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दमदार आईटीसी दोबारा रेटिंग के लिए तैयार

राम प्रसाद साहू |  Mar 18, 2018 09:32 PM IST

नए उत्पादों को बाजार में उतारकर अपने एफएमसीजी पोर्टफोलियो का दायरा बढाऩे, सिगरेट पर ज्यादा कर का डर खत्म होने और आकर्षक मूल्यांकन की वजह से आईटीसी के शेयरों की दोबारा रेटिंग की उम्मीद बढ़ गई है। विश्लेषकों को उम्मीद है कि गैर-तंबाकू कारोबार और सिगरेट से कारोबार में अच्छी वृद्धि दिखेगी और वित्त वर्ष 2019 में मुनाफे में सुधार होगा।  इसकी प्रमुख वजह उत्पादों की विविधता है। साथ ही कंपनी एफएमसीजी के मौजूदा पोर्टफोलियो में वृद्धि कर रही है। कंपनी ने बेहद कम अवधि में तीन बड़े ब्रांड तैयार किए हैं। इनमें आशीर्वाद भी शामिल है जिसने हाल ही में 40 अरब रुपये के स्तर को पार किया है। वहीं सनफीस्ट (3000 करोड़ रुपये वाला ब्रांड), बिंगो, यिपी, क्लासमेट प्रत्येक ने 1000 करोड़ रुपये से ज्यादा की बिक्री की है। हालांकि एफएमसीजी पोर्टफोलियो में पर्सनल केयर, लाइफस्टाइल से जुड़ी खुदरा चीजें, माचिस, अगरबत्ती जैसे उत्पाद भी शामिल हैं लेकिन कंपनी ने पैकेज्ड फूड सेगमेंट में अच्छी सफलता हासिल की है। इससे निवेशकों में उत्साह है। ब्रांडेड आटा, क्रीम बिस्कुट, स्नैक फूड और नूडल्स की श्रेणी में शीर्ष दो ब्रांडों में आईटीसी शामिल है। पैकेज्ड फूड के अन्य सेगमेंट की बात करें तो कंपनी फैबेले ब्रांड के तहत प्रीमियम चॉकलेट, सनबीन के तहत कॉफी और बी नैचुरल के तहत जूस की पेशकश करती है। 

 
भविष्य में आईटीसी ब्रांडेड आटा की सफलता दोहराना चाहती है जिसमें  इसकी 28 फीसदी बाजार हिस्सेदारी है। इसके लिए कंपनी अपने प्रमुख आशीर्वाद ब्रांड के तहत नए सेगमेंट में नए उत्पादों की पेशकश करना चाहती है। इनमें से एक लिक्विड मिल्क का सेगमेंट हो सकता है जहां उसने पहले ही ïआर्शीवाद स्वस्ति घी जैसे मूल्य वर्धित उत्पादों की मार्केटिंग शुरू कर दी है। हाल में बिहार में उसने दूध की थैलियों की पेशकश बाजार में उतारी है। आईटीसी दूध थैलियों के सेगमेंट में धीरे-धीरे अपना दायरा बढ़ाएगी जिसकी अनुमानित लागत 72000 करोड़  रुपये होगी। ïवह ब्रांडेड चावल सेगमेंट में भी है। फिलहाल कंपनी  चावल का निर्यात कर रही है और साल के अंत में उसका इरादा देश के बाजार में उतारने का है। देश में ब्रांडेड चावल का बाजार करीब के 22000 करोड़ रुपये है। 
 
मौजूदा आधार और नए उत्पादों के बाजार में उतरने को देखते हुए कंपनी को उम्मीद है कि वह अगले 5 साल में आशीर्वा द ब्रांड के तहत अपनी कमाई दोगुनी से ज्यादा कर 10000 करोड़ रुपये तक कर लेगी। बिस्कुट के कारोबार में भी कंपनी बेहतर कर सकती है। उसका जोर मध्य से प्रीमियम स्तर पर है जिसमें वैल्यू सेगमेंट के मुकाबले ज्यादा तेज वृद्धि हो रही है। नतीजतन बाजार हिस्सेदारी ज्यादा हो सकती है। कारोबार विस्तार में कंपनी को जिस चीज से मदद मिलेगी, वह है उसका वितरण नेटवर्क। इस नेटवर्क के तहत कंपनी के 27 लाख आउटलेट हैं और कंपनी इनका विस्तार कर रही है। वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू होने से आईटीसी को सबसे ज्यादा फायदा मिलेगा क्योंकि आपूर्ति शृंखला और उपभोग का रुझान अब असंगठित से संगठित की तरफ बढ़ रहा है। इतना ही नहीं, ग्रामीण क्षेत्र की मांग में भी सुधार हो रहा है।
 
