुणवत्ता संबंधी समस्याओं से निपटने में भी मदद मिल सकती थी।

हालांकि बैंकिंग उद्योग ने सेबी के उस परिपत्र पर कई मुद्दे उठाए थे। उदाहरण के तौर पर बैंकों का कहना था कि इस प्रकार डिफॉल्ट के खुलासे से बैंकों के प्रावधान की रकम काफी बढ़ सकती है। 

 

घरेलू निजी इक्विटी (पीई) उद्योग की वृद्धि के बारे में बताते हुए त्यागी ने कहा, 'पिछले कुछ वर्षों के दौरान पीई उद्योग में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। वैकल्पिक फंड उद्योग का पोर्टफोलियो अब विविध हो चुका है और उसके पास करीब 7.7 लाख करोड़ रुपये मूल्य की परिसंपत्ति मौजूद है।' त्यागी ने यह भी कहा कि वैकल्पिक निवेश फंड (एआईएफ) उद्योग के लिएनियमों को काफी उदार बनाया गया है और हमें सावधान रहने की जरूरत है।
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