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कारोबार में तेजी, अनुकूल गतिविधियों से मिलेगी तकनीकी क्षेत्र को धार

राम प्रसाद साहू |  Mar 11, 2018 11:25 PM IST

पिछले सप्ताह सूचना-प्रौद्योगिकी (आईटी) सूचकांक तेजी दर्ज करने वाले प्रमुख क्षेत्रों में एक रहा था। मझोली और छोटी कंपनियों के बेहतर प्रदर्शन की बदौलत इसने बाजार को पछाड़ दिया था। बीच-बीच में बाजार में सामान्य तेजी आ सकती है, जैसी पिछले सोमवार को दिखी थी। हालांकि बाजार मूल्यांकन वित्त वर्ष 2019 की आय के अनुमान का 18 गुना होने से जुड़ी चिंताओं और बिगड़ते आर्थिक हालात के संकेतकों जैसे महंगाई एवं बॉन्ड पर प्राप्तियां बढऩे के बीच निवेशक आईटी क्षेत्र को एक सुरक्षित दांव के रूप में देख रहे हैं। आईटी क्षेत्र के विकास की अच्छी संभावनाओं को देखते हुए भी धारणा इस क्षेत्र के पक्ष में गई हैं। 
डॉलर के मुकाबले रुपये में कमजोरी भी आईटी क्षेत्र के हित में काम करती है। रुपये डॉलर के मुकाबले चार महीने के निचले स्तर पर आ गया है और इस समय करीब 65 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। रुपया कमजोर होने से भारतीय आईटी कंपनियों का मार्जिन बेहतर होगा। इसकी वजह यह है कि भारतीय आईटी कंपनियां अपने राजस्व का 60 प्रतिशत से अधिक हिस्सा अमेरिकी बाजारों से प्राप्त करती हैं। 

आईटी क्षेत्र का प्रदर्शन एक बार फिर सुधरने की उम्मीद है, इसलिए आईटी सूचकांकों में तेजी देखी जा रही है। ग्राहकों की तरफ से आईटी पर बजट कम करने और परंपरागत क्षेत्रों में बड़े स्तर पर मौजूदगी से आईटी कारोबार पर असर पड़ा है। 

इस वजह से पिछले कुछ सालों से आईटी क्षेत्र दिक्कतें झेल रहा है। कई आईटी कंपनियां नई तकनीक अपनाने में भी सुस्ती दिखा रही थीं। फिलहाल निगमित करों में कमी, भौगोलिक कराधान (केवल स्थानीय आय पर कर) की तरफ बढ़ते कदम और प्रावधान संबंधी नियमों आदि से अमेरिकी कंपनियों के मुनाफे में इजाफा हो सकता है। इसके साथ ही ये कंपनियां अपना पूंजीगत व्यय भी बढ़ा सकती हैं। 

ऐंबिट कैपिटल के विश्लेषकों का मानना है कि बैंकिंग, वित्तीय संवाएं एवं बीमा (बीएफएसआई), खुदरा कारोबार, तकनीक और संचार खंड आदि को कर सुधारों का सर्वाधिक लाभ मिल सकता है। ये क्षेत्र टीसीएस और इन्फोसिस जैसी कंपनियों के राजस्व में 64 से 70 प्रतिशत तक योगदान दे सकते हैं। बीएफएसआई भारतीय आईटी कंपनियों के लिए राजस्व के सबसे बड़े स्रोत हैं, लेकिन बैंकिंग एवं खुदरा खंडों में नरमी से कुल बिक्री प्रभावित हुई है। 

ऑनलाइन मार्केटप्लेस आदि पर खर्च बढऩे से अमेरिका में खुदरा कंपनियों की बिक्री में कमी आई है। इससे आईटी कंपनियों के कारोबार पर असर पड़ा है। हालांकि टीसीएस की दिसंबर तिमाही के नतीजे से संकेत मिले हैं कि वित्त वर्ष 2019 में आईटी क्षेत्र दो अंकों में तेजी दर्ज कर सकता है।

डिजिटल खंड में अब बड़े आकार के सौदे होने से भी आईटी क्षेत्र को मदद मिल सकती है। भारत की शीर्ष आईटी कंपनियां इस अधिक तेजी से विकास करने वाले खंड में देरी से प्रवेश करने वाली रही हैं। इस वजह से उन्हें अपने प्रतिस्पद्र्धियों के हाथों नुकसान भी उठाना पड़ा है। डिजिटल राजस्व में इजाफे से बिक्री में तेजी बनी रहने की उम्मीद है। 

कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटी के विश्लेषकों का कहना है कि तीन प्रमुख कारणों- बीएफएसआई खंड में बजट में इजाफा, रुपये में कमजोरी और कम आधार की बदौलत दूसरी आय में तेजी- से वित्त वर्ष 2019 में आईटी क्षेत्र सुधार दर्ज कर सकता है। एक ओर कारोबारी संभावनाएं बढ़ रही हैं, वहीं वित्त वर्ष 2019 के लिए प्राइस-टू-अर्निंग अनुपात करीब 16 गुना के स्तर पर रहने से ब्रोकरेज कंपनियां आईटी क्षेत्र को लेकर सकारात्मक हो रही हैं। 

विश्लेषकों ने कहा कि प्रमुख खंडों में व्यय बढऩे और डिजिटल राजस्व की अधिक हिस्सेदारी से आईटी क्षेत्र की दोबारा समीक्षा हो सकती है। उदाहरण के लिए एक्सेंचर फिलहाल पूर्व के 16 गुना के मुकाबले अपने एक साल के फॉरवर्ड अर्निंग के 23 गुना पर कारोबार कर रहा है।
कीवर्ड सूचना-प्रौद्योगिकी, आईटी, सूचकांक,

  
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