वित्त वर्ष 2017 में राजस्व में एफएमसीजी कारोबार का योगदान 19 फीसदी तक रहा। वहीं मौजूदा और नए सेगमेंट की वृद्धि को देखते हुए ब्रोकिंग कंपनियों ने यह अनुमान लगाया है कि 2020 तक इसका योगदान करीब 28 फीसदी तक होगा। इस कारोबार ने करीब 11 साल तक घाटा दर्ज करने के बाद वित्त वर्ष 2013 में परिचालन के स्तर पर नफा न नुकसान का स्तर हासिल कर लिया। उम्मीद है कि अगले दो-तीन सालों में इसके मार्जिन में भी सुधार होगा। आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज के विश्लेषकों का कहना है कि एफएमसीजी कारोबार की राजस्व वृद्धि और मुनाफा आईटीसी की दीर्घावधि वृद्धि के लिए अहम साबित होगा। कंपनी को उम्मीद है कि इससे ब्रिकी का लक्ष्य वित्त वर्ष 2018 के अनुमानित 114 अरब रुपये से बढ़कर 2030 तक 1 लाख करोड़ रुपये तक ले जाने में मदद मिलेगी। परिचालन मुनाफे में पेपर और पैकेजिंग के कारोबार का भी योगदान है जो 7 फीसदी के साथ सिगरेट के बाद सबसे ज्यादा परिचालन लाभ देने वाला दूसरा सबसे बड़ा सेगमेंट है। हालांकि राजस्व के लिहाज से इसका योगदान बिक्री का 11 फीसदी तक है। ज्यादा कारोबार और कच्चे माल की कम कीमतों की वजह से पेपर और पैकेजिंग सेगमेंट में मार्जिन का विस्तार दिख रहा है। 
 
जेपी मॉर्गन के विश्लेषकों के मुताबिक एफएमसीजी कारोबार के बेहतर प्रदर्शन और होटल एवं पेपर सेगमेंट में मांग बढऩे से गैर-तंबाकू परिचालन का प्रदर्शन वित्त वर्ष 2019 में बेहतर होने की उम्मीद है। इससे वित्त वर्ष 2018-20 के दौरान गैर-तंबाकू कारोबार के परिचालन मुनाफे में सालाना 14 फीसदी की दर से वृद्धि करने में मदद मिलेगी।  देश के सबसे बड़े सिगरेट निर्माता को कर के मोर्चे पर भी राहत है क्योंकि जीएसटी परिषद की हालिया बैठक में दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया। वित्त वर्ष 2017 में 1.5 फीसदी की वृद्धि के बाद और वित्त वर्ष 2018 की शुरुआती तिमाहियों के दौरान कारोबार में तेज गिरावट के बाद सिगरेट के कारोबार में दिसंबर 2017 में सुधार दिखना शुरू हुआ। वित्त वर्ष 2018 में 3.4 फीसदी की गिरावट की आशंका के बीच वित्त वर्ष 2019 के कारोबार में 5.6 फीसदी की दर से वृद्धि होने की उम्मीद है। इस कारोबार के लिए बेहतर वृद्धि की संभआवनाएं अहम हैं क्योंकि आईटीसी के परिचालन मुनाफा में सिगरेट का योगदान करीब 86 फीसदी तक है। एंटीक स्टॉक ब्रोकिंग के विश्लेषक के मुताबिक वित्त वर्ष 2019 में सिगरेट कारोबार और मुनाफे में सुधार को देखते हुए इस शेयर की कीमत कम है। 
